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बलियाः नवविवाहिता से मिलने आया प्रेमी, घरवालों ने पहले की पिटाई फिर करा दी शादी
बलिया से एक अजब मामला सामने आया। यहां नवविवाहिता से मिलने पहुंचे प्रेमी को लड़की के परिजनों से रंगे हाथों पकड़ लिया। इसके बाद घरवालों का गुस्सा फूट पड़ा उन्होंने प्रेमी की जमकर पिटाई की। लेकिन जब लड़की प्रेमी के साथ रहने की जिद पर अड़ गई तो उन्होंने दोनों की शादी करा दी।
खास बात यह है कि नवविवाहिता की शादी भी गुजरात में रह रहे उसके पति की मंजूरी से हुई है। जानकारी के मुताबिक सिकंदरपुर की विवाहिता की शादी करीब डेढ़ साल पहले जमुआंव गांव में हुई थी। उसका पति गुजरात में प्राइवेट नौकरी करता है। नवविवाहिता अपने सुसराल में थी।
इसी बीच उसने अपने प्रेमी को मिलने बुला लिया। रात में परिजनों ने दोनों को रंगे हाथों पकड़ लिया। पहले तो उन्होंने लड़के की जमकर पिटाई की लेकिन जब लड़की प्रेमी के संग रहने की जिद पर अड़ गई तो घंटों पंचायत हुई। इसके बाद दोनों के परिजनों की रजामंदी के बाद चौकिया मोड़ पर दुर्गा मंदिर में दोनों की शादी करा दी गई। नवविवाहिता प्रेमी के साथ विदा हो गई।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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