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पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे बनकर तैयार, जुलाई से दौड़ेगी गाड़ियां, बलिया के लिए बनेगा लिंक रोड़

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उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव होने में अब चंद महीने बचे हैं। योगी सरकार चुनाव को देखते हुए रुके हुए विकास कार्यों में तेजी ला रही है। इसी कड़ी में प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के निर्माण कार्य की समीक्षा करने के लिए शनिवार को आजमगढ़ पहुंचे। उन्होेने जिले में निर्माणाधीन पैकेज -6 का निरीक्षण किया और अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की। इस दौरान मंत्री सतीश महाना ने कहा कि पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का कार्य लगभग 95 प्रतिशत पूरा हो चुका है और जून तक पूरा कैरेज वे चालू हो जायेगा।

निरीक्षण करने के लिए सतीश महाना के साथ यूपी के अपर मुख्यसचिव गृह और यूपीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अवनीश अवस्थी, अपर मुख्य सचिव औद्योगिक विकास अरविंद कुमार के साथ किशुनदासपुर स्थित यूपीडा के कार्यालय पहुंचे थे। यहां उन्होंने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और बैठक के बाद एक्सप्रेस-वे का निरीक्षण किया।निरीक्षण के बाद मंत्री सतीश महाना ने बताया कि एक्सप्रेस-वे का कार्य समय से पहले पूरा हो जायेगा। एक्सप्रेस-वे का 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया है। उन्होने कहा कि कोविड के कारण जो कुछ काम नहीं हुए थे उनको भी 10 जुलाई

तक पूरा कर लिया जायेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एक्सप्रेस-वे पूर्वाचल के लोगों के लिए लाइफ लाइन साबित होगा। एक्सप्रेस-वे आर्थिक उत्थान, प्रगति के लिए यहां के लोगों के लिए वरदान साबित होगा। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर जहां से भी लोग चढ़ते व उतरते है। वहां के किनारो की जमीनों को चिन्हित कर लिया जाय, वहां उद्योग स्थापित किये जाएंगे। महाना ने आगे कहा कि जो लोग इस क्षेत्र में उद्योग लगाना चाहते थे उनको भी अब दूसरे प्रदेश की तरफ नहीं जाना पड़ेगा। गाजीपुर से बनारस और बलिया के लिए बनेगा लिंक रोड़
कनेक्टिविटी को लेकर पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पूर्वांचल के लिए बड़ा प्रोजेक्ट है। इसमें कुल 18 फ्लाईओवर, सात रेलवे ओवरब्रिज, सात लंबे पुल, 118 छोटे पुल, छह टोल प्लाजा, 271 अंडरपास और 503 पुलियों का निर्माण कार्य लगभग पूरा होने को है। गाजीपुर में एक लिंक रोड के माध्यम से वाराणसी और बलिया को भी एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जाएगा। इन जिलों से गुजरेगा एक्सप्रेस-वे पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे लखनऊ, बाराबंकी, अमेठी, अयोध्या, सुल्तानपुर, आंबेडकरनगर, आजमगढ़, मऊ तथा गाजीपुर जिले से होकर गुजरेगा।

पूर्वांचल एक्सप्रेस वे 165 किलोमीटर लंबे आगरा-ग्रेटर नोएडा यमुना एक्सप्रेस-वे (मायावती सरकार द्वारा बनवाया गया) और 302 किमी लंबे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे (अखिलेश सरकार में बनवाया गया) के माध्यम से दिल्ली को भी कनेक्ट करेगा। गौरतलब है कि अखिलेश यादव ने रिकॉर्ड समय 22 महीने में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे बनवाया था।बता दें कि यह एक्सप्रेस-वे ‘आगरा से लखनऊ एक्सप्रेस-वे’ और ‘यमुना एक्सप्रेसवे’ से भी जुड़ेगा, जो दिल्ली से सटे नोएडा तक जाता है।

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Photos- जमुना राम मेमोरियल स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न

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26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने अनुशासित मार्च-पास्ट के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर धर्मात्मानंद जी ने ध्वजारोहण किया। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में निहित प्रावधानों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर सेना से सेवानिवृत्त महानुभूतियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया। हरियाणवी नृत्य, “मां से ही माटी” थीम पर आधारित प्रस्तुति, “पधारो मारे देश”, कव्वाली, उत्तर-पूर्व भारत का प्रसिद्ध बिहू नृत्य तथा योग प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। गरबा और भांगड़ा नृत्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “वराह रूपम” नृत्य एवं कथकली प्रस्तुति रही, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संस्था के निदेशक तुषार नंद जी एवं सौम्या प्रसाद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों एवं समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण से ही भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना साकार हो सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारीगण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की सफलता में कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा एवं अरविंद चौबे की विशेष सहभागिता रही।

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UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र

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बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।

भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।

शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।

उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।

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