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मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल ने अपने साढ़े 4 साल के कार्यकाल की गिनाईं उपलब्धियां, क्षेत्र में किए विकासकार्यों की दी जानकारी
बलिया। उत्तरप्रदेश में योगी सरकार ने अपने कार्यकाल के साढ़े 4 साल पूरे कर लिए हैं। जहां एक ओर सीएम योगी आदित्यनाथ ने साढ़े 4 साल के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड पेश किया है, तो वहीं दूसरी ओर विधायक भी अपने क्षेत्र में किए विकासकार्यों की जानकारी दे रहे हैं। और उपलब्धि गिना रहे हैं। इसी कड़ी में बलिया की नगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक और मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाईं। और साढ़े 4 साल में क्षेत्र में किए विकासकार्यों की जानकारी दी। डाक बंगले पर आयोजित पत्रकार वार्ता में संसदीय कार्य राज्य मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल ने विकासकार्यों की जानकारी दी।
स्वास्थ्य और बिजली सुविधा दी- स्वास्थ्य के क्षेत्र में जिला चिकित्सालय में डायलिसिस यूनिट के साथ डिजिटल एक्स-रे, सिटी स्कैन, वेंटीलेटर आदि की व्यवस्था कराई गई है। आक्सीजन प्लांट का संचालन हो रहा है, इससे वार्डों में बेडों तक आक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बसंतपुर में भी प्लांट की स्थापना की जा रही है। उन्होंने कहा कि बिजली से वंचित कई गांवों को प्रकाशमान किया गया है। 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति की जा रही है। 100 से अधिक ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई गई है। हनुमानगंज में 33/11 केवी का नया उपकेंद्र स्थापित करने के साथ पुरास गांव में भी प्रस्ताव तैयार है।
सीवरेज घोटाले पर लाएंगे श्वेतपत्र- प्रेस कॉन्फ्रेस के दौरान मंत्री ने सीवरेज घोटाले पर श्वेतपत्र लाने की बात कही। उन्होंने कहा कि सीवरेज सिस्टम के नाम पर पिछली सरकार में बहुत बड़ा खेल किया गया है। इसका पूरा चिट्ठा तैयार किया जा रहा है। जल्द ही इसको लेकर श्वेतपत्र जारी किया जाएगा। इसमें शामिल दोषियों पर कार्रवाई तय है।
ददरी मेला के लिए खरीदी जाएगी स्थायी जमीन- शहर से सटे क्षेत्र में ऐतिहासिक ददरी मेला स्थल के सिकुड़ते जाने के सवाल पर मंत्री ने कहा कि शासन ने इसे राजकीय मेला का दर्जा दिया है। इसके लिए स्थायी जमीन की तलाश की जा रही है। शासन के पास प्रस्ताव भेजकर खरीद की स्वीकृति मांगी जाएंगे। ताकि संस्कृति को संजों कर रखा जा सके।
जाम की समस्या खत्म करने की कोशिश- शहर में जाम की समस्या के निदान को लेकर कोशिश की जा रही है। मंत्री ने कहा कि शहर के भीतर से वाहन स्टैंड बाहर करा दिए गए हैं। इससे काफी हद तक जाम की समस्या खत्म हुई है। पार्किंग नहीं होने से समस्या है। इसके लिए जगह चिह्नित की जाएगी। जगह चिन्हित होने के बाद जल्द ही पार्किंग भी बना दी जाएगी। ताकि वाहन यहां वहां खड़े न हो, जान की समस्या खत्म हो सके। विकासकार्यों करने के लिए हम लगातार प्रयासरत हैं।
उत्तरप्रदेश में साल 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं। और सीएम योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल को खत्म होने से 6 महीने ही बाकी हैं। ऐसे में सरकार मतदाताओं के बीच जाकर अपने कार्यकाल की उपलब्धि गिना रही हैं। विधायक भी अपने-अपने क्षेत्र में मतदाताओं को विकासकार्यों के बारे में बता रहे हैं। ताकि जनता के बार फिर उनपर भरोसा जता सके। हालांकि आने वाले विधानसभा चुनाव में जनता ही फैसला करेगी कि उसे किस पर भरोसा जताना है। और किस पार्टी ने जनता के हित में काम किया।
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Photos- जमुना राम मेमोरियल स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न
26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने अनुशासित मार्च-पास्ट के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर धर्मात्मानंद जी ने ध्वजारोहण किया। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में निहित प्रावधानों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर सेना से सेवानिवृत्त महानुभूतियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया। हरियाणवी नृत्य, “मां से ही माटी” थीम पर आधारित प्रस्तुति, “पधारो मारे देश”, कव्वाली, उत्तर-पूर्व भारत का प्रसिद्ध बिहू नृत्य तथा योग प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। गरबा और भांगड़ा नृत्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “वराह रूपम” नृत्य एवं कथकली प्रस्तुति रही, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संस्था के निदेशक तुषार नंद जी एवं सौम्या प्रसाद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों एवं समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण से ही भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना साकार हो सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारीगण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की सफलता में कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा एवं अरविंद चौबे की विशेष सहभागिता रही।
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UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र
बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।
भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।
शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।
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