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बलिया- मातम में बदलीं खुशियां, 2 लोगों को बचाने में डूबा युवक, तलाश जारी
बलिया में कुछ ही देर में खुशियां मातम में बदल गईं। चैनछपरा घाट पर शुक्रवार को मुंडन संस्कार के दौरान हादसा हो गया। जहां एक 18 वर्षीय युवक गंगा नदी में डूब गया। मौके पर पहुंची पुलिस मल्लाहों और अन्य लोगों की मदद से तलाश में जुटी है। बताया जा रहा है कि गांव के दो लोगों को बचाते वक्त हादसा हुआ। घटना के बाद से परिजनों में कोहराम मचा है।
जानकारी के मुताबिक सोनवानी गांव निवासी संजय गुप्ता के बेटे के मुंडन संस्कार में परिवार के लोग समेत कई ग्रामीण महिलाएं चैनछपरा घाट पर गईं थीं। इसमें टिंकू प्रजापति (18) पुत्र स्व. लक्ष्मण प्रजापति भी शामिल था। गांव का मुनन खरवार (25) पुत्र हरिमोहन खरवार व संदीप यादव (10) पुत्र मनजी यादव के साथ चैनछपरा स्थित गंगा घाट पर स्नान कर रहा था।
जहां संदीप और मुनन अचानक गहरे पानी में जाने से डूबने लगे। उन्हें बचाने के लिए टिंकू गंगा में कूद गया। संदीप और मुनन को किसी तरह से बचा लिया गया लेकिन टिंकू का कुछ पता नहीं चला। सूचना मिलते ही परिजन भी घाट पर पहुंच गए। गंगा घाट पर रुदन-चीत्कार मच गया। टिंकू 5 भाइयों में चौथे नंबर का है। मौके पर थानाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह, उपनिरीक्षक शैलेंद्र पांडेय, उपनिरीक्षक महेंद्र प्रताप सिंह हमराहियों के साथ मौजूद हैं।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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