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तुर्की चुनाव- तैय्यप अर्दोआन जनता के चहेते या तानाशाह?

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तुर्की एक साथ हो रहे राष्ट्रपति और संसदीय चुनावों में मतदान के बाद वोटों की गिनती जारी है.

राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन दूसरे कार्यकाल के लिए मैदान में हैं. अर्दोआन ने ये चुनाव समय से पहले करवाए हैं.

यदि अर्दोआन जीते तो उनके हाथों में नई शक्तियां होंगी. आलोचकों का कहना है कि इससे तुर्की में लोकतंत्र कमज़ोर होगा.

लेकिन अर्दोआन को मध्यपंथी रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी (सीएचपी) के मुहर्रम इंचे से कड़ी प्रतिद्वंदिता मिल रही है.

ये चुनाव नवंबर 2019 में होने थे, लेकिन अर्दोआन ने अचानक समय से पहले चुनाव कराने की घोषणा कर दी थी.

अपना वोट डालने के बाद अर्दोआन ने पत्रकारों से कहा, “इन चुनावों में तुर्की एक लोकतांत्रिक क्रांति से गुज़र रहा है.”

इसी बीच सीरिया से लगने वाले उर्फ़ा प्रांत में चुनाव पर्यवेक्षकों को डराए जाने और मतदान में धांधली की रिपोर्टें आई हैं.

तुर्की के चुनाव आयोग का कहना है कि वो इन रिपोर्टों की जांच कर रहा है.

अर्दोआन और उनके मुख्य प्रतिद्वंदी मुहर्रम इंचे ने शनिवार को बड़ी रैलियां की थीं. दोनों ही नेताओं ने एक दूसरे को तुर्की पर शासन करने के लिए अनुपयुक्त बताया था.

इंचे का कहना है कि अर्दोआन के शासन में तुर्की तानाशाही की ओर बढ़ रहा है. उनके तेज़ चुनाव प्रचार ने तुर्की के विपक्ष में नई जान डाल दी है.

शनिवार को इंस्ताबुल में क़रीब दस लाख लोगों की रैली को संबोधित करते हुए इंचे ने कहा, “अगर अर्दोआन जीत गए तो आपके फ़ोन टैप किए जाएंगे, ख़ौफ़ का शासन होगा.”

उन्होंने कहा कि अगर मैं जीता तो तुर्की में अदालतें स्वतंत्र होंगी.

इंचे ने चुनाव जीतने की स्थिति में 48 घंटों के भीतर आपातकाल समाप्त करने का वादा किया है.

तुर्की में जुलाई 2016 में तख़्तापलट के नाकाम प्रयास के बाद से ही आपातकाल लगा है. आपातकाल के दौरान सरकार को संसद की मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं होती है.

वहीं अपनी चुनावी रैली में अर्दोआन ने अपने समर्थकों से पूछा, “क्या कल हम उन्हें उस्मानी थप्पड़ जड़ने वाले हैं.”

उस्मानी थप्पड़ तुर्की में इस्तेमाल किया जाने वाला एक मुहावरा है जिसका मतलब होता है कि एक ही थप्पड़ में विरोधी को चित कर देना.

अर्दोआन 2014 में तुर्की का राष्ट्रपति बनने से पहले 11 साल तक तुर्की के प्रधानमंत्री थे.

उन्होंने पूर्व शिक्षक और 16 सालों से सांसद मुहर्रम इंचे पर अनुभवहीन होने के आरोप लगाते हुए कहा, “भौतिकी का शिक्षक होना अलग बात है और देश चलाना बिल्कुल अलग बात. राष्ट्रपति होने के लिए अनुभव भी होना चाहिए.”

बीबीसी के  संवाददाता मार्क लोवेन के मुताबिक रणनीतिक रूप से बेहद अहम देश तुर्की हाल के सालों में राजनीतिक रूप से कभी इतना विभाजित नहीं रहा है और न ही कभी अर्दोआन को चुनावों में इतने कड़े मुक़ाबले का सामना करना पड़ा है.

आधुनिक तुर्की के संस्थापक कमाल अतातुर्क के बाद से अर्दोआन तुर्की के सबसे ताक़तवर नेता हैं. यदि वो ये चुनाव जीत जाते हैं तो वो और ताक़तवर हो जाएंगे. प्रधानमंत्री का पद समाप्त हो जाएगा और संसद राष्ट्रपति के सामने और कमज़ोर हो जाएगी.

लेकिन यदि राष्ट्रपति चुनावों में अर्दोआन 50 फ़ीसदी मत नहीं पा सके तो उन्हें संभवत मुहर्रम इंचे से दोबारा सीधे मुक़ाबला करना होगा. मध्यमार्गी इंचे ने विपक्ष में नई जान फूंक दी है.

वहीं संसदीय चुनावों में एकजुट विपक्ष को उम्मीद है कि वो राष्ट्रपति अर्दोआन की पार्टी को बहुमत से दूर रख पाएगा. तुर्की में एक वर्ग राष्ट्रपति अर्दोआन का अंध भक्त है वहीं दूसरा वर्ग कड़ा आलोचक. विभाजित देश में आज राष्ट्रपति अर्दोआन पर सबसे बड़े फ़ैसले का दिन है जिसका सटीक अनुमान लगा पाना बेहद मुश्किल है.

तुर्की के लोग राष्ट्रपति चुनने के अलावा देश के सांसद चुनने के लिए भी मतदान किया है. इन चुनावों में क़रीब छह करोड़ तुर्क नागरिक वोट डालने के हक़दार हैं.

राष्ट्रपति पद के लिए छह उम्मीदवार मैदान में हैं. यदि किसी भी एक उम्मीदवार को आधे से ज़्यादा वोट मिल गए तो वो सीधा राष्ट्रपति बन जाएगा. यदि किसी को पचास फ़ीसदी मत नहीं मिले तो सबसे ज़्यादा मत पाने वाले दो उम्मीदवारों के बीच फिर से सीधा मुक़ाबला होगा.

राष्ट्रपति अर्दोआन को उम्मीद है कि वो निर्णायक जीत हासिल कर लेंगे. लेकिन अगर बात दूसरे मुक़ाबले तक पहुंची तो उनकी जीत का अंतर कम होने या उनके हारने की भी संभावना बन जाएगी.

वहीं 600 सदस्यों की संसद में राष्ट्रपति अर्दोआन की सत्ताधारी एकेपी को बहुमत बनाए रखने के लिए कड़ा मुक़ाबला करना पड़ रहा है.

संसदीय चुनावों में सत्ताधारी गठबंधन का मुक़ाबला एकजुट विपक्ष से है.

संसदीय चुनावों में कुर्द समर्थक पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (एचडीपी) की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है. यदि संसद में दाख़िल होने के लिए ज़रूरी दस प्रतिशत मत एचडीपी हासिल कर लेती है तो अर्दोआन की एकेपी पार्टी को अपना वर्चस्व बनाए रखने में मुश्किल होगी.

एचडीपी के अध्यक्ष और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सेलाहत्तीन देमिरतास को इस समय आतंकवाद के आरोपों में उच्च सुरक्षा की जेल में रखा गया है. वो इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं.

साभार- बीबीसी हिंदी

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भारत–ब्रिटेन नौसेनाओं का संयुक्त अभ्यास ‘कॉनकन’ शुरू, चार दिनों तक चलेगा समुद्री शक्ति प्रदर्शन

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ब्रिटेन के ‘कैरियर स्ट्राइक ग्रुप’ (CSG) ने भारतीय नौसेना के साथ मिलकर पश्चिमी हिंद महासागर में द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास ‘कॉनकन’ की शुरुआत की है। यह अभ्यास 5 अक्टूबर से शुरू हुआ है, जिसकी अगुवाई ब्रिटिश विमानवाहक पोत HMS Prince of Wales कर रहा है।

‘कॉनकन’ अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं की संयुक्त समुद्री और वायु क्षमता को बढ़ाना है। यह पहला मौका है जब भारत और ब्रिटेन के दोनों कैरियर स्ट्राइक ग्रुप—ब्रिटिश ‘HMS Prince of Wales’ और भारतीय INS विक्रांत—एक साथ समुद्री अभ्यास कर रहे हैं। यह अभ्यास चार दिनों तक चलेगा, जिसमें पनडुब्बियों और विभिन्न विमानों की भी भागीदारी होगी।

ब्रिटेन का कैरियर स्ट्राइक ग्रुप वर्तमान में ‘ऑपरेशन हाईमास्ट’ के तहत आठ महीने की वैश्विक तैनाती पर है। अभ्यास समाप्त होने के बाद ब्रिटिश नौसेना के जहाज मुंबई और गोवा के बंदरगाहों का दौरा करेंगे। इस दौरान ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल भारत के साथ रक्षा संबंधों के साथ-साथ व्यापार और सांस्कृतिक साझेदारी को भी रेखांकित करेगा।

ब्रिटिश उच्चायुक्त लिंडी कैमरन ने कहा, “यूके और भारत एक मुक्त और खुले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के पक्षधर हैं। हमारी दोनों नौसेनाओं के बीच यह सहयोग हमारे साझा विज़न 2035 के रक्षा साझेदारी के संकल्प को मज़बूती देता है।”

ब्रिटिश नौसेना के रक्षा सलाहकार कॉमोडोर क्रिस सॉन्डर्स ने कहा, “भारत और ब्रिटेन दोनों कैरियर संचालन करने वाले देश हैं। यह अभ्यास हमारे बीच जटिल बहु-क्षेत्रीय अभियानों में प्रशिक्षण और अनुभव साझा करने का अनूठा अवसर है।”

यूके कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के कमांडर कॉमोडोर जेम्स ब्लैकमोर ने कहा, “भारतीय नौसेना के साथ फिर से काम करना शानदार है। यह साझेदारी हमारे सामूहिक समुद्री संचालन क्षमता को बढ़ाने में मदद करेगी।”

बंदरगाह दौरे के बाद, ब्रिटिश कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भारतीय वायुसेना के साथ हवाई रक्षा अभ्यास में भी हिस्सा लेगा, जिससे दोनों सेनाएं अपनी रणनीतियों और तकनीकों का आदान-प्रदान कर सकेंगी।

‘कॉनकन’ अभ्यास 2004 से द्विवार्षिक रूप से आयोजित किया जा रहा है और यह भारत-ब्रिटेन की बढ़ती सामरिक साझेदारी का एक प्रमुख उदाहरण है।

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उत्तर प्रदेश के युवाओं को UK में पढ़ाई का सुनहरा मौका!

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लखनऊ, 19 अगस्त। यूनाइटेड किंगडम (UK) सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच एक अहम समझौता (MoU) हुआ है जिसके तहत राज्य के छात्रों को प्रतिष्ठित Chevening Scholarship Programme का लाभ मिलेगा।

समझौते के अनुसार, उत्तर प्रदेश से हर साल 15 छात्रों को UK में एक साल की मास्टर डिग्री के लिए पूरी आर्थिक सहायता दी जाएगी।

यह MoU आज लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भारत में ब्रिटिश हाई कमिश्नर लिंडी कैमरन की मौजूदगी में हस्ताक्षरित हुआ।

Chevening स्कॉलरशिप का महत्व

  • भारत में Chevening कार्यक्रम दुनिया का सबसे बड़ा है।

  • 1983 से अब तक 3,900 से अधिक भारतीय स्कॉलर्स और फेलोज़ को इसका लाभ मिल चुका है।

  • इस कार्यक्रम का मकसद युवा प्रतिभाओं को विश्वस्तरीय शिक्षा और नेटवर्क उपलब्ध कराना है, ताकि वे भारत लौटकर समाज और देश के विकास में योगदान दें।

ब्रिटिश हाई कमिश्नर लिंडी कैमरन का बयान

उन्होंने कहा, “UK पढ़ाई के लिए एक बेहतरीन जगह है। उत्तर प्रदेश सरकार के साथ यह नई साझेदारी राज्य के और भी प्रतिभाशाली युवाओं को विश्वस्तरीय शिक्षा का अनुभव दिलाएगी। Chevening Alumni भारत और UK के बीच ‘Living Bridge’ की तरह काम करते हैं और दोनों देशों को वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने में जोड़ते हैं।”

UK-India Vision 2035 के तहत दौरा

हाई कमिश्नर लिंडी कैमरन इस समय एक दिवसीय दौरे पर लखनऊ में हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ शिक्षा, व्यापार और निवेश से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। हाल ही में जुलाई 2025 में UK और भारत के बीच Free Trade Agreement (FTA) पर हस्ताक्षर होने के बाद यह सहयोग और गहरा हुआ है।

अधिक जानकारी और आवेदन के लिए देखें: www.chevening.org/apply

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भारत-यूके ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर, ‘विज़न 2035’ और £5 बिलियन के निवेश सौदे हुए घोषित

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नई दिल्ली/लंदन, 24 जुलाई 2025

भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच आज एक ऐतिहासिक दिन रहा, जब दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने ‘इंडिया-UK विज़न 2035’ नीति पत्र को मंजूरी दी और व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) पर औपचारिक हस्ताक्षर किए।  यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक और रणनीतिक सहयोग को अगले दशक में नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

मुख्य घोषणाएं और समझौते:

भारत-यूके विज़न 2035:

भारत और यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्रियों द्वारा संयुक्त रूप से अनुमोदित ‘भारत–यूके विज़न 2035’ नीति पत्र दोनों देशों के दीर्घकालिक द्विपक्षीय सहयोग के लिए एक रणनीतिक खाका प्रस्तुत करता है। यह दस्तावेज़ आगामी दशक के लिए साझेदारी के प्रमुख क्षेत्रों को चिन्हित करता है और साझा लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए रूपरेखा निर्धारित करता है।

इस विज़न डॉक्यूमेंट में जिन प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है, उनमें ये प्रमुख बातें शामिल हैं

  • व्यापार और निवेश: मुक्त व्यापार, उद्यमिता और बाजारों तक पारस्परिक पहुंच को बढ़ावा देना।

  • शिक्षा और कौशल विकास: छात्रों, शोधकर्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाना और नई पीढ़ी के लिए ग्लोबल अवसर सृजित करना।

  • रक्षा और रणनीतिक साझेदारी: समुद्री सुरक्षा, रक्षा उत्पादन और खुफिया सहयोग के क्षेत्र में साझा पहल करना।

  • जलवायु परिवर्तन और सतत विकास: स्वच्छ ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकियों और जलवायु वित्त में संयुक्त परियोजनाएं चलाना।

  • तकनीक और नवाचार: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, क्वांटम टेक्नोलॉजी और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहन देना।

यह नीति दस्तावेज़ इस बात का प्रमाण है कि भारत और यूके दोनों ही अपने द्विपक्षीय संबंधों को केवल आर्थिक साझेदारी तक सीमित न रखते हुए, उन्हें वैश्विक स्थिरता और नवाचार की दिशा में एक रणनीतिक सहयोग के रूप में देख रहे हैं।

व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA):

बहुप्रतीक्षित Comprehensive Economic and Trade Agreement (CETA) पर आज औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत:

  • व्यापार पर लगने वाले शुल्कों में बड़ी कटौती होगी

  • दोनों देशों के लिए सेवाओं, वस्तुओं और डिजिटल व्यापार के रास्ते और आसान बनेंगे

  • निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और कानूनी संरक्षण में सुधार होगा

व्यापार समझौते का प्रभाव मूल्यांकन:

सरकार ने इस समझौते के संभावित प्रभावों को लेकर एक विशेष मूल्यांकन रिपोर्ट भी जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार:

  • यूके की अर्थव्यवस्था को प्रति वर्ष अरबों पाउंड का लाभ हो सकता है

  • भारत में रोजगार सृजन और तकनीकी ट्रांसफर में तेजी आएगी

 टेक्नोलॉजी सिक्योरिटी इनिशिएटिव की वर्षगांठ:

UK-India Technology Security Initiative की पहली वर्षगांठ पर दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर तकनीकी सहयोग को और मजबूत करने का संकल्प लिया। इसमें क्वांटम कंप्यूटिंग, 5G सुरक्षा, साइबर नीति और डेटा प्रोटेक्शन के क्षेत्रों में सहयोग शामिल है।

 प्रमुख निवेश और कॉर्पोरेट सौदे:

  • एयरबस और रोल्स-रॉयस ने भारतीय विमानन कंपनियों के साथ करीब £5 बिलियन (लगभग ₹53,000 करोड़) के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।

  • यह सौदे विमानों की आपूर्ति, इंजनों की मरम्मत और दीर्घकालिक तकनीकी साझेदारी से संबंधित हैं।

  • इसके अतिरिक्त कई अन्य व्यापार और निवेश समझौनों की सूची भी आज जारी की गई है।

संशोधित आधिकारिक बयान:

यूके के व्यापार और उद्योग सचिव जोनाथन रेनॉल्ड्स ने अपने बयान में कहा “भारत के साथ यह ऐतिहासिक व्यापार समझौता हमारे द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊँचाई देगा। इससे दोनों देशों को आर्थिक समृद्धि और तकनीकी सशक्तिकरण मिलेगा।”

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