भारत की जीवनदायिनी गंगा लगातार प्रदूषण का शिकार हो रही है। ऐसे में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) का आदेश है कि गंगा मेें मल-जल सीधे नहीं बहाया जाए। लेकिन बलिया में इस आदेश पर अमल नहीं हुआ। गंगा अभी भी मैली हो रही है। जिसको लेकर अब शासन ने सख्त एक्शन की तैयारी कर ली है। नगरीय विकास विभाग ने परिषद को शोधित करने के बाद ही गंगा में मल-जल गिराने के आदेश दिए हैं। नालों को साफ करने के लिए बायो रेमिडिएशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
जिसके कारण रिएक्शन से स्लज में बैक्टीरिया ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ा देता है। नाले की जो भी गंदगी होती है, वह लिक्विड फॉर्म में तब्दील हो जाती है। और इससे सफाई का काम होता है। इस तकनीक का उपयोग कर शहर का बड़ा नाला जो 74 छोटे व बड़े नालों को सीधे जोड़ता है, उसकी सफाई की जाएगी। यहां प्रयोग सफल होने के बाद इस तकनीक को कई और नालों में प्रभावी करने की तैयारी चल रही है। एक अक्टूबर को कंपनी के चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। अगले महीने से परियोजना को अमल में लाएंगे।
जानकारी के मुताबिक शहर के बेदुआ, जापलिनगंज पुलिस चौकी, चित्तू पांडेय चौराहा, विजयीपुर व महावीर घाट पर डोजिंग (पानी में बायोलाजिकल कंपाउंड पर्सनीक्रेटी 713 का मिश्रण) किया जाएगा। इसके अलावा बेदुआ, महावीर घाट व विजयीपुर में जाली लगाया जाएगा। नाले मेेंं बहने वाला कचरा रोज जाली से छानकर अलग किया जाएगा। वहीं नगर पालिका परिषद अधिशासी अधिकारी दिनेश विश्वकर्मा ने बताया कि टेंडर कर दिया गया है। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह से पालिका जल प्रदूषण को लेकर काम शुरू कर देगा। कंपनी ही पूरा काम देखेगी। इससे गंगा को स्वच्छ रखने में मदद मिलेगी।
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