बलिया: समय पर नहीं पहुंची एंबुलेंस, ई-रिक्शे में हुआ बच्चे का जन्म

बलिया के सिकंदरपुर में सोमवार को हुई एक घटना ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। एक महिला के परिजन घंटो तक एंबुलेंस को फोन मिलाते रहे लेकिन वक्त पर एंबुलेंस नहीं पहुंची। महिला गर्भवती थी। उसे बच्चा होने वाला था। अंत में परिजन एक ई-रिक्शा से गर्भवती महिला को लेकर अस्पताल की ओर चल पड़े। अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में महिला ने बच्चे को जन्म दे दिया।

मामला सिकंदरपुर के आदमपुर का है। दैनिक जागरण की एक खबर के मुताबिक आदमपुर की रहने वाली एक तीस वर्षीय धानतो देवी नाम की महिला गर्भवती थी। धानतो देवी के घर वालों ने उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए 102 एंबुलेंस पर फोन किया। परिजन काफी देर तक एंबुलेंस को फोन करते रहे। लेकिन हर बार एंबुलेंस के चालक की ओर से जवाब मिला कि वह जिला मुख्यालय पर है और जल्दी नहीं पहुंच सकता है।

अस्पताल जाने का और कोई साधन सुरक्षित नहीं था। इस वजह से परिजन एंबुलेंस के लिए इंतजार कर रहे थे। जब बात नहीं बनी तब एक ई-रिक्शा से अस्पताल जाना तय हुआ। महिला को लेकर घर वाले ई-रिक्शा से ही सिकंदरपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाने लगे। लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ई-रिक्शे में ही महिला ने बच्चे को जन्म दे दिया। साथ में कुछ महिलाएं थी जिन्होंने स्थिति संभाला।

अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने मां और बच्चे को सुरक्षित बताया। हालांकि परिजनों में एंबुलेंस सेवा को लेकर नाराजगी थी। उनका कहना था कि “ऐसे आपात स्थिति में के लिए ही एंबुलेंस की सुविधा दी जाती है। लेकिन चालक ने आज जरूरत पड़ने पर काम नहीं दिया। इसके चालक कभी भी समय पर जरूरतमंदों की मदद नहीं करते हैं।”

जागरण ने सिकंदरपुर के प्रभारी चिकित्सधिकारी डा. व्यास कुमार का बयान छापा है। डा. व्यास का कहना है कि “एंबुलेंस सेवा की मॉनीटरिंग लखनऊ से होती है। आज किस कारण एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी, इसकी जांच कराई जाएगी। लापरवाही के संबंध में उच्च अधिकारियों को पत्र भी लिखा जाएगा।” डा. व्यास का बयान सीधे तौर पर एक सरकारी बयान है। जिस जांच की बात डा. व्यास कह रहे हैं वो कभी पूरी नहीं हो पाती है। लेकिन सवाल गंभीर है कि रास्ते में ई-रिक्शा में बच्चे को जन्म देते हुए कोई दुर्घटना हो जाती तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता?

Akash Kumar

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