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बलिया- दम तोड़ती मानवता के 8 दोषी, ठेले पर मरीज को ले जाने के मामले में होगी कार्रवाई

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बलिया। चिलकहर क्षेत्र में ठेले पर मरीज को ले जाने के मामले में 8 लोगों को दोषी ठहराया गया है। जिनपर अब गाज गिरना तय है। मामले की जांच उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के आदेश के बाद से चल रही है। CMO की रिपोर्ट को रद्द कर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के निदेशक देवव्रत सिंह ने अपर निदेशक डा. पीके मिश्र से जांच कराई है। बता दें कि स्वास्थ्य सिस्टम की गड़बड़ी से एक बुजुर्ग को पत्नी को ले अस्पताल ले जाने के लिए एंबलेंस नहीं मिली थी। और फिर इलाज में देरी होने से बुजुर्ग महिला की मौत हो गई थी मानवता के साथ महिला ने तोड़ा था दम- अंदौर गांव में बीमार पत्नी जोनिया देवी को बचाने के लिए पति सुकुल प्रजापति ने अपनी ओर से कोई कमी नहीं रखी थी।

घर से ठेले पर पत्नी को लादकर पहले वह चिलकहर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे थे, वहां के चिकित्सकों सहित अन्य स्टाफ ने भी यह सीन देखा था। महिला की हालत गंभीर देख चिकित्सक ने दो टूक कहा कि इन्हें जिला अस्पताल ले जाइए। लेकिन अस्पताल के किसी भी जिम्मेदार ने उन्हें एंबुलेंस बुलाने की सलाह नहीं दी या न इंतजाम ही कराया। गांव की आशा बहू तक को कोई खबर नहीं थी। यहां से उसी ठेले से वह जिला अस्पताल जाने को लगभग पांच किमी तक मुख्य सड़क तक पहुंचे। फिर एक टेम्पो लिया और जिला अस्पताल आ गए, लेकिन इलाज के दौरान पत्‍‌नी ने दम तोड़ दिया।

ना समय पर इलाज नाम मिला शव वाहन- जिला अस्पताल में जोनिया देवी की मौत के बाद भी जिम्मेदारों ने शव वाहन तक का इंतजाम नहीं कराया। जबकि नियम है कि भर्ती मरीज की मौत के बाद अस्पताल की ओर से शव को घर तक भेजवाया जाता है। जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में तैनात स्टाफ नर्स ने अगर तत्परता दिखा कर शव वाहन के लिए अधिकारियों को सूचना दी होती तो बुजुर्ग की मदद हो जाती, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। बड़ी बात यह कि मामले की जांच में उक्त स्टार्फ नर्स का जिक्र तक नहीं है। हालांकि अस्पताल में दो तीन स्थानों पर शव वाहन के लिए संपर्क करने की सूचना लिखी है, जिसका बुजुर्ग को अनुभव नहीं था।इसलिए वह किराये पर एंबुलेंस करके शव को घर ले गए।8 लोगों को होगी कार्रवाई: जांच के आधार पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक डा. वेदव्रत सिंह ने मामले में 3 डाक्टर और 5 कर्मियों पर आरोप तय किए हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चिलकहर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डा. प्रशांत और फार्मासिस्ट राजेश राय ने लापरवाही बरती। उन्होंने जिला अस्पताल रेफर करते समय एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं कराई। बलिया जिला अस्पताल पहुंचते ही डाक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया। उन्होंने शव घर भेजने के लिए वाहन उपलब्ध नहीं कराया।जिला चिकित्सालय बलिया के शव वाहन प्रभारी डा. विनेश कुमार, इमरजेंसी मेडिकल आफिसर डा. अनुराग सिंह, चीफ फार्मासिस्ट अमरनाथ और

उमेश उपाध्याय, वार्ड ब्वाय राकेश कुमार वर्मा व सफाईकर्मी राजकुमार रावत के खिलाफ लापरवाही बरतने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने की संस्तुति की गई है। जल्द इन्हें आरोप पत्र देकर जवाब मांगा जाएगा और फिर आगे की कार्रवाई शुरू होगी।कार्रवाई को लेकर सीएमओ डॉ. नीरज कुमार पांडेय का कहना है कि अभी लिखित रूप से आरोप पत्र के साथ कोई आदेश नहीं आया है। इस मामले में कई स्तर से लापरवाही हुई है। पूरे मामले की जांच पूरी हो चुकी है।

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Photos- जमुना राम मेमोरियल स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न

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26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने अनुशासित मार्च-पास्ट के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर धर्मात्मानंद जी ने ध्वजारोहण किया। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में निहित प्रावधानों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर सेना से सेवानिवृत्त महानुभूतियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया। हरियाणवी नृत्य, “मां से ही माटी” थीम पर आधारित प्रस्तुति, “पधारो मारे देश”, कव्वाली, उत्तर-पूर्व भारत का प्रसिद्ध बिहू नृत्य तथा योग प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। गरबा और भांगड़ा नृत्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “वराह रूपम” नृत्य एवं कथकली प्रस्तुति रही, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संस्था के निदेशक तुषार नंद जी एवं सौम्या प्रसाद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों एवं समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण से ही भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना साकार हो सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारीगण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की सफलता में कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा एवं अरविंद चौबे की विशेष सहभागिता रही।

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UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र

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बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।

भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।

शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।

उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।

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