बलिया स्पेशल
ख़ब’र का असर: अफसर को गा’ली देने वाले विधा’यक पर मु’क’दमा दर्ज
बलिया– भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह के विरुद्ध बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता को फोन पर कथित तौर पर अपशब्द कहने तथा धमकी देने के मामले में नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस ने सोमवार को बताया कि अधीक्षण अभियंता राम किशोर की शिकायत पर भाजपा के बैरिया क्षेत्र के विधायक सुरेंद्र सिंह के विरुद्ध कोतवाली में नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस ने बताया कि मामले की छानबीन की जा रही है.
अपने विवादित बयानों को लेकर हमेशा सुर्खियों में बने रहने वाले भाजपा के बैरिया क्षेत्र के विधायक सुरेंद्र सिंह का पिछले दिनों एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें भाजपा विधायक बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता राम किशोर पर एक अवर अभियंता के स्थानांतरण के लिये दबाव बना रहे हैं. वह राम किशोर को अपशब्द कह रहे हैं और धमका भी रहे हैं.
पुलिस उप महानिरीक्षक मनोज तिवारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस मामले की छानबीन कर रही है. छानबीन में मिले तथ्यों के आधार पर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी. इससे पहले भी ये विधायक अपने कड़वे बोल की वजह से कई बार सुर्खियों में आए हैं.
अनाप शनाप बयानबाजी के चलते पहले भी ये ऐसी मुश्किलों का सामना कर चुके हैं. कुछ महीने पहले ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर अभद्र टिप्पणी करते हुए उन्होंने उनकी तुलना सपना चौधरी से की थी. साथ ही कहा था कि दोनों (सोनिया गांधी- सपना चौधरी) एक ही पेशे से आते हैं, ऐसे में राहुल गांधी की चाहिए कि वो भी अपने पिता की तरह सपना को भी अपना बना लें.
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बलिया BJP की इनसाइड स्टोरी! संगठन में पद की लड़ाई अश्लील वीडियो तक आई?
बलिया। बांसडीह में भाजपा से जुड़ी महिला कार्यकर्ता के निजी वीडियो के कथित प्रसार को लेकर दर्ज मुकदमे ने अब संगठन के भीतर चल रही कथित खींचतान की चर्चाओं को भी हवा दे दी है। सवाल उठ रहा है कि क्या संगठन में पद और प्रभाव की लड़ाई का विवाद इतना बढ़ गया कि मामला निजी वीडियो तक जा पहुंचा? सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे प्रकरण के पीछे संगठन में पद पाने की कथित होड़ और आपसी राजनीतिक खींचतान का एंगल भी सामने आ रहा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस जांच में ही वास्तविक तस्वीर साफ होगी।
क्या है पूरा मामला?: बांसडीह थाना क्षेत्र में भाजपा से जुड़ी एक महिला कार्यकर्ता ने पुलिस में शिकायत देकर आरोप लगाया कि उसका निजी वीडियो उसकी अनुमति के बिना प्रसारित किया जा रहा है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की है।
मामले में नामजद आरोपियों में भाजपा से जुड़े पदाधिकारियों के नाम होने की बात सामने आई है। महिला ने अपनी शिकायत में बताया है कि वीडियो कॉल के दौरान उसका निजी वीडियो बनाए जाने और बाद में उसके प्रसारित होने की जानकारी उसे बातचीत के दौरान मिली। शिकायतकर्ता ने पुलिस को संबंधित बातचीत के ऑडियो-वीडियो साक्ष्य उपलब्ध होने की बात भी कही है।
पद की कथित लड़ाई से जुड़ा दूसरा एंगल : सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे मामले की एक दूसरी तस्वीर भी सामने आ रही है। सूत्रों का दावा है कि संगठन में पद और जिम्मेदारी को लेकर कुछ लोगों के बीच कथित तौर पर अंदरूनी खींचतान चल रही थी। इसी खींचतान के बीच विवाद ने ऐसा रूप लिया कि कुछ लोगों ने कथित तौर पर एक-दूसरे को निशाने पर लेने और फंसाने के लिए मामले का फायदा उठाया।
सूत्रों का यह भी कहना है कि संगठनात्मक पद को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा के बीच व्यक्तिगत विवाद भी जुड़ता चला गया और आखिरकार मामला पुलिस तक पहुंच गया। हालांकि, यह दावा फिलहाल सूत्रों के हवाले से है। पुलिस जांच में इसकी पुष्टि होना बाकी है कि कथित संगठनात्मक खींचतान का इस मामले से वास्तव में कोई सीधा संबंध है या नहीं।
जिले से लेकर लखनऊ तक मामला पहुंचाने की होड़?: इस पूरे प्रकरण को लेकर सूत्र एक और महत्वपूर्ण दावा कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जिले से जुड़े भाजपा के कुछ प्रभावशाली नेता कथित तौर पर मामले को दबाने की कोशिश में जुटे हैं, जबकि दूसरी ओर कुछ नेता इस प्रकरण को लखनऊ तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
यानी एक तरफ मामले को स्थानीय स्तर पर संभालने और शांत कराने की कोशिश की चर्चा है, तो दूसरी तरफ इसे पार्टी के उच्च स्तर तक ले जाने की कवायद की बात सामने आ रही है। सूत्रों का दावा है कि इसके पीछे भी संगठन में पद और प्रभाव को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान एक वजह हो सकती है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज: मामले में भाजपा से जुड़े पदाधिकारियों के नाम सामने आने के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। पुलिस की जांच, डिजिटल साक्ष्य और शिकायतकर्ता की ओर से उपलब्ध कराए गए कथित वीडियो एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
फिलहाल बांसडीह पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि यह मामला केवल निजी वीडियो के कथित प्रसार का है या इसके पीछे संगठनात्मक पद की कथित लड़ाई, आपसी विवाद और राजनीतिक खींचतान की भी कोई भूमिका रही है।


