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बलिया में महावीरी झंडा जुलूस को लेकर ज़िलाधिकारी ने की बैठक, दिया ये निर्देश !

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बलिया: महावीरी झंडा जुलूस को सकुशल संपन्न कराने को लेकर जिला स्तरीय शांति समिति की बैठक रविवार को जिलाधिकारी रवींद्र कुमार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में हुई। इसमें एक-एक कर सभी अखाड़ेदारों से बातचीत कर उनकी समस्याएँ सुनी और पूरी ज़िम्मेदारी के साथ समाधान कराने के निर्देश संबंधित अधिकारी को दिये। साथ ही अखाड़ेदारों को सुरक्षा व अन्य व्यवस्था के दृष्टिगत जरूरी सतर्कता बरतने के लिए कहा। ज़िलाधिकारी ने सड़क पर गड्ढे, लटके तार व अन्य समस्याओं को देख उसे तत्काल दूर कर लेने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिया। बीडीओ बांसडीह व ज़िला क्रीड़ाधिकारी के अनुपस्थित रहने पर वेतन रोकते का आदेश देते हुए स्पष्टीकरण तलब किया।

जिलाधिकारी ने कहा कि जुलूस का आयोजन पहले से चल रही अपनी परंपरा के अनुसार, हर्षोल्लास व शांतिपूर्ण ढंग से ही होना चाहिए। कोई ऐसा कार्य न किया जाए, जिससे किसी की पवित्र भावना को ठेस पहुँचे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि क़ानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ हुआ तो कड़ी कार्रवाई होगी। इसलिए सभी अखाड़ेदार अपनी जुलूस में वालंटियर को इसके प्रति सजग कर दें। सभी अखाड़ेदार इस बात का भी ख्याल रखें कि सभी जुलूस निर्धारित रूट से ही जाए, उनके सभी वालंटियर शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए मुस्तैद रहें। सभी अखाड़ेदारों को अपने मार्ग की पूरी जानकारी हो।

जुलूस के लिए पहले से निर्धारित समय का विशेष ख्याल रखें। निर्धारित समय से जुलूस शुरू हो जाए, और समय से पहुँच भी जाएँ। नगरपालिका के ईओ को निर्देश दिया कि सभी रास्तों पर साफ-सफाई व समुचित प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित कराएंगे। अगर जुलूस के रास्ते मे कहीं कोई अतिक्रमण हो तो उसको भी हटवा दिया जाए। निर्देश दिया कि पानी के टैंकर में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था हो। विद्युत विभाग के एक्सईएन को निर्देश दिया कि किसी भी हालत में बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए। आवश्यकता पड़े तो जुलूस के रास्ते में जेनरेटर से भी बिजली सप्लाई की व्यवस्था रखें। अखाड़ेदारों से यह भी अपील किया कि डीजे का साउंड निर्धारित मात्रा से अधिक कत्तई न हो।

एसपी एस. आनंद ने कहा कि यह ऐतिहासिक जुलूस है। इसका उद्देश्य पवित्र रही है, इसकी अपनी गरिमा है। उसी गरिमा के अनुरूप शांतिपूर्ण ढंग से ही यह त्योहार मनाया जाए। अखाड़ेदारों को वालंटियर की सूची देने को कहा, ताकि उनका परिचय पत्र बन सके। विशेष रूप से हिदायत दी कि जुलूस में अगर कोई भी ग़ैरक़ानूनी हरकत देखने को मिली तो कठोर कार्रवाई पुलिस की ओर से होगी। बैठक में सीडीओ प्रवीण वर्मा, एडीएम डीपी सिंह, एएसपी दुर्गाशंकर तिवारी, सभी एसडीएम, सीओ, बीडीओ, थानाध्यक्ष व शिवकुमार कौशिकेय, अफ़सर आलम, असग़र अली के अलावा शांति समिति के सदस्य मौजूद थे।

कुल 25 जगहों पर निकलेगा जुलूस

30/31 अगस्त को ज़िले के 25 जगहों पर महावीरी झंडा जुलूस निकलेगा। सबसे ज़्यादा 10 जुलूस बलिया शहर में निकलेगी। इसके लिए जुलूसवार मजिस्ट्रेट तैनात कर दिया गया है। ज़िलाधिकारी ने सभी अखाड़ेदार व उनके यहाँ तैनात मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि आपस के समन्वय बनाकर जुलूस को सकुशल संपन्न कराएँ। मजिस्ट्रेट भी जाकर अपनी जुलूस के रास्तों को देख लें। कहीं भी दिक़्क़त समझ में आये तो संबंधित अधिकारी से बात कर उसे दूर कराएँ।

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Photos- जमुना राम मेमोरियल स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न

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26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने अनुशासित मार्च-पास्ट के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर धर्मात्मानंद जी ने ध्वजारोहण किया। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में निहित प्रावधानों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर सेना से सेवानिवृत्त महानुभूतियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया। हरियाणवी नृत्य, “मां से ही माटी” थीम पर आधारित प्रस्तुति, “पधारो मारे देश”, कव्वाली, उत्तर-पूर्व भारत का प्रसिद्ध बिहू नृत्य तथा योग प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। गरबा और भांगड़ा नृत्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “वराह रूपम” नृत्य एवं कथकली प्रस्तुति रही, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संस्था के निदेशक तुषार नंद जी एवं सौम्या प्रसाद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों एवं समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण से ही भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना साकार हो सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारीगण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की सफलता में कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा एवं अरविंद चौबे की विशेष सहभागिता रही।

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UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र

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बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।

भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।

शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।

उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।

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