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बलिया के इन युवाओं ने रोशन किया नाम, अब आसमां में भरेंगे उड़ान

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बलिया। हैदराबाद के डुंडीगल में शनिवार को हुई पासिंग आउट परेड में बलिया के युवा भी फ्लाइंग अफसर बने हैं। रविवार का दिन बलिया के होनहार छात्रों के नाम रहा। जिले से 3 युवा  देश की रक्षा के लिए एयर फोर्स में फ्लाइंग अफसर बने हैं। इन युवाओं की सफलता देख कर माता-पिता अपने बच्चों को भी बड़ी नौकरियों में जाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। कंबाइंड ग्रेजुएशन परेड में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरके सिंह भदौरिया ने सभी को मेडल प्रदान किया और बतौर फ्लाइंग ऑफिसर देश की सेवा करने की शुभाकामना दी।

बिल्थरारोड के कुमार सचिन – तहसील के निवासी कुमार सचिन ने लगन के बूते खुले आसमान में लंबी उड़ान भरी है। शनिवार को बलिया के सचिन भी वायुसेना में फ्लाइंग आफिसर बने। कुमार सचिन की इस सफलता की खबर मिलते ही परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई। जबकि क्षेत्रवासियों ने भी सचिन को जनपद और देश का गौरव बताया। अपने चार भाईयों और एक बहन में तीसरे नंबर के 23 वर्षीय कुमार सचिन शुरु से ही पढ़ाई लिखाई में मेधावी रहे हैं।सचिन ने अपनी कड़ी मेहनत के बल पर एनडीए का करीब दो वर्ष का प्रशिक्षण पूरा कर लिया। कुमार सचिन के पिता व्यवसायी हैं। परिजन बेटे की कामयाबी पर नगर में मिठाई बांट रहे हैं। वहीं नगरपंचायत चेयरमैन दिनेश गुप्ता ने भी बिल्थरारोड के सपूत कुमार सचिन के फ्लांइग आफिसर बनने पर बधाई दी। युवा सचिन से सीख लेते हुए आगे बढ़कर कुछ बड़ा करने की प्रेरणा ले रहे हैं। नौजवानों में एक नई उम्मीद की किरण जगी है, जिससे वो और ज़्यादा पढ़ाई में मेहनत कर रहे हैं।

सुखपुरा की अनमोल सिंह- सुखपुरा क्षेत्र के खरहाटार गावं की रहने वाले रिटायर सुबेदार मेजर बलराम सिंह की बेटी अनमोल सिंह एयर फोर्स में फ्लाइंग आफिसर बनी है। उनकी इस कामयाबी पर क्षेत्र में खुशी का माहौल है। कड़ी मेहनत के बलबूते मंजिल को छूना नामुमकिन नहीं, इस बात को अनमोल ने सच कर दिखाया है। जांबाज बेटी अनमोल सिंह ने अपने घर, परिवार सहित जिले का गौरव बढ़ाया है. रिटायर सूबेदार मेजर बलराम सिंह के पिता स्वर्गीय श्रीपति सिंह एक साधारण किसान थे। फिलहाल बलराम सिंह अपने पूरे परिवार के साथ नागपुर महाराष्ट्र में रहते हैं।जिराबस्ती के अंकुर पांडेय को फाइटर जेट पायलट के रूप में कमीशन- जीराबस्ती गांव के अंकुर पांडेय ने भारतीय वायु सेना में फ्लाइंग ऑफिसर बने हैं। फ्लाइंग ऑफिसर अंकुर पांडे ने भारतीय वायु सेना में फाइटर जेट पायलट के रूप में कमीशन पाकर बलिया जिले को गौरवान्वित किया। फ्लाइंग ऑफिसर अंकुर पांडेय देवतानंद पांडेय के पुत्र हैं जोकि खुद भी भारतीय वायु सेना से सेवानिवृत्त हैं। भारतीय वायु सेना में एक लड़ाकू पायलट के रूप में कमीशन मिलने पर अंकुर के रिश्तेदार और क्षेत्र के लोग बधाई दे रहे हैं।

अंकुर पांडेय को 19 जून 2021 को भारतीय वायु सेना में कमीशन किया गया है। यहां तक का सफर तय करना अंकुर की पढ़ाई के प्रति लगन और जज़्बे को दिखाता है, जिससे उनको सफलता हासिल हुई है।अंकुर पांडेय ने अपनी स्कूली शिक्षा केन्द्रीय विद्यालय से की, जबकि इंजीनियरिंग स्ट्रीम में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद अंकुर कठोर तैयार करते हुए भारतीय वायु सेना के फ्लाइंग स्ट्रीम के लिए चयनित हो गए। यह पूरे जनपद के लिए गर्व का क्षण है।

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Photos- जमुना राम मेमोरियल स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न

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26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने अनुशासित मार्च-पास्ट के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर धर्मात्मानंद जी ने ध्वजारोहण किया। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में निहित प्रावधानों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर सेना से सेवानिवृत्त महानुभूतियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया। हरियाणवी नृत्य, “मां से ही माटी” थीम पर आधारित प्रस्तुति, “पधारो मारे देश”, कव्वाली, उत्तर-पूर्व भारत का प्रसिद्ध बिहू नृत्य तथा योग प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। गरबा और भांगड़ा नृत्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “वराह रूपम” नृत्य एवं कथकली प्रस्तुति रही, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संस्था के निदेशक तुषार नंद जी एवं सौम्या प्रसाद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों एवं समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण से ही भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना साकार हो सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारीगण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की सफलता में कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा एवं अरविंद चौबे की विशेष सहभागिता रही।

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UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र

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बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।

भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।

शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।

उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।

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