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बलिया: डीएम अदिति सिंह ने किया मिशन शक्ति अभियान 3.0 का शुभारंभ, 75 महिलाओं को किया सम्मानित
बलिया में अगस्त से लेकर दिसंबर महीने तक मिशन शक्ति अभियान 3.0 चलाया जा रहा है। आज इसका शुभारंभ बहुद्देश्यीय सभागार में हुआ। जिलाधिकारी अदिति सिंह ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन पर चर्चा की गई साथ ही इसके महत्व पर प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम के शुभांरभ के बाद जिलाधिकारी अदिति सिंह ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया, उन्होंने कहा कि हम सबके जागरूक होने के बाद ही समाज में बदलाव सम्भव है। इस कड़ी में सबसे जरूरी है बालिकाओं को शिक्षित करना। बालिकाएं शिक्षित होगी तो जागरूक होगी, और जागरूक होगी तो खुद की सुरक्षा के साथ अपने परिवार की भी सुरक्षा व उत्थान सुनिश्चित कर सकेंगी। इसलिए हर कोई बेटियों को पढ़ने का पूरा अवसर देने का संकल्प लें। जिलाधिकारी ने कहा, ‘हमारा प्रयास है कि महिलाओं को मनरेगा से अधिक से अधिक रोजगार, स्वयं सहायता समूह के माध्यम से आर्थिक उत्थान का माध्यम मिले और अन्य योजनाओं के माध्यम से स्वावलंबी बन सकें।’ उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर रही हूँ। जिले में आने के बाद महिला अपराध के मामलों में प्रभावी पैरवी कराकर अपराधियों को सजा दिलवाई।
मुख्य कार्यक्रम लखनऊ में आयोजित किया गया। जिसका सीधा प्रसारण बलिया में भी हुआ। लखनऊ में आयोजित हुए इस कार्यक्रम में बलिया की शिक्षिका को सम्मानित किया गया। जब राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जिले की बेसिक शिक्षिका प्रतिमा उपाध्याय को सम्मानित किया। प्रतिमा उपाध्याय प्राथमिक विद्यालय अमृतपाली पर बतौर प्रधानाध्यापिका तैनात हैं।
एसपी राजकरन नय्यर ने कहा कि उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं से हर बेटियां प्रेरित हों। उन्होंने आश्वस्त किया कि सभी बेटी व महिला निर्भीक होकर अपने लक्ष्य प्राप्ति की ओर अग्रसर हो। उनकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। किसी को कहीं कोई दिक्कत हो तो सीधे मुझे बताएं। आप सबकी सुरक्षा के लिए दिन-रात एक पैर पर खड़ा रहूंगा। कार्यक्रम में कस्तूरबा गांधी विद्यालय रेवती की बालिकाओं ने देशभक्ति गीत पर सामूहिक नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। वहीं, कराटा चैम्पियशिप में ब्लैक बेल्ट हासिल करने वाली रसड़ा क्षेत्र की निवासी चांदनी चौहान के नेतृत्व में कराटे की अद्भुत प्रस्तुति एनसीसी कैडेट्स ने किया, जिसे डीएम-एसपी ने सराहा। कार्यक्रम में सीडीओ प्रवीण वर्मा, डीएफओ श्रद्धा यादव, डिप्टी कलेक्टर सीमा पांडेय व दीपशिखा सिंह, सीडीपीओ सुरेंद्र यादव, सीएमएस महिला डॉ सुमिता सिंहा आदि मौजूद थे। संचालन राजकीय इंटर कालेज चितबड़ागांव के प्रधानाचार्य अतुल तिवारी ने किया।
उत्कृष्ट कार्य के लिए 75 महिलाओं को किया सम्मानित- कार्यक्रम में जिलाधिकारी ने सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले महिलाओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने महिला थानाध्यक्ष सरोज यादव, जीजीआईसी की अध्यापिका शिल्पा शर्मा, बेसिक शिक्षिका सरवत अफरोज, समाजसेवी सन्ध्या पांडेय समेत 75 महिलाओं को सम्मान-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसमें बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग, स्वास्थ्य, पुलिस विभाग, माध्यमिक शिक्षा, की दस-दस महिलाओं और बेसिक शिक्षा की पांच शिक्षिकाओं व बहादुरी व शौर्य के लिए पांच महिला खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया। इसके अलावा दस ग्राम प्रधान/वार्ड सभासद, स्वरोजगार के क्षेत्र में कार्य करने वाले स्वयं सहायता समूह की 10 महिला सदस्यों को भी सम्मानित किया गया।
जिलाधिकारी के सम्मान में खड़ा हुआ पूरा सभागार- कार्यक्रम के दौरान महिला सशक्तिकरण के एक बड़े उदाहरण के रूप में मौजूद मुख्य अतिथि जिलाधिकारी अदिति सिंह के सम्मान में सभागार में मौजूद हर कोई जोरदार तालियां बजाते हुए खड़ा हुआ। खास तौर पर माध्यमिक छात्राएं और महिला एनसीसी कैडेट्स उनसे प्रभावित होकर उच्च पद पर जाने को आतुर दिखीं। जिलाधिकारी ने भी अपने संबोधन में उन्हें सफलता प्राप्त करने के तमाम टिप्स दीं।
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Photos- जमुना राम मेमोरियल स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न
26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने अनुशासित मार्च-पास्ट के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर धर्मात्मानंद जी ने ध्वजारोहण किया। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में निहित प्रावधानों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर सेना से सेवानिवृत्त महानुभूतियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया। हरियाणवी नृत्य, “मां से ही माटी” थीम पर आधारित प्रस्तुति, “पधारो मारे देश”, कव्वाली, उत्तर-पूर्व भारत का प्रसिद्ध बिहू नृत्य तथा योग प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। गरबा और भांगड़ा नृत्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “वराह रूपम” नृत्य एवं कथकली प्रस्तुति रही, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संस्था के निदेशक तुषार नंद जी एवं सौम्या प्रसाद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों एवं समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण से ही भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना साकार हो सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारीगण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की सफलता में कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा एवं अरविंद चौबे की विशेष सहभागिता रही।
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UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र
बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।
भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।
शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।
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