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बलियाः नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के आरोपी को 10 साल की सजा
बलिया में नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में कोर्ट ने आरोपी को 10 साल की सजा सुनाई है साथ ही आरोपी को अर्थदंड भी अदा करना होगा। बता दें कि मामला भीमपुरा थाने से जुडा है। 2018 के मामले में कोर्ट ने सुनवाई पूरी करते हुए अपना फैसला सुनाया।
जानकारी के मुताबिक साल 2018 में आरोपी सूरज राम पुत्र राजेश राम निवासी बाराडीह लवाई पट्टी थाना नगरा के खिलाफ नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। मामले में पुलिस ने जांच शुरु की। इस दौरान पुलिस की ओर से चार्जशीट पेश करने के बाद अभियोजक राजेश कुमार पांडेय ने प्रभावी ढंग से मामले को रखा।
मामले में कोर्ट ने सुनवाई की। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश अष्टम पास्को एक्ट ने नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में आरोपी सूरज राम पुत्र राजेश राम को दोषी पाते हुए 10 वर्ष की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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