बलिया। घाघरा नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने से किनारे पर बसे लोगों की चिंता बढ़ गई है। पिछले 24 घंटे में घाघरा नदी का जलस्तर 12 सेमी बढ़ा है। हालांकि खतरे के निशान से अभी 18 सेमी नीचे है। राहत की बात है कि विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक जलस्तर फिलहाल स्थिर है। फिर भी किनारे पर बसे लोगों को चिंता सता रही है। शनिवार को डीएसपी हेड पर घाघरा का जलस्तर 63.83 मीटर रहा, जो शुक्रवार को 63.71 मीटर पर था। यानी बीते 24 घंटे में 12 सेमी का बढ़ा है। प्रति घण्टे आधा सेमी से अधिक दर से घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ रहा है।
घाघरा का जलस्तर बढ़ने से लोंगों की धड़कन तेज हो गई हैं। तहसील क्षेत्र के डूहा विहरा, कठौड़ा, खरीद, पुरुषोत्तम पट्टी, निपनिया, बसारिखपुर समेत आधा दर्जन गांवों के किसानों के सामने बाढ़ का खतरा मडराने लगा है। जल स्तर में लगातार बढ़ाव जारी है। नदी की लहरों का जलस्तर चांदपुर गेज पर खतरा बिन्दु 58 मी. के सापेक्ष 57.39 मी. पर बढ़ाव के साथ अठखेलियां कर रही है। जिससे घाघरा दियरांचल के रहवासियों के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें खिंच गयी है। साथ ही नदी की बलखाती लहरों ने घाघरा दियरांचल क्षेत्र में कहर बरपाना शुरु कर दिया है।
नदी की प्रचण्ड लहरें कृषि योग्य भूमि को अपना ग्रास बनाते हुए उसे नदी में समाहित करती जा रही है। बता दें इस मानसून में नदी की लहरें खतरा बिन्दु को दूसरी बार पार करने को आतुर है। नदी का जलस्तर बढऩे पर तटवर्तीय क्षेत्र के लोगों को हमेशा डर लगा रहता है क्योंकि 70 के दशक से लेकर अब तक नदी की विनाशकारी लहरों ने करीब आधा दर्जन से अधिक गांवों को अपनी आगोश में लेकर उनका अस्तित्व समाप्त कर चुकी है। फरवरी से तीलापुर डेंजर जोन पर 11 करोड़ 63 लाख की लागत से चल रहे बाढ़ बचाव कार्य पर भी ग्रहण लग सकता है।
कच्छप गति से चल रहे बचाव कार्य 4 माह बीत जाने के बाद भी पूर्ण नहीं हो सका है। अब जबकि नदी की तीव्र लहरें खतरा बिन्दु पार करने को आतुर है तथा नदी अपने वेग का साथ बह रही है। ऐसे में बाकी बचे बचाव कार्य कैसे हो पायेगा यह सोचनीय विषय है? लगभग 4 दशकों से बाढ़ विभीषिका तथा नदी की लहरों से टक्कर लेते हुए टीएस बन्धा कमजोर हो चुका है। रही सही कसर साहिल आदि जानवरों ने बन्धे में मांद बनाकर पूरी कर दी है।
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