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बलियाः अस्पताल में कुर्सी पर सोते मिले चिकित्सक, मरीज इलाज की आस में बैठे रहे

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बलिया के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदरपुर में लापरवाही का आलम नजर आया जहां ओपीडी में तैनात चिकित्सक डॉक्टर दिग्विजय अपने टेबल पर सोते नजर आए।

इस दौरान मरीज उनके आसपास खड़े रहे लेकिन चिकित्सक सोते रहे। आधा दर्जन की संख्या में मौजूद मरीज खड़े रहे लेकिन चिकित्सक पूरी तरह अनजान बने रहे। मरीज इलाज की आस में डॉक्टर के उठने का इंतजार करते रहे तो कुछ मरीज इलाज के अभाव में वापस लौट गए।

मरीजों का कहना है कि यह स्थिति आए दिन देखने को मिलती है। कभी डॉक्टर, मरीज को बेइज्जत कर भगा देते हैं तो कभी मरीजों की घंटों इंतजार के बाद भी बारी नहीं आती। कभी डॉक्टर अचानक अपनी ओपीडी ड्यूटी से उठ कर चले जाते हैं तो कभी ऑन ड्यूटी नींद की झपकी लेते दिखते हैं। इस संबंध में सीएचसी अधीक्षक डॉ. ब्यास कुमार का कहना है कि मामले की जांच की जाएगी।

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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र

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बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।

जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।

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