बैरिया
बलिया- खाद्यान्न के नाम पर हो रहा भ्रष्टाचार, कार्यवाही करने में फेल प्रशासन!
बैरिया डेस्क : बैरिय तहसील के कोटेदारों द्वारा हाट गोदाम से खाद्यान्न उठान के समय भ्रष्टाचार का आरोप यह कोई पहली बार नहीं लगाया गया है। इसके पूर्व भी एक कोटेदार ने हाट गोदाम रानीगंज से खाद्यान्न उठान के समय अवैध वसूली व घटतौली का आरोप लगा चुका है। जिसका आडियो वायरल होने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगरौत ने जांच कराई थी।
22 जुलाई 2018 की जांच रिपोर्ट में तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट डाक्टर विश्राम ने भ्रष्टाचार को सही मानते हुए कार्रवाई के लिए संस्तुति किया था। जिसकी जांच रिपोर्ट में हाट निरीक्षक के अलावे डिप्टी आरएमओ सहित अन्य कई सम्बंधित अधिकारी को दोषी ठहराया गया था।
फ़ाइल बस्ता ए खामोशी डाली गई ?
बता दें कि तीन जुलाई 2018 को एक कोटेदार द्वारा भ्रष्टाचार के कबूलनामा का ऑडियो वायरल हुआ था, इसके बाद दूसरा आडियो विभाग के कर्मचारियों द्वारा बात करते हुए विगत चार अगस्त 2018 को वायरल हुआ। दोनों वायरल आडियो की जांच का जिम्मा तत्कालीन जिलाधिकारी ने तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा था। लेकिन आश्चर्य की बात तो यह है कि पहला वायरल आडियो जिसमें हाट निरीक्षक के अलावे डिप्टी आरएमओ सहित अन्य अधिकारियों की गला नप रही थी, उसकी जांच रिपोर्ट दबाकर दूसरे वायरल आडियो की जांच रिपोर्ट के आधार पर पूर्ति कार्यालय बैरिया के तत्कालीन लिपिक को निलंबित कर पूर्ति निरीक्षक श्याम नाथ का स्थानांतरण कर दिया गया था।
अब इस बार बैरिया, मुरलीछपरा व रेवती आंशिक के 160 कोटेदारों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देते हुए खाद्यान्न उठान के समय हाट गोदामो पर के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। ऐसे में विभाग क्या इस बार सम्बंधित अधिकारियों पर कार्रवाई करता है या फिर सिर्फ कोटेदारों को ही दोषी मान खानापूर्ति कर कागजी कोरम पूरा कर देता है।
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या तो मांगे पूरी करें या फिर इस्तीफा मंजूर करें
हाट गोदाम रानीगंज व हाट गोदाम लालगंज के एक भी कोटेदारों ने सितंबर माह के खाद्यान्न का उठान अब तक शुरू नहीं किया है। जबकि महीने के हर 21 तारीख से 30 तारीख तक कोटेदारों को खाद्यान्न उठान होता है। ऐसे में कोटेदार संघ के संरक्षक शिवनाथ सिंह, तहसील अध्यक्ष रामजी तिवारी ने कहा कि या तो हम कोटेदारों की मांगों को पूरा किया जाय या हमारा इस्तीफ़ा मंजूर किया जाय।
रिपोर्ट- तिलक कुमार
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बैरिया विधानसभा सर्वे 2027
बैरिया विधानसभा में 2027 को लेकर चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं। विधायक जय प्रकाश अञ्चल के कार्यकाल में सड़क, रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बाढ़ जैसे मुद्दों पर क्षेत्र को क्या मिला? आप उनके काम को कितने नंबर देंगे और 2027 में किसे विधायक देखना चाहते हैं? बलिया ख़बर के सर्वे में हिस्सा लें।
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आजाद अधिकार सेना ने ओम प्रकाश को सौंपी बलिया जिलाध्यक्ष की कमान
आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने क्षेत्र के पिपरियाटा निवासी ओम प्रकाश गिरी को बलिया जनपद का जिला अध्यक्ष नियुक्त किया है। वहीं, कर्ण छपरा निवासी त्रिवेणी सिंह को बैरिया विधानसभा क्षेत्र का अध्यक्ष बनाया गया है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दोनों पदाधिकारियों को संगठन के साथ मिलकर जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने और आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने का निर्देश दिया है।
ओम प्रकाश गिरी ने कहा कि संगठन द्वारा उन्हें जो जिम्मेदारी दी गई है, उसका पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन करेंगे। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना और उनके साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना संगठन की प्राथमिकता होगी।
उन्होंने कहा कि पार्टी को गांव-गांव तक मजबूत किया जाएगा और जनसमस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए आम लोगों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष किया जाएगा।
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मैनेजर सिंह राजकीय पॉलीटेक्निक के नाम से जाना जाएगा इब्राहिमाबाद का पॉलीटेक्निक
बलिया के बैरिया क्षेत्र के इब्राहिमाबाद में करोड़ों की लागत से बने राजकीय पॉलीटेक्निक बनाया गया था। अब इसे जननायक स्व. बाबू मैनेजर सिंह राजकीय पॉलीटेक्निक के नाम से जाना जाएगा। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह की पहल पर प्रदेश सरकार और राज्यपाल की ओर से इसकी मंजूरी मिल गयी है।
बता दें कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश की पिछली सरकार में करीब 19 करोड़ रुपए खर्च कर इब्राहिमाबाद में राजकीय पॉलीटेक्निक का निर्माण कराया गया था। इसका लोकार्पण तत्कालीन विधायक सुरेन्द्र सिंह ने किया था।
कुछ दिनों पहले परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने राजकीय पॉलीटेक्निक का नाम अपने मामा और बलिया के गांधी व बैरिया के मालवीय कहे जाने वाले पूर्व विधायक मैनेजर सिंह के नाम पर करने की पहल की थी। इसके लिए उन्होंने शासन को पत्र लिखा था।
अब इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। गुरुवार को परिवहन मंत्री ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि शासन से मंजूरी के बाद राज्यपाल की ओर से नामकरण की अनुमति मिल गयी है।
खास बात है कि मैनेजर सिंह ने बेरिया क्षेत्र में प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा के कई केन्द्र स्थापित किए। हालांकि किसी से उन्होंने अपना नाम नहीं जोड़ा। राजकीय पॉलीटेक्निक का नामकरण उनके नाम पर होना स्व. सिंह के प्रति श्रद्धांजलि है।
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