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बलिया- निकाय चुनाव में ST सीट आरक्षित करने की मांग, GGP का 7वें दिन धरना जारी

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बलिया। निकाय चुनाव में अनुसूचित जनजाति के लिए वार्ड सदस्य/सभासद की सीटे आरक्षित करने की मांग की जा रही है। मांग को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के तत्वावधान में कलेक्ट्रेट मॉडल तहसील के पास जारी धरना 7वें दिन भी जारी रहा। मांगे पूरी न होने तक धरना जारी रहेगा।

धरना सभा को सम्बोधित करते हुए गोंडवाना विचारक वरिष्ठ नेता छितेश्वर प्रसाद गोंड ने कहा कि भारत के राष्ट्रपतीय राजपत्र संविधान संशोधन अधिनियम 2002 द्वारा बलिया जिले में निवास करने वाली गोंड जाति को अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता दी गयी है जिनकी आबादी भारत सरकार की जनगणना 2011 के अनुसार एक लाख दस हजार से भी अधिक है।

इस आधार पर 2017 के निकाय चुनाव में बलिया में अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए सीटे आरक्षित की गयी थी। उसी तर्ज पर 2022 के निकाय चुनाव में भी ST के लिए सीटे आरक्षित करना संवैधानिक न्याय संगत होगा। युवा नेता दुर्गविजय खरवार ने कहा कि जाति प्रमाण पत्र के अभाव में जनजाति छात्र नौजवान अगली कक्षा में प्रवेश, छात्रवृत्ति और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं, नौकरी के फार्म भरने से वंचित हो जा रहे है।

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी उत्तर प्रदेश प्रभारी अरविन्द ने कहा कि लोकसभा/राज्यसभा में गोंड जनजाति के सम्बन्ध में चर्चायें होती है इनको अनुसूचित जनजाति का दर्जा देते हैं तो वही बलिया सदर तहसीलदार के उत्पीड़नकारी तहसीलदार निखिल शुक्ला ने ‘‘सदन का आदेश नहीं है’’ यह लिखकर गोंड अनुसूचित जनजाति का आवेदन ही निरस्त कर दिया। जो भारत की संसद और संविधान शासनादेश की घोर अवमानना है। जिनपर कार्रवाई होना चाहिए।

साथ ही सभा के दौरान असम कोकराझार के स्वतंत्र लोकसभा सांसद नाबा कुमार सरनिया ने 8 दिसम्बर को लोकसभा में उप्र के गोंड जाति को सुगमतापूर्वक जाति प्रमाण पत्र जारी करने और निकाय चुनाव में सीटे आरक्षित करने की मांग किये जाने पर प्रशन्नता जाहिर करते हुए उनके प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र

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बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।

जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।

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