featured
गांव के बच्चों की पढ़ाई न छूटे इसलिए 50 गांंवों में पुस्तकालय खोलेंगे IRS शशांक शेखर सिंह
यूपीएससी की परीक्षा में सफल होकर IRS बने शशांक शेखर सिंह बच्चों के लिए प्रेरणा तो हैं ही साथ ही वे बच्चों के सपनों को पंख देने के लिए हमेशा प्रयास करते रहते हैं। शशांक ने खुद पढ़ाई कर इतना बड़ा मुकाम हासिल किया लिहाजा अब वह बच्चों की पढ़ाई की जरुरतों को पूरा करने में मदद कर रहे हैं। इसी बीच डॉक्टर ब्रह्म प्रकाश सिंह मेमोरियल सोसाइटी द्वारा आयोजित दो दिवसीय व्याख्यानमाला के दूसरे दिन के प्रथम सत्र में बलिया के गोंहिया छपरा निवासी भारतीय आयकर सेवा के अधिकारी शशांक शेखर सिंह ने शिरकत की। सिविल सेवा में कार्यरत शशांक इस कार्यक्रम में बच्चों के गुरु बने और उन्होंने बच्चों को सफलता का गुरुमंत्र दिया। उन्होंने बच्चों को बलिया के ग्रामीण क्षेत्रों में पुस्तकालयों की बृहद सरंचना की कार्ययोजना के बारे में बताया।
कोरोनाकाल में जरुरतमंद बच्चों को उपलब्ध कराई पुस्तकें, अब 50 गांवों में पुस्तकालय खोलने का लक्ष्य- अधिकारी शशांक ने कोरोना काल में देश भर के जरूरतमंद विद्यार्थियों को पुस्तकें उपलब्ध कराई एवं बताया कि बलिया के किसी विद्यार्थी की जरूरत हो तो संपर्क कर सकते है। इतना ही नहीं उन्होंने बताया कि अगले साल 50 गांवों में पुस्तकालय खोलने का लक्ष्य है। आईआरएस शशांक ने बच्चों को कामयाबी का मंत्र बताते हुए कहा कि लक्ष्य के प्रति समर्पण ही सफलता की एकमात्र कुंजी है। वहीं दूसरे सत्र में भारत सरकार के कृषि मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार डॉ सत्येंद्र कुमार
सिंह ने लोगों को भारत सरकार की कृषि संबंधित योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया एवं बकरी पालन द्वारा आय बढ़ाने के उपाय की भी चर्चा की। साथ ही उन्होंने बलिया के लिए कृषि आधारित कार्यशाला के आयोजन में हर संभव सहयोग का भी आश्वासन दिया। इसके साथ ही अगले सत्र में बलिया के बिगहि निवासी मेजर पियूष मिश्रा ने युवाओं को भारतीय सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित किया एवं कहा कि अनवरत मेहनत ही सफलता की एक मात्र कुंजी है। बलिया निवासी मंदसौर में जिला न्यायाधीश, समीर मिश्रा ने न्यायिक क्षेत्र में कैरियर की संभावनाओं के बारे में विस्तार
से बताया। उन्होंने सोसाइटी को न्यायिक कार्यशाला का आयोजन करने का सुझाव दिया। अंतिम व्यख्यान के रूप में लॉ प्रेप ट्यूटोरियल के निदेशक सिद्धनाथ उपाध्याय ने देश में होने वाले कानून से सम्बंधित प्रवेश परीक्षाओं में बारे में विस्तार से जानकारी दी। समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रयागराज जोन के आईजी कवींद्र प्रताप सिंह एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तरप्रदेश समाज कल्याण विभाग के अधिकारी अजीत प्रताप सिंह उपस्थित रहे। के पी सिंह जी ने सोसाइटी एवं सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दी एवं यह विश्वास दिलाया कि समाज के ऐसे किसी भी कार्य में
उनका हमेशा योगदान रहेगा। विशिष्ट अतिथि अजित प्रताप सिंह जी ने बताया कि गाँव समाज की सेवा करने का अवसर मिलना बहुत महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के अंत मे सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ प्रेम प्रकाश सिंह जी ने सभी अतिथिगणों, वक्ताओं एवं सहयोगियों को धन्यवाद दिया एवं अगले वर्ष की कार्ययोजना प्रस्तुत की।
featured
Photos- जमुना राम मेमोरियल स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न
26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने अनुशासित मार्च-पास्ट के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर धर्मात्मानंद जी ने ध्वजारोहण किया। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में निहित प्रावधानों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर सेना से सेवानिवृत्त महानुभूतियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया। हरियाणवी नृत्य, “मां से ही माटी” थीम पर आधारित प्रस्तुति, “पधारो मारे देश”, कव्वाली, उत्तर-पूर्व भारत का प्रसिद्ध बिहू नृत्य तथा योग प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। गरबा और भांगड़ा नृत्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “वराह रूपम” नृत्य एवं कथकली प्रस्तुति रही, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संस्था के निदेशक तुषार नंद जी एवं सौम्या प्रसाद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों एवं समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण से ही भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना साकार हो सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारीगण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की सफलता में कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा एवं अरविंद चौबे की विशेष सहभागिता रही।
featured
UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र
बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।
भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।
शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।


