बलिया
मातृभूमि योजना से बदलेगी बलिया के गांवों की तस्वीर, समझिए 60-40 फार्मूला
बलिया जिले के मूल निवासी देश और दुनिया के लगभग हर कोने में मौजूद हैं। लंबे समय से बलिया के लोग अपना भविष्य बनाने के लिए देश के दूसरे शहरों से लेकर विदेशों तक जाते रहे हैं। उत्तर प्रदेश शासन की ओर से मातृभूमि योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत एनआरआई, ग्रामीण और किसी दूसरे जिले में रहने वाले लोग अपने गांव के विकास में योगदान दे सकेंगे।
शासन की इस योजना के तहत बलिया से बाहर रह रहने वाले लोग जिले के अपने गांव में स्कूल, अस्पताल, सामुदायिक भवन, पुस्तकालय, यात्री शेड जैसे निर्माण करा सकते हैं। इस योजना के माध्यम से बलिया के नौ सौ चालीस गांवों की रूपरेखा बदलने की उम्मीद की जा रही है। अपने मूल गांव के विकास में योगदान देने योग्य क्षमतावान लोग इस योजना में सरकार के साथ मिलकर गांव की तस्वीर बदल सकते हैं।
खबरों के मुताबिक उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने गत शनिवार रात इसे लेकर शासनादेश जारी किया था। इस योजना को उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना का नाम दिया गया है। बता दें कि इस योजना के तहत किसी भी प्रकार के कार्य के लिए चालीस फीसदी राशि सरकार देगी और साठ फीसदी राशि गांव का विकास कराने वाले व्यक्ति को देनी होगी।
उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना के अंतर्गत किसी गांव में शिक्षा के लिए स्कूल, इंटर कॉलेज की कक्षाएं या स्मार्ट क्लास बनवाए जा सकते हैं। गांव में सामुदायिक भवन, बारातशाला, स्किल सेंटर का निर्माण कराया जा सकता है। पुस्तकालय और ऑडिटोरियम बनावाया जा सकता है। अंत्येष्टि स्थल का निर्माण भी करा सकते हैं। गांव के किसी तालाब का सौंदर्यीकरण, ड्रेनेज व्यवस्था, जल संरक्षण, बस स्टैंड और यात्री शेड का काम भी कराया जा सकता है। पशु सुधार नस्ल केंद्र और फायर सर्विस स्टेशन की स्थापना कराई जा सकती है। दुग्ध संग्रह केंद्र से लेकर समितियों का विकास भी किया जा सकता है।
गांव के इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने के लिए ये योजना लाई गई है। जो काम खुद राज्य सरकार को करनी चाहिए उसे मातृभूमि की भावना से जोड़कर लोगों के योगदान से किए जाने का प्रयास किया जा रहा है। बलिया में नौ सौ चालीस गांव हैं। आने वाले दिनों में देखना होगा कि उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना के तहत इनमें से कितने गांवों की तस्वीर बदलती है?
बलिया
शिक्षा पदम सम्मान 2025 से सम्मानित हुए हाली पाथ कॉन्वेंट स्कूल के युवा निदेशक डॉ. परवेज अंसारी
हिमाचल प्रदेश के प्रतिष्ठित हिलटॉप पब्लिक स्कूल में आयोजित भव्य सम्मान समारोह में हाली पाथ कॉन्वेंट स्कूल के युवा निदेशक डॉ. परवेज अंसारी को “शिक्षा पदम सम्मान 2025” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में उनके 10 वर्षों से अधिक की समर्पित सेवा और अभिनव प्रयासों के लिए प्रदान किया गया।
डॉ. अंसारी की नेतृत्व क्षमता और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता ने स्कूल को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। उनके मार्गदर्शन में हाली पाथ कॉन्वेंट स्कूल ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया है।
सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. परवेज अंसारी ने कहा —
“यह सम्मान मेरे लिए प्रेरणा का स्रोत है। मैं शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नवाचार और सुधार के लिए प्रयासरत रहूँगा।”
उनकी इस उपलब्धि से न केवल स्कूल परिवार बल्कि पूरे जनपद में गर्व की भावना व्याप्त है।
फेफना
दिखाया जज़्बा: जमुना राम मेमोरियल स्कूल के कराटे वीरों ने जीते 22 पदक, बलिया में बजाया अपना डंका
बलिया के बापू भवन में आयोजित 2nd Gyanti Devi Memorial Cup District Karate Championship 2K25 में जिले के लगभग 15 विद्यालयों ने भाग लिया। इस प्रतियोगिता में जमुना राम मेमोरियल स्कूल, मानपुर चितबड़ागांव के 22 छात्रों ने प्रतिभाग कर दमखम दिखाया।
शानदार प्रदर्शन करते हुए स्कूल के 12 छात्रों ने स्वर्ण पदक , 6 ने रजत पदक और 4 ने कांस्य पदक हासिल किए। छात्रों की इस उपलब्धि ने न केवल विद्यालय का नाम रोशन किया बल्कि माता-पिता और क्षेत्र को भी गौरवान्वित किया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य अबरी के.बी. एवं प्रबंध निदेशक तुषार नंद जी ने विजेताओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और शारीरिक स्फूर्ति को बढ़ावा देती हैं।
विद्यालय प्रबंधन ने यह भी आश्वस्त किया कि भविष्य में भी छात्र ऐसे आयोजनों में भाग लेकर और बेहतर प्रदर्शन करेंगे।
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बलिया की राजनीति में हलचल: भानु दुबे जल्द कर सकते हैं सपा जॉइन, अटकलों का बाजार गर्म
बलिया।
बलिया के प्रमुख सामाजिक नेता भानु दुबे जल्द ही समाजवादी पार्टी (सपा) जॉइन कर सकते हैं। हाल ही में उनके सोशल मीडिया पोस्ट और गतिविधियों से इस बात के कयास तेज हो गए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से भानु दुबे लगातार सपा के बड़े नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। उनकी इन मुलाकातों और नेताओं के काफिलों में देखे जाने के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि वे जल्द ही सपा का दामन थाम सकते हैं।
भानु दुबे को ब्राह्मण समाज का बड़ा चेहरा माना जाता है। सामाजिक स्तर पर उनकी लोकप्रियता भी युवाओं में काफी मजबूत है। अगर वे सपा में शामिल होते हैं तो न केवल बलिया में पार्टी को मजबूती मिलेगी, बल्कि आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में बलिया सदर सीट से उनकी दावेदारी भी बेहद मजबूत मानी जा रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भानु दुबे के सपा में आने से बलिया की राजनीति में नया समीकरण बन सकता है। और यह फैसला पूरे जिले के राजनीतिक परिदृश्य को बदल सकता है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि भानु दुबे कब और किस मंच से सपा की सदस्यता ग्रहण करते हैं और इसके बाद जिले की राजनीति कौन सा नया मोड़ लेती है।
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