featured
बलिया के गहनों से चमकेगा देश, जिले में बनेगा प्रदेश का पहला आर्टीफिशियल ज्वेलरी क्लस्टर
बलिया की बिंदी अब भारत के माथे पर चमकेगी, यहां के गहनें देश के कोने-कोने का श्रृंगार करेंगे। उत्तरप्रदेश सरकार जिले में सूबे का पहला आर्टीफिशियल क्लस्टर विकसित करने जा रही है। जिसमें बिंदी के अलावा आर्टीफिशियन ज्वेलरी का निर्माण होगा और बलिया के कारोबारियों की कला देशभर में अपना जादू बिखेरेगी।
बलिया की बिंदी बड़ी फेमस है। इसे अब वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट में शामिल करने की तैयारी है। वहीं आर्टीफिशियल क्लस्टर में ज्लेवरी निर्माण के साथ ही उत्पादों की पैकेजिंग व मार्केटिंग भी आधुनिक मशीनों से की जाएगी। करीब 15 करोड़ की लागत से यह क्लस्टर विकसित किया जाएगा। इसके लिए नेशनल हाईवे 31 पर रसड़ा तहसील क्षेत्र के माधोपुर में करीब पांच एकड़ भूखंड चिह्नित किया गया है। इसका खरीदा जाएगा। यहां दो से तीन हजार लोगों के लिए ज्वेलरी क्लस्टर विकसित होगा। परियोजना का पीपीपी मॉडल (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) पर संचालन होगा। प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
इस क्लस्टर से जिले के सैंकड़ों आर्टिफिशियल ज्वेलरी बनाने वाले कारोबारी लाभानंवित होंगे। जिले में कई कारोबारी ऐसे हैं जिनकी कला का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। ऐसे परिवारों को अब सरकार बड़ा मंच देने जा रही है। अभी जिले के गहने कारोबारियों में 10 फीसद लोग ऐसे हैं जो कच्चा माल मुंबई, राजकोट और बनारस से मंगाते हैं, उसे कुछ परिवारों में देकर बनवाते हैं। शहर के मीना बाजार में ही 200 से अधिक कारोबारी हैं। लेकिन एक बार क्लस्टर स्थापित हो गया तो दूसरे जिलों के कारोबारी बलिया की ओर रुख करेंगे और यहीं कच्चा माल देंगे। इस कच्चे माल से बने गहने भारत के विभिन्न हिस्सों में जाएंगे और सौंदर्य की शोभा बढ़ाएंगे।
इस क्लस्टर निर्माण के लिए जमीन का सर्वे सोमवार को कर लिया गया है। अधिग्रहण रेट तय किया जा रहा है। उद्योग विभाग आंकलन रिपोर्ट तैयार करने में जुटा है। कारोबार से जुड़े लोगों का फीडबैक भी लिया जा रहा है। उद्योग विभाग इसी हफ्ते कारोबार से जुड़े हुए लोगोें की बैठक बुलाने जा रहा है। संयुक्त आयुक्त उद्योग प्रोजेक्ट को अंतिम रुप दिया जाएगा।
वहीं जिला उद्योग केंद्र उपायुक्त श्रवण कुमार सिंह का कहना है कि अभी तक प्रदेश में कहीं भी आर्टीफिशियल ज्वेलरी का क्लस्टर नहीं है। यह बलिया में पहला मौका है जब एक मंच पर दूसरे जिले अथवा प्रांतों के कारोबारी बलिया के छोटे व्यापारियों के साथ काम करेंगे। इससे जिले की ब्रांडिंग होगी। रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। राष्ट्रीय फलक पर उत्पाद को पहचान मिलेगी। प्रस्ताव इसी महीने फाइनल कर शासन को भेजा जाएगा।
वहीं सरकार के इस निर्णय से कारोबारी बेहद खुश हैं। कारोबारियों के कहना है कि जनपद में 250 से अधिक छोटे कारोबारी हैं, इसमें चार कारोबारी थोक वाले हैं। अगर यहां पर क्लस्टर स्थापित होगा तो जाहिर है मुंबई, राजकोट व बनारस के कारोबारियों का जिले से जुड़ाव होगा। यहां के लोगों की आमदनी बढ़ेगी।
featured
Photos- जमुना राम मेमोरियल स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न
26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने अनुशासित मार्च-पास्ट के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर धर्मात्मानंद जी ने ध्वजारोहण किया। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में निहित प्रावधानों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर सेना से सेवानिवृत्त महानुभूतियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया। हरियाणवी नृत्य, “मां से ही माटी” थीम पर आधारित प्रस्तुति, “पधारो मारे देश”, कव्वाली, उत्तर-पूर्व भारत का प्रसिद्ध बिहू नृत्य तथा योग प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। गरबा और भांगड़ा नृत्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “वराह रूपम” नृत्य एवं कथकली प्रस्तुति रही, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संस्था के निदेशक तुषार नंद जी एवं सौम्या प्रसाद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों एवं समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण से ही भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना साकार हो सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारीगण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की सफलता में कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा एवं अरविंद चौबे की विशेष सहभागिता रही।
featured
UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र
बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।
भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।
शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।


