बलिया का रहने वाला युवक कमलेश वर्मा अपने 1 साल की बेटी को पेट से बांध कर ई-रिक्शा चलाता है। बच्ची की मां का निधन हो चुका है। ऐसे में कमलेश अकेले ही संघर्षों के साथ बच्ची को पाल रहा है।
कमलेश जिले के दोकटी थाना के चिरंजी छपरा में रहता है। उसकी शादी 3 साल पहले हुई थी। पत्नी का नाम रेवती था। जिसकी उम्र 30 साल थी। कमलेश की बेटी सरस्वती 8 महीने की ही थी, जब रेवती की मौत हो गई थी।
रेवती की जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर रखा था। इसको लेकर वे अपने मायक जाती थी। इसी बीच एक हादसे में उसकी जान चली गई। जब रेवती की मौत हुई तो कमलेश को कुछ समझ नहीं आया। बच्ची की देखरेख में उसकी नौकरी चली गई। रिश्तेदारों ने मुंह मोड़ लिया। एक समय ऐसा आया जब कमलेश को बच्ची को उधार लेकर दूध पिलाना पड़ा।
कमलेश ने बताया कि मेरे साले ने मुझे ई-रिक्शा दिलाया। मैं इसे चलाने लगा। बेटी को भी अपने साथ लेकर जाने लगा। अब बेटी को पेट से बांधकर रिक्शा चलाता हूं। जब बेटी सो जाती है तो आधी सीट पर लेटा देता हूं। बीच-बीच में रुककर दूध पिला देता हूं। सवारी नहीं होने पर उसके साथ खेल भी लेता हूं। मेरी बेटी भी रोकर मुझे परेशान नहीं करती है। कमलेश आगे बताते हैं कि वो ई-रिक्शा से रोज 800-1000 रुपए कमा लेते हैं। रोज का गाड़ी को चार्ज कराने का पैसा लगभग 200 रुपए देते हैं। बच्ची के लिए दूध, घर का सामान, मां की दवा और खाने का सामान ले आते हैं।
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