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शादी के एक महीने बाद ईशा अंबानी ने पति को लेकर किए कई बड़े खुलासे, जानकर हैरान….
दोस्तों आप सभी जानते है की भारत सबसे बड़े उधोगपतियो में सबसे पहला नाम किसका आता है, जी है हम बात कर रहे है भारत के सबसे बड़े उधोगपति मुकेश अम्बानी के बारे है हाल में ही उन्होंने अपनी बेटी ईशा अम्बानी की शादी की है जो लोग अभी भीं याद कर रहे है ऐसी ग्रैंड शादी अभी तक देखने को नहीं मिली है , इस शादी में बड़े बड़े सेलेब्रिटी और दिग्गज नेता सभी मौजूद थे , हर तरफ इसी शादी की चर्चा रही है शादी को एक महीना बीत चूका है ,मशहूर उधोगपति मुकेश अम्बानी की बेटी की शादी आनंद पीरामल के साथ हुई .

शादी के सभी कारिक्रम उदयपुर में बहुत ही ग्रैंड और शाही तौर तरीके से पुरे किये गए थे, वही 12 दिसंबर को ईशा ने आनंद से अंबानी हाउस एंटिलिया में सात फेरे लिये, शादी के एक महीने बाद ईशा अंबानी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में शिरकत की जिस दौरान ईशा ने पित के बारे में कई खुलासे किये जी हां इस दौरान अपनी शादी के बारे में बात करते हुए ईशा ने कहा-” मुझे अपनी शादी में बहुत मज़ा आया, लेकिन आनंद को इन चीज़ों में ख़ास रूचि नहीं है. वे मुझसे ज़्यादा आध्यात्मिक हैं लेकिन हम दोनों में कुछ समानताएं भी हैं।,हम दोनों को ही अपने परिवार से प्यार है और हम दोनों फूडी है.

ईशा कहती है -मेरे पिता ने शादी के समय एक स्पीच दी थी और आनंद को पसंद करने के 10 कारण बताए थे, वे कारण बहुत मज़ेदार थे और मेरे डैड ने अंत में कहा था कि यही 10 चीज़ें उनके अंदर भी है,वे बिल्कुल सही थे,आनंद कई मामलों में मेरे पिता जैसे ही हैं.पति के बारे में बात करते हुए ईशा यही नहीं रुकी उन्होनें कहा- कि आनंद ग्रेट लाइफ पार्टनर कैसे हैं? ईशा ने कहा-मुझे उनका सेंस ऑफ ह्यूमर और स्पीरिचुएलिटी बहुत पसंद है.

ईशा ने बताया कि शादी के बाद भी उनका वर्कलाइफ बैलेंस बदला नहीं है, ” ईशा के अनुसार,”इस समय काम हम दोनों की पहली प्राथमिकता है,अच्छी बात यह है कि हमारे पैरेंट्स इस बात को समझते हैं. मेरे मायके और ससुराल का वर्क एथिक एक जैसा है, हमारे परिवार के हर एक सदस्य को काम की उपयोगिता मालूम है.

अपनी शादी के बारे में बात करते हुए ईशा ने कहा-” शादी बहुत अच्छे से संपन्न हो गई, हर दुल्हन की तरह मेरे मन में भी थोड़ा डर था, लेकिन घर पर शादी करना बहुत स्पेशल अनुभव रहा|मेरे अपने जीवन के सबसे ख़ूबसूरत लम्हों को उन लोगों के साथ बांटा, जिन्हें मैं सबसे ज़्यादा प्यार करती हूं, ”शादी के बाद ईशा और आनंद लगातार अपनी तस्वीरोंं को लेकर चर्चा में है.

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जमुना राम मेमोरियल स्कूल में कक्षा 12वीं का भव्य विदाई समारोह, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच छात्रों को मिली नई उड़ान की प्रेरणा
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जमुना राम महाविद्यालय पहुचें बलिया एसपी ने छात्राओं को दी सुरक्षा की जानकारी
बलिया। जमुना राम स्नातकोत्तर महाविद्यालय, चितबड़ागांव में बुधवार 15 अक्टूबर को मिशन शक्ति पंचम चरण के तहत नारी सुरक्षा, नारी सम्मान व नारी स्वावलंबन विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक डॉ. ओमवीर सिंह रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। संस्थापक प्रबंधक प्रो. धर्मात्मा नंद, प्रबंध निदेशक ई. तुषार नंद और प्राचार्य डॉ. अंगद प्रसाद गुप्त ने मुख्य अतिथि का अंगवस्त्र और बुके देकर स्वागत किया।
एसपी डॉ. ओमवीर सिंह ने छात्राओं को आत्मरक्षा, साइबर सुरक्षा, सड़क सुरक्षा और हेल्पलाइन नंबर 112, 108, 1098, 181, 102, 1090, 1930 और 1076 की जानकारी दी तथा उन्हें अपने जीवन में आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. अंगद प्रसाद गुप्त ने की तथा संचालन श्री बृजेश गुप्ता ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।
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माता-पिता की बीमारी से मौत, डीएम पहुंचे बच्चे!
बलिया। नगर के रामपुर महावल निवासी दो मासूम भाई-बहन ऋषभ सिंह (6) और रितिका सिंह (5) सोमवार को अपने नाना राधेश्याम खरवार के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और मदद की गुहार लगाई। दोनों बच्चों ने बताया कि उनके माता-पिता की मौत बीमारी से हो चुकी है और अब उनके रिश्तेदारों ने घर और आभूषणों पर कब्जा कर लिया है।
नाना राधेश्याम खरवार, जो पनिचा गांव के निवासी हैं, ने जिलाधिकारी से फरियाद करते हुए कहा कि उनकी बेटी सपना की दो वर्ष पूर्व बीमारी से मौत हो गई थी। इसके बाद दामाद रोशन सिंह को पड़ोसियों ने इतना प्रताड़ित किया कि वह भी एक वर्ष पहले बीमारी के चलते चल बसे।
राधेश्याम ने बताया कि उनकी बेटी और दामाद के आभूषण बच्चों की बड़ी मां और बड़े पिता ने अपने पास रख लिए हैं और घर में ताला लगा दिया है। उन्होंने इस संबंध में जिले के कई अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने जिलाधिकारी से अनुरोध किया कि मुख्यमंत्री बाल संरक्षण योजना और बाल सेवायोजन योजना के तहत बच्चों को सहायता दी जाए, ताकि उनका पालन-पोषण और शिक्षा सुचारु रूप से हो सके।





