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बलियाः विवाह कर लौटे प्रेमी युगल का ग्रामीणों ने किया विरोध, अब गांव के बाहर रहेंगे दंपति
बलिया में शादी करके वापस लौटे प्रेमी युगल के गांव पहुंचते ही हंगामे की स्थिति बन गई। गांव में दोनों का विरोध हो रहा है। मामला थाने तक पहुंच गया है। लड़की पक्ष के लोग दोनों का विरोध कर रहे हैं जबकि लड़के के परिजन दोनों के समर्थन में है। इसे लेकर ही विवाद पैदा हो गया।
बता दें कि बांसडीहरोड थाना क्षेत्र के गांव में दो साल पहले एक प्रेमी युगल फरार हो गया था, जिसने बाहर शादी की और अब लौटकर वापस गांव आ गए हैं। लड़की पक्ष के लोगों का आरोप है कि जब से दोनों गांव में आए हैं, उनका घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। गांव के लोग उन पर फब्तियां कस रहे हैं। वहीं युवक के परिजनों का कहना है कि उन्होंने शादी कर ली है। कानून के हिसाब से वह पति-पत्नी हैं। अब वह रहने के लिए कहां जाएंगे।
इसी बात को लेकर दोनों पक्ष आमने सामने हैं। प्रेमी जोड़ा साथ रहना चाहता हैं। ऐसे में गांव वालों की आपसी सहमति से तय हुआ कि गांव की समाजिक समरसता को देखते हुए दोनों कहीं अन्यत्र रहेंगे। वहीं भविष्य में स्थिति सामान्य होने और उनके संबंध को स्वीकृति मिलने के बाद आगे का फैसला किए जाएगा।
थानाध्यक्ष बांसडीहरोड आरके सिंह ने बताया कि दोनों पक्षों में आम सहमति से विवाद का हल किया गया है। फैसले के अनुसार प्रेमी जोड़े के गांव से अन्यत्र रहने खाने आदि की व्यवस्था का जिम्मा प्रेमी के पिता द्वारा लिया गया है, इसे लेकर दोनों पक्षों में आम सहमति बन गई है।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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