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बलिया स्पेशल

स्वतंत्रता दिवस: आजादी से 5 साल पहले ही आजाद हो गया था बलिया

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15 अगस्त यानि स्‍वतंत्रता दिवस पर हम आपको बलिया के बारे में एक ऐसी बात बताने जा रहे हैं जो बहुत कम लोगों को ही मालूम होगा. दरअसल भारत आजाद हुआ 1947 को लेकिन बलिया को 1942 में ही आजाद करा लिया गया था और इसमें बहुत बड़ा योगदान था चित्तू पांडेय का.

स्वतंत्रता सेनानियों के सामने 19 अगस्त 1942 को बलिया जिले के कलेक्टर ने आत्मसमर्पण कर दिया था. कलेक्टर को जन दबाव के कारण जेल में बंद चित्तू पांडेय और उनके साथियों को रिहा करना पड़ा. जेल से निकलने में थोड़ी देर हुई तो लोगों ने फाटक तोड़ दिया था. इसके बाद आंदोलनकारियों ने कलेक्टरी पर कब्जा कर लिया और चित्तू पांडेय को वहां का जिलाधिकारी घोषित कर दिया.

चित्तू पांडेय का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रत्तू-चक गांव में 1865 में हुआ था. उनका निधन 1946 में हुआ. आजादी की लड़ाई के दौरान चित्तू पांडेय अपने साथियों जगन्नाथ सिंह और परमात्मानंद सिंह के साथ गिरफ्तार कर लिए गये थे. इससे बलिया की जनता क्षुब्ध थी.

इस बीच नौ अगस्त 1942 को गांधी और नेहरू के साथ-साथ कांग्रेस कार्य समिति के सभी सदस्य गिरफ्तार कर अज्ञात जगह भेज दिए गए. इससे जनता उत्तेजित हुई. बलिया जिले के हर प्रमुख स्थान पर प्रदर्शन व हड़तालें शुरू हो गईं. तार काटने, रेल लाइन उखाड़ने, पुल तोड़ने, सड़क काटने, थानों और सरकारी दफ्तरों पर हमला करके उन पर राष्ट्रीय झंडा फहराने के काम में जनता जुट गई थी.

चौदह अगस्त को वाराणसी कैंट से विश्व विद्यालय के छात्रों की ‘आजाद ट्रेन’ बलिया पहुंची. इससे जनता में जोश की लहर दौड़ गई. 15 अगस्त को पांडेय पुर गांव में गुप्त बैठक हुई .उसमें यह तय हुआ कि 17 और 18 अगस्त तक तहसीलों तथा जिले के प्रमुख स्थानों पर कब्जा कर 19 अगस्त को बलिया पर हमला किया जाएगा.

17 अगस्त की सुबह रसड़ा बैरिया, गड़वार, सिकंदरपुर , हलधरपुर, नगरा, उभांव आदि स्थानों पर जनता ने धावा बोल दिया. बैरिया थाने पर जनता ने जब राष्ट्रीय झंडा फहराने की मांग की तो थानेदार राम सुंदर सिंह तुरंत तैयार हो गया. यही नहीं, उसने स्वयं गांधी टोपी पहन ली. झंडा फहराने के बाद जब जनता ने हथियार मांगे तो थानेदार ने दूसरे दिन देने की बात करके समस्या को टाल दिया.

दूसरे दिन करीब 40-50 हजार लोगों की भीड़ थाने पहुंची. थानेदार ने धोखा देकर करीब 19 स्वतंत्रता सेनानियों को मार डाला. गोली-बारूद खत्म हो जाने के बाद थानेदार ने अपने सिपाहियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया. पर जनता ने किसी पुलिसकर्मी पर आक्रमण नहीं किया.

बैरिया की तरह नृशंस कांड रसड़ा में गुलाब चंद के अहाते में भी हुआ. पुलिसिया जुल्म में बीस लोगों की जानें गईं. इस तरह आंदोलनकारियों ने 18 अगस्त तक 15 थानों पर हमला करके आठ थानों को पूरी तरह जला दिया. सोलह रेलवे स्टेशन फूंके गए. सैकड़ों जगह रेल की पटरियां उखाड़ी गईं. अठारह पुलिस कर्मी मारे गए. उनके हथियार छीने गए. 19 अगस्त को जनता जिला मुख्यालय बलिया पहुंची.अपार जन समूह को आता देख कलेक्टर घबरा गया. कलेक्टर ने चित्तू पांडेय और जगन्नाथ सिंह सहित 150 सत्याग्रहियों को रिहा कर दिया.

19 अगस्त को जिले में राष्ट्रीय सरकार का विधिवत गठन किया गया जिसके प्रधान चित्तू पांडेय बनाए गए. जिले के सारे सरकारी संस्थानों पर राष्ट्रीय सरकार का पहरा बैठा दिया गया. सारे सरकारी कर्मचारी पुलिस लाइन में बंद कर दिए गए. हनुमान गंज कोठी में राष्ट्रीय सरकार का मुख्यालय कायम किया गया.

लोगों ने नई सरकार को हजारों रुपए दान दिए. चित्तू पांडे के आदेश से हफ्तों बंद दुकानें खोल दी गईं. 22 अगस्त को ढाई बजे रात में रेल गाड़ी से सेना की टुकड़ी नीदर सोल के नेतृत्व में बलिया पहुंची.

नीदर सोल ने मिस्टर वॉकर को नया जिलाधिकारी नियुक्त किया. 23 अगस्त को 12 बजे दिन में नदी के रास्ते सेना की दूसरी टुकड़ी पटना से बलिया पहुंची. इसके बाद अंग्रेजों ने लोगों पर खूब कहर ढाये. आंदोलनकारियों को अदालत में पेश किया गया. उन्हें सात-सात साल की कैद और बीस-बीस बेंत की सजा दी गई.

किसी को नंगा करके पीटा गया तो किसी को हाथी के पांव में बांध कर घसीटा गया. उन घरों को ध्वस्त किया गया जहां सत्याग्रही जुटते थे. अंग्रेजों ने अनेक गांवों के सैकड़ों घर जलाए. एक सौ सोलह बार गोलियां चलाई गईं जिनमें 140 नागरिकों की जानें गईं. सरकारी कर्मचारी सुबह होते ही किरोसिन लेकर गांव को फूंकने के लिए निकल पड़ते थे.

गांवों पर सामूहिक जुर्माना लगाया गया. चित्तू पांडेय भूमिगत हो गए थे. बलिया देश के उन थोड़े से स्थानों में था जहां अंग्रेजों ने सर्वाधिक जुल्म ढाये.

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बलिया स्पेशल

बलिया विधानसभा सर्वे 2027

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बलिया BJP की इनसाइड स्टोरी! संगठन में पद की लड़ाई अश्लील वीडियो तक आई?

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बलिया। बांसडीह में भाजपा से जुड़ी महिला कार्यकर्ता के निजी वीडियो के कथित प्रसार को लेकर दर्ज मुकदमे ने अब संगठन के भीतर चल रही कथित खींचतान की चर्चाओं को भी हवा दे दी है। सवाल उठ रहा है कि क्या संगठन में पद और प्रभाव की लड़ाई का विवाद इतना बढ़ गया कि मामला निजी वीडियो तक जा पहुंचा? सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे प्रकरण के पीछे संगठन में पद पाने की कथित होड़ और आपसी राजनीतिक खींचतान का एंगल भी सामने आ रहा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस जांच में ही वास्तविक तस्वीर साफ होगी।

क्या है पूरा मामला?: बांसडीह थाना क्षेत्र में भाजपा से जुड़ी एक महिला कार्यकर्ता ने पुलिस में शिकायत देकर आरोप लगाया कि उसका निजी वीडियो उसकी अनुमति के बिना प्रसारित किया जा रहा है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की है।

मामले में नामजद आरोपियों में भाजपा से जुड़े पदाधिकारियों के नाम होने की बात सामने आई है। महिला ने अपनी शिकायत में बताया है कि वीडियो कॉल के दौरान उसका निजी वीडियो बनाए जाने और बाद में उसके प्रसारित होने की जानकारी उसे बातचीत के दौरान मिली। शिकायतकर्ता ने पुलिस को संबंधित बातचीत के ऑडियो-वीडियो साक्ष्य उपलब्ध होने की बात भी कही है।

पद की कथित लड़ाई से जुड़ा दूसरा एंगल : सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे मामले की एक दूसरी तस्वीर भी सामने आ रही है। सूत्रों का दावा है कि संगठन में पद और जिम्मेदारी को लेकर कुछ लोगों के बीच कथित तौर पर अंदरूनी खींचतान चल रही थी। इसी खींचतान के बीच विवाद ने ऐसा रूप लिया कि कुछ लोगों ने कथित तौर पर एक-दूसरे को निशाने पर लेने और फंसाने के लिए मामले का फायदा उठाया।

सूत्रों का यह भी कहना है कि संगठनात्मक पद को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा के बीच व्यक्तिगत विवाद भी जुड़ता चला गया और आखिरकार मामला पुलिस तक पहुंच गया। हालांकि, यह दावा फिलहाल सूत्रों के हवाले से है। पुलिस जांच में इसकी पुष्टि होना बाकी है कि कथित संगठनात्मक खींचतान का इस मामले से वास्तव में कोई सीधा संबंध है या नहीं।

जिले से लेकर लखनऊ तक मामला पहुंचाने की होड़?: इस पूरे प्रकरण को लेकर सूत्र एक और महत्वपूर्ण दावा कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जिले से जुड़े भाजपा के कुछ प्रभावशाली नेता कथित तौर पर मामले को दबाने की कोशिश में जुटे हैं, जबकि दूसरी ओर कुछ नेता इस प्रकरण को लखनऊ तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

यानी एक तरफ मामले को स्थानीय स्तर पर संभालने और शांत कराने की कोशिश की चर्चा है, तो दूसरी तरफ इसे पार्टी के उच्च स्तर तक ले जाने की कवायद की बात सामने आ रही है। सूत्रों का दावा है कि इसके पीछे भी संगठन में पद और प्रभाव को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान एक वजह हो सकती है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज: मामले में भाजपा से जुड़े पदाधिकारियों के नाम सामने आने के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। पुलिस की जांच, डिजिटल साक्ष्य और शिकायतकर्ता की ओर से उपलब्ध कराए गए कथित वीडियो एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

फिलहाल बांसडीह पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि यह मामला केवल निजी वीडियो के कथित प्रसार का है या इसके पीछे संगठनात्मक पद की कथित लड़ाई, आपसी विवाद और राजनीतिक खींचतान की भी कोई भूमिका रही है।

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उत्तर प्रदेश

बलिया का बढ़ा मान! जमुना राम मेमोरियल स्कूल सीबीएसई ईस्ट जोन हैंडबॉल के फाइनल में

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मिर्जापुर। सनबीम एकेडमी नॉलेज पार्क, मिर्जापुर में आयोजित सीबीएसई ईस्ट जोन हैंडबॉल प्रतियोगिता 2026-27 में जमुना राम मेमोरियल स्कूल, चितबड़ागांव (बलिया) की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में प्रवेश कर लिया।

प्रतियोगिता के दूसरे दिन खेले गए रोमांचक मुकाबले में जमुना राम मेमोरियल स्कूल ने मेजबान सनबीम एकेडमी नॉलेज पार्क को 06-02 के बड़े अंतर से हराया। मैच की शुरुआत से ही जमुना राम मेमोरियल स्कूल की टीम ने आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया और पूरे मुकाबले में अपनी पकड़ बनाए रखी।

टीम की ओर से अंकिता कुशवाहा ने 2, रितिका यादव ने 2, आइशा गुप्ता ने 1 और श्रेया ने 1 गोल कर टीम की जीत में अहम योगदान दिया। इस शानदार जीत के साथ टीम ने प्रतियोगिता के खिताबी मुकाबले में अपनी जगह पक्की कर ली है। फाइनल मुकाबला कल खेला जाएगा।

टीम की सफलता पर विद्यालय के प्रबंध निदेशक इंजीनियर तुषारनंद एवं प्रधानाचार्य अजीत सिंह ने खिलाड़ियों और खेल स्टाफ को बधाई दी। उन्होंने शारीरिक शिक्षक सरदार मोहम्मद अफ़ज़ल, टीम प्रशिक्षक मनोज कुमार और टीम मैनेजर रश्मि श्रीवास्तव को भी शुभकामनाएं देते हुए फाइनल के लिए उत्साह बढ़ाया।

इस अवसर पर इंचार्ज अरविंद चौबे, आनन्द मिश्रा, नीतू मिश्रा सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन की सराहना करते हुए उन्हें फाइनल के लिए शुभकामनाएं दीं।

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