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देश में 100 करोड़ कोरोना खुराक का रिकॉर्ड, पिछड़ कर भी अव्वल रहा बलिया !
बलिया। कोरोना के खिलाफ जंग में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश में गुरुवार को 100 करोड़ लोगों को कोरोनारोधी वैक्सीन देने का लक्ष्य भी पूरा हुआ। महामारी के खिलाफ जंग में इसे एक बड़ी उपलब्धि के रूप में माना जा रहा है। यह भी उम्मीद जाहिर की जा रही है कि इतने बड़े पैमाने पर टीका लगाने के बाद भारत ने संभावित तीसरी लहर को भी आने से रोक दिया है। देश में 100 करोड़ लोगों के वैक्सीनेशन में बलिया का योगदान 17 लाख तीन हजार का है। इनमें 13 लाख 83 हजार को पहला और 3 लाख 19 हजार को दोनों डोज दिए जा चुके हैं।
बलिया जिले की आबादी करीब 36 लाख 51 हजार के सापेक्ष टीका का आंकड़ा अभी 50 प्रतिशत भी नहीं हुआ है लेकिन बाढ़ और बारिश से प्रभावित जिले में स्वास्थ्य विभाग इस आंकड़े को संतोषजनक मान रहा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार शुरूआत में शासन की ओर से जिले में प्रतिदिन 7 हजार टीका लगाने का लक्ष्य मिला था, जो बाद में बढ़कर 29 हजार तक हो चुका है। दशहरा मेला के चलते टीका लगाने की रफ्तार थोड़ी रूकी थी, जिसे पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने इस सप्ताह प्रतिदिन 58 हजार डोज टीका लगाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि कभी सिरिंज की कमी तो कभी वैक्सीन आने में देरी से टीका लगाने की रफ्तार थम जा रही थी। इसके चलते लक्ष्य के सापेक्ष टीकाकरण कम हुआ है।
वैक्सीनेशन की रफ्तार बढ़ाने की कोशिश- कोविड टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिला अस्पताल सहित सभी सीएचसी, पीएचसी पर टीकाकरण टीम बनायी गयी है। जिसमें कुल 92 चिकित्सकों के साथ एएनएम, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को लगाया गया है। टीकाकरण टीम विभिन्न गांवों में कैंप लगाकर लोगों का टीकाकरण कर रही है।
वैक्सीनेशन में बाढ़ और बारिश का खलल- टीकाकरण की रफ्तार धीमा करने में अतिवृष्टि और बाढ़ भी बाधक बनी है। स्थिति यह है कि जिले की दो तिहाई आबादी बाढ़ से प्रभावित हो गयी थी, जबकि शेष आबादी भारी बारिश से जल जमाव का दंश झेल रही है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से बाढ़ क्षेत्रों में प्रमुखता से कैंप लगाकर टीकाकरण किया गया था। बावजूद अब तक 50 प्रतिशत भी टीका नहीं लगाया जा सका है।
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Photos- जमुना राम मेमोरियल स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न
26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने अनुशासित मार्च-पास्ट के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर धर्मात्मानंद जी ने ध्वजारोहण किया। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में निहित प्रावधानों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर सेना से सेवानिवृत्त महानुभूतियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया। हरियाणवी नृत्य, “मां से ही माटी” थीम पर आधारित प्रस्तुति, “पधारो मारे देश”, कव्वाली, उत्तर-पूर्व भारत का प्रसिद्ध बिहू नृत्य तथा योग प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। गरबा और भांगड़ा नृत्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “वराह रूपम” नृत्य एवं कथकली प्रस्तुति रही, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संस्था के निदेशक तुषार नंद जी एवं सौम्या प्रसाद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों एवं समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण से ही भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना साकार हो सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारीगण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की सफलता में कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा एवं अरविंद चौबे की विशेष सहभागिता रही।
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UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र
बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।
भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।
शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।


