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बलिया स्पेशल

बलिया लोकसभा – क्या चंद्रशेखर के गढ़ में बीजेपी फिर से लहरा पाएगी भगवा?

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उत्तर प्रदेश के संसदीय सफर में बलिया लोकसभा का अपना अहम योगदान है. इस धरती ने कई महान हस्तियों से देश को नवाजा है. मंगल पांडे, चित्तू पांडे, जय प्रकाश नारायण और हजारी प्रसाद द्विवेदी समेत कई विभूतियों के अलावा एक प्रधानमंत्री (चंद्रशेखर) भी देश को दिया. प्रदेश के 80 संसदीय क्षेत्रों में शामिल बलिया (72वीं संख्या) आजाद हिंदुस्तान में शुरुआत से ही लोकसभा क्षेत्र के रूप में शामिल रहा है. यह क्षेत्र पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की कर्मभूमि के नाम से जानी जाती है. यहां का राजनीतिक इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है. यह शहर गंगा और सरयू नदी के किनारे बसा है.आजादी के बाद पहले यह गाजीपुर जिले का एक हिस्सा था, लेकिन बाद में स्वतंत्र रूप से जिला हो गया. इसे राजा बलि की धरती के रूप में माना जाता है और इस कारण इस क्षेत्र का नाम बलिया पड़ा.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

बलिया के संसदीय इतिहास की बात की जाए तो यह सीट पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की सीट के लिए जानी जाती है. चंद्रशेखर ने 1977 में बलिया से जीतकर पहली बार लोकसभा पहुंचे थे. इसके बाद 1980 के चुनाव में भी जीत हासिल की. लेकिन 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव में चंद्रशेखर जगन्नाथ चौधरी के हाथों चुनाव हार गए. हालांकि इसके बाद वह यहां से लगातार 6 बार चुनाव जीते और उन्होंने 4 बार जगन्नाथ चौधरी (1980, 1989, 1991 और 1996) को हराया. चंद्रशेखर 10 नवंबर, 1990 में देश के नौंवे प्रधानमंत्री बने, लेकिन गठबंधन की यह सरकार महज 7 महीने ही चली और 21 जून 1991 को यह सरकार गिर गई.

8 बार यहां से सांसद रहे चंद्रशेखर का निधन जुलाई, 2007 में हो जाने से उपचुनाव कराया गया जिसमें उनके बेटे नीरज शेखर ने जीत हासिल की.  2009 के लोकसभा चुनाव में भी नीरज को जीत मिली. लेकिन 2014 के चुनाव में नीरज को भरत सिंह ने हरा दिया. बलिया संसदीय सीट से बीजेपी को पहली जीत 2014 में मिली. बलिया 1952 में गाजीपुर के साथ संयुक्त संसदीय क्षेत्र के रूप में शामिल था और राम नगीना सिंह यहां से पहले सांसद बने.

सामाजिक तानाबाना

बलिया जिले की आबादी 32.4 लाख है जो उत्तर प्रदेश का 29वां सबसे ज्यादा आबादी वाला जिला है. क्षेत्रफल के लिहाज से यूपी का 31वां जिला है. 32.4 लाख की आबादी में पुरुषों की संख्या 52 फीसदी (16.7 लाख) और महिलाओं की संख्या 15.7 लाख (48%) है. कुल आबादी में 81 फीसदी आबादी सामान्य वर्ग की है, जबकि 15% आबादी अनुसूचित जाति और 3% आबादी अनुसूचित जनजाति की है.

धर्म पर आधारित आबादी के आधार पर देखा जाए तो 92.79% लोग हिंदू हैं जबकि यहां पर 6.61 फीसदी मुस्लिम समाज के लोग रहते हैं. इसके अलावा ईसाइयों की करीब 4 हजार आबादी भी बलिया में निवास करती है. 2011 की जनगणना के मुताबिक 1000 पुरुषों पर 937 महिलाएं हैं. सामान्य वर्ग में यह औसत 940 है तो अनुसूचित जनजातियों की आबादी 938 है. यहां की साक्षरता दर 71 फीसदी (81 फीसदी पुरुष और 60 फीसदी महिलाएं) है.

बलिया संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत 5 विधानसभा (फेफना, बलिया नगर, बैरिया, जहूराबाद और मोहम्मदाबाद) क्षेत्र आते हैं और यह सभी पांचों सीट सामान्य वर्ग के लिए है. इन विधानसभा सीट की बात की जाए तो फेफना विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उपेंद्र तिवारी विधायक हैं और उन्होंने पिछले चुनाव में बहुजन समाज पार्टी की अंबिका चौधरी को 17,897 मतों के अंतर से हराया था. उपेंद्र तिवारी ने 2012 के विधानसभा चुनाव में भी जीत हासिल की थी.

बलिया नगर विधानसभा सीट से भी भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है. बीजेपी के आनंद स्वरूप शुक्ला ने एकतरफा मुकाबले में पिछले चुनाव में समाजवादी पार्टी के लक्ष्मण को 40,011 मतों से हराया था. बैरिया विधानसभा सीट पर भी बीजेपी का ही कब्जा है. 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सुरेंद्र नाथ सिंह ने समाजवादी पार्टी के जयप्रकाश अंचल को 17,077 मतों के अंतर से हराया था. 2012 के चुनाव में सपा के लिए अंचल ने जीत हासिल की थी.

जहूराबाद विधानसभा क्षेत्र से सुखदेव भारतीय समाज पार्टी के ओम प्रकाश राजभर विधायक हैं और उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के कालीचरण को 18,081 मतों से हराया था. मोहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी की अलका राय विधायक हैं जिन्होंने बसपा के सिबकतुल्लाह अंसारी को 32,727 मतों के अंतर से हराया था. बलिया के पांचों विधानसभा सीट पर बीजेपी (4) और उसके साझीदार सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (1) का कब्जा है.

2014 का जनादेश

2014 में बलिया में हुए लोकसभा चुनाव में 17,68,271 इलेक्टर्स थे जिसमें 53.29 फीसदी (9,42,211) मतदाताओं ने 1,757 पोलिंग बूथ में जाकर वोटिंग में हिस्सा लिया था. 15 प्रत्याशियों के बीच हुए इस चुनाव में बीजेपी के भरत सिंह ने 38.18 फीसदी (3,59,758) वोट हासिल किया और उन्होंने अपने करीबी प्रतिद्वंद्वी सपा के नीरज शेखर के  1,39,434 मतों के अंतर से हराया था.

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर को चुनाव में 2,20,324 मत (23.38%) हासिल हुए. बसपा के उम्मीदवार वीरेंद्र चौथे स्थान पर रहे.

 

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बलिया विधानसभा सर्वे 2027

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2027 का विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहा है और बलिया नगर सीट पर सियासी हलचल तेज़ है। विधायक दयाशंकर सिंह के कामकाज को आप कैसे आंकते हैं? क्या उन्हें फिर से मौका मिलना चाहिए, और 2027 में आप किस पार्टी और किस चेहरे को विधायक के रूप में देखना चाहते हैं? बलिया ख़बर के इस सर्वे में अपनी राय दर्ज करें।

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बलिया BJP की इनसाइड स्टोरी! संगठन में पद की लड़ाई अश्लील वीडियो तक आई?

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बलिया। बांसडीह में भाजपा से जुड़ी महिला कार्यकर्ता के निजी वीडियो के कथित प्रसार को लेकर दर्ज मुकदमे ने अब संगठन के भीतर चल रही कथित खींचतान की चर्चाओं को भी हवा दे दी है। सवाल उठ रहा है कि क्या संगठन में पद और प्रभाव की लड़ाई का विवाद इतना बढ़ गया कि मामला निजी वीडियो तक जा पहुंचा? सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे प्रकरण के पीछे संगठन में पद पाने की कथित होड़ और आपसी राजनीतिक खींचतान का एंगल भी सामने आ रहा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस जांच में ही वास्तविक तस्वीर साफ होगी।

क्या है पूरा मामला?: बांसडीह थाना क्षेत्र में भाजपा से जुड़ी एक महिला कार्यकर्ता ने पुलिस में शिकायत देकर आरोप लगाया कि उसका निजी वीडियो उसकी अनुमति के बिना प्रसारित किया जा रहा है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की है।

मामले में नामजद आरोपियों में भाजपा से जुड़े पदाधिकारियों के नाम होने की बात सामने आई है। महिला ने अपनी शिकायत में बताया है कि वीडियो कॉल के दौरान उसका निजी वीडियो बनाए जाने और बाद में उसके प्रसारित होने की जानकारी उसे बातचीत के दौरान मिली। शिकायतकर्ता ने पुलिस को संबंधित बातचीत के ऑडियो-वीडियो साक्ष्य उपलब्ध होने की बात भी कही है।

पद की कथित लड़ाई से जुड़ा दूसरा एंगल : सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे मामले की एक दूसरी तस्वीर भी सामने आ रही है। सूत्रों का दावा है कि संगठन में पद और जिम्मेदारी को लेकर कुछ लोगों के बीच कथित तौर पर अंदरूनी खींचतान चल रही थी। इसी खींचतान के बीच विवाद ने ऐसा रूप लिया कि कुछ लोगों ने कथित तौर पर एक-दूसरे को निशाने पर लेने और फंसाने के लिए मामले का फायदा उठाया।

सूत्रों का यह भी कहना है कि संगठनात्मक पद को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा के बीच व्यक्तिगत विवाद भी जुड़ता चला गया और आखिरकार मामला पुलिस तक पहुंच गया। हालांकि, यह दावा फिलहाल सूत्रों के हवाले से है। पुलिस जांच में इसकी पुष्टि होना बाकी है कि कथित संगठनात्मक खींचतान का इस मामले से वास्तव में कोई सीधा संबंध है या नहीं।

जिले से लेकर लखनऊ तक मामला पहुंचाने की होड़?: इस पूरे प्रकरण को लेकर सूत्र एक और महत्वपूर्ण दावा कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जिले से जुड़े भाजपा के कुछ प्रभावशाली नेता कथित तौर पर मामले को दबाने की कोशिश में जुटे हैं, जबकि दूसरी ओर कुछ नेता इस प्रकरण को लखनऊ तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

यानी एक तरफ मामले को स्थानीय स्तर पर संभालने और शांत कराने की कोशिश की चर्चा है, तो दूसरी तरफ इसे पार्टी के उच्च स्तर तक ले जाने की कवायद की बात सामने आ रही है। सूत्रों का दावा है कि इसके पीछे भी संगठन में पद और प्रभाव को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान एक वजह हो सकती है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज: मामले में भाजपा से जुड़े पदाधिकारियों के नाम सामने आने के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। पुलिस की जांच, डिजिटल साक्ष्य और शिकायतकर्ता की ओर से उपलब्ध कराए गए कथित वीडियो एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

फिलहाल बांसडीह पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि यह मामला केवल निजी वीडियो के कथित प्रसार का है या इसके पीछे संगठनात्मक पद की कथित लड़ाई, आपसी विवाद और राजनीतिक खींचतान की भी कोई भूमिका रही है।

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उत्तर प्रदेश

बलिया का बढ़ा मान! जमुना राम मेमोरियल स्कूल सीबीएसई ईस्ट जोन हैंडबॉल के फाइनल में

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मिर्जापुर। सनबीम एकेडमी नॉलेज पार्क, मिर्जापुर में आयोजित सीबीएसई ईस्ट जोन हैंडबॉल प्रतियोगिता 2026-27 में जमुना राम मेमोरियल स्कूल, चितबड़ागांव (बलिया) की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में प्रवेश कर लिया।

प्रतियोगिता के दूसरे दिन खेले गए रोमांचक मुकाबले में जमुना राम मेमोरियल स्कूल ने मेजबान सनबीम एकेडमी नॉलेज पार्क को 06-02 के बड़े अंतर से हराया। मैच की शुरुआत से ही जमुना राम मेमोरियल स्कूल की टीम ने आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया और पूरे मुकाबले में अपनी पकड़ बनाए रखी।

टीम की ओर से अंकिता कुशवाहा ने 2, रितिका यादव ने 2, आइशा गुप्ता ने 1 और श्रेया ने 1 गोल कर टीम की जीत में अहम योगदान दिया। इस शानदार जीत के साथ टीम ने प्रतियोगिता के खिताबी मुकाबले में अपनी जगह पक्की कर ली है। फाइनल मुकाबला कल खेला जाएगा।

टीम की सफलता पर विद्यालय के प्रबंध निदेशक इंजीनियर तुषारनंद एवं प्रधानाचार्य अजीत सिंह ने खिलाड़ियों और खेल स्टाफ को बधाई दी। उन्होंने शारीरिक शिक्षक सरदार मोहम्मद अफ़ज़ल, टीम प्रशिक्षक मनोज कुमार और टीम मैनेजर रश्मि श्रीवास्तव को भी शुभकामनाएं देते हुए फाइनल के लिए उत्साह बढ़ाया।

इस अवसर पर इंचार्ज अरविंद चौबे, आनन्द मिश्रा, नीतू मिश्रा सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन की सराहना करते हुए उन्हें फाइनल के लिए शुभकामनाएं दीं।

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