अयोध्या मामले में केस अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 14 मार्च की अगली तारीख दी है. गुरुवार को इस मामले की सुनवाई में भले ही कुछ खास न हुआ हो, लेकिन कोर्ट ने साफ कर दिया है कि सिर्फ कानून के तहत ही जमीन विवाद पर सुनवाई की जाएगी.
अयोध्या के विवादास्पद ढांचे से जुड़े केस को फिर से नई तारीख जरूर मिली है, लेकिन देश की सर्वोच्च अदालत में इसकी सुनवाई और फैसले में ज्यादा का अंतर नहीं दिख रहा है और आज कोर्ट ने 8 अहम फैसले सुनाए जिसकी फैसले पर अहम भूमिका रहेगी.
कोर्ट के 8 अहम फैसले
-चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई में 3 जजों की स्पेशल बेंच मामले की सुनवाई कर रही है. बेंच में जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर भी शामिल हैं. कोर्ट ने साफ कर दिया कि सिर्फ कानून के तहत जमीन विवाद पर सुनवाई की जाएगी और इसमें भावनात्मक और राजनीतिक दलीलें नहीं सुनी जाएंगी.
-14 मार्च को मामले की पहली दलील सुनी जाएगी और सबसे पहले मुख्य पक्षकारों को सुना जाएगी. इसके बाद दूसरे लोगों की बारी आएगी.
-सुनवाई के दौरान अब कोई भी याचिका स्वीकार नहीं की जाएगी.
-अन्य दस्तावेजों की तरह रामायण और गीता का भी अनुवाद कोर्ट में जमा कराने का निर्देश दिया.
-सभी पक्षकारों से हाईकोर्ट रिकॉर्ड में शामिल सभी वीडियो को दस्वावेज में शामिल करने को कहा. इसके अलावा कोर्ट ने अपने धार्मिक ग्रंथों की अनुवादित कॉपी को भी जमा करवाने का निर्देश दिया.
-2 हफ्ते के भीतर अयोध्या विवाद से संबंधित दस्तावेज और वीडियो जमा कराए जाने का निर्देश.
-कोर्ट ने साफ किया कि मामल से जुड़े जिन लोगों की मौत हो चुकी है उनका नाम हटाया जाएगा.
-विवादित भूमि पर अस्पताल बनाने की श्याम बेनेगल की याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस विवाद में अब कोई नया पक्ष नहीं जुड़ेगा.
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