बलिया स्पेशल
कृषि बिल के विरोध में कई संगठनों का प्रदर्शन !
बलिया। संसद से पारित कृषि विधेयकों के ख़िलाफ़ आज किसान संगठन देशभर में चक्का जाम कर रहे हैं। सरकार ने इन विधेयकों को किसान हितैषी बताते हुए दावा किया है कि इनसे किसानों की आय बढ़ेगी और बाज़ार उनके उत्पादों के लिए खुलेगा।
लेकिन किसान संगठनों का कहना है कि ये विधेयक कृषि क्षेत्र को कार्पोरेट के हाथों में सौंपने की कोशिशों का हिस्सा हैं। इस को लेकर बलिया में भी कई संगठन, राजनैतिक पार्टियों ने प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौपा ।
सपा कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। आरोप लगाया कि नया कृषि कानून किसानों के लिए गाला घोंटू कानून है। नए कानून में कृषि उत्पाद का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित न होने के कारण किसान अपने कृषि उत्पाद को औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर होगा।
वहीं, गेहूं, धान और दलहन की फसलों को आवश्यक वस्तु अधिनियम से बाहर कर दिया गया है। जिलाध्यक्ष राजमंगल यादव ने कहा कि सपा पूरी तरह से देश के किसानों और मजदूरों के साथ खड़ी है। इस काले कानून का विरोध अंतिम समय तक किया जाएगा। इस अवसर पर पूर्व मंत्री नारद राय, पूर्व विधायक श्रीमती मंजू सिंह, समेत सैकड़ों कार्यकर्त्ता उपस्थित रहे।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष लल्लन प्रसाद गोंड के नेतृत्व में शुक्रवार को कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। तत्पश्चात राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा। प्रदेश उपाध्यक्ष लल्लन प्रसाद गोंड ने कहा कि किसान, मजदूर और नौजवान किसान विरोधी कानून के खिलाफ भारत बंद किए है।
हम भी इस आन्दोलन के साथ खड़े है। यह कानून भारत के हर नागरिक के खिलाफ है। कहा कि नई कृषि नीति-2020 किसान, मजदूर व गरीब विरोधी है। पूंजीपतियों के फायदे के लिए बनाए गए काले कानूनों को रद्द किया जाना चाहिए। यह केवल कारपोरेट्स के फायदे के लिए बनाये गये हैं।
भारत बंद के समर्थन में सामाजिक न्याय मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को ब्लाक मुख्यालय पर पहुंचकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन बीडीओ के प्रतिनिधि को सौंपा। मांग किया कि किसान विरोधी कृषि बिल वापस लिया जाए।
किसानों के हित में स्वामीनाथन समिति की सिफारिश को लागू किया जाए। मजदूर विरोधी श्रम संशोधन विधेयक वापस लिया जाए। कोरोनाबंदी के कारण बेरोजगार हुए मजदूरों को रोजगार की गारंटी ििदया जाय। अन्यथा प्रत्येक परिवार को 7500 रुपए गुजारा भत्ता दिया जाए।

भारत बंद के तहत अखिल भारतीय किसान सभा जिला इकाई के अध्यक्ष लक्ष्मण पांडेय के नेतृत्व में किसानों ने नारा लगाते हुए नगर भरमण किया तथा ब्लाक कार्यालय पर पहुंचकर एडीओ आईएसबी प्रमोद कुमार को पत्रक सौंपा। मांग किया कि किसान विरोधी बिल को वापस लिया जाए तथा अनाजों के लिए एक देश-एक मूल्य तय किया जाय।
समर्थन मूल्य से कम पर अनाज की खरीद गैर कानूनी तथा संज्ञेय अपराध घोषित किया जाय। पत्रक सौंपे जाने के पूर्व किसानों का जुलूस स्थानीय बस स्टैंड से निकलकर थाना मार्ग, बीज गोदाम मार्ग होते हुए बड़ी बाजार, सीएचसी होते हुए ब्लाक कार्यालय पहुंचा।
बलिया
अघोषित बिजली कटौती पर सपा युवजन सभा का हल्ला बोल, 9 सूत्रीय मांगों के साथ सौंपा ज्ञापन
भीषण गर्मी के बीच लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती और खराब विद्युत व्यवस्था को लेकर समाजवादी युवजन सभा ने विद्युत विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष अरविन्द गिरि के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने विद्युत वितरण खंड के अधिशासी अभियंता को 9 सूत्रीय मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र की समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की।
ज्ञापन में रघुनाथपुर, दुबहड़ और आईटीआई विद्युत उपकेंद्रों से जुड़े इलाकों में बार-बार हो रही बिजली कटौती पर रोक लगाने, जर्जर तारों को बदलने, कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने, फीडरों और लाइनों का नियमित रखरखाव कराने तथा उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई।
इस दौरान गड़वार क्षेत्र में 33 केवी लाइन पर पेड़ गिरने से बाधित बिजली आपूर्ति को बहाल कराने में व्यस्त अधिशासी अभियंता से दूरभाष पर वार्ता कर क्षेत्र की समस्याओं से अवगत कराया गया। उनकी अनुपस्थिति में विभाग द्वारा अधिकृत अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।
अरविन्द गिरि ने कहा कि भीषण गर्मी में अघोषित बिजली कटौती से आम जनता, किसान, छात्र-छात्राएं, व्यापारी और छोटे व्यवसायी परेशान हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो समाजवादी लोग आम जनता के साथ मिलकर व्यापक जनआंदोलन शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विद्युत विभाग और शासन-प्रशासन की होगी।
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जननायक की जन्मशताब्दी पर महाअभियान, बलिया में हजारों लोगों को मिलेगा निःशुल्क स्वास्थ्य लाभ
जननायक चन्द्रशेखर जी की जन्मशताब्दी को केवल समारोहों तक सीमित न रखकर जनसेवा के संकल्प से जोड़ने की पहल की जा रही है। इसी क्रम में 26 से 28 जून तक बलिया के विभिन्न क्षेत्रों में तीन दिवसीय विशाल निःशुल्क मेडिकल कैंप का आयोजन होगा, जिसमें वाराणसी और लखनऊ से आने वाले विशेषज्ञ चिकित्सक ग्रामीणों और जरूरतमंदों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें परामर्श देंगे।
पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर जी की पुत्रवधू डॉ. सुषमा शेखर के नेतृत्व में आयोजित इस स्वास्थ्य सेवा अभियान का उद्देश्य गांवों तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाना है। शिविर में नेत्र, अस्थि, श्वास एवं सामान्य रोगों की जांच के साथ विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा निःशुल्क परामर्श दिया जाएगा।

स्वास्थ्य शिविर का पहला चरण 26 जून को करनई स्थित वृंदावन शिक्षण संस्थान, दूसरा 27 जून को रतसर स्थित डी.एस. मेमोरियल गर्ल्स डिग्री कॉलेज तथा तीसरा 28 जून को सोहांव क्षेत्र के पिपरा कला स्थित प्रभा मंडपम में आयोजित किया जाएगा। सभी शिविर सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक संचालित होंगे।
आयोजकों के अनुसार लखनऊ और वाराणसी के अनुभवी चिकित्सकों की टीम लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की जांच करेगी तथा आवश्यक चिकित्सकीय सलाह भी देगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बड़े शहरों जैसी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ अपने क्षेत्र में ही मिल सकेगा।
डॉ. सुषमा शेखर ने जनपदवासियों से अधिक से अधिक संख्या में शिविर में पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण कराने और इस जनहितकारी पहल का लाभ उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जननायक चन्द्रशेखर के जनसेवा के आदर्शों को आगे बढ़ाने का सबसे अच्छा माध्यम समाज के जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना है।
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लखनऊ अग्निकांड के बाद बड़ा सवाल: क्या बलिया के कोचिंग संस्थान सुरक्षित हैं?
बलिया। लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग में 15 छात्रों की दर्दनाक मौत के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों और अग्निशमन व्यवस्थाओं में गंभीर लापरवाही की बात सामने आई है, जिसके बाद कई जिलों में प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों की जांच शुरू कर दी है।
इसी बीच बलिया जिले में भी बिना मानकों और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के संचालित हो रहे सैकड़ों कोचिंग संस्थानों को लेकर चिंता बढ़ गई है। जिला मुख्यालय से लेकर बेल्थरा रोड, रसड़ा, सिकंदरपुर, बांसडीह और बैरिया जैसी तहसीलों तक अनेक कोचिंग सेंटर संकरी गलियों, बहुमंजिला भवनों और व्यावसायिक परिसरों में संचालित हो रहे हैं, जहां न तो अग्निशमन उपकरण दिखाई देते हैं और न ही आपातकालीन निकास की समुचित व्यवस्था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई कोचिंग संस्थान क्षमता से अधिक छात्रों को बैठाकर कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। अधिकांश भवनों में फायर एनओसी, आपातकालीन निकास, अग्निशमन यंत्र और सुरक्षा मानकों की स्थिति की कभी जांच नहीं होती। ऐसे में यदि कोई दुर्घटना होती है तो हालात बेहद भयावह हो सकते हैं।
लखनऊ हादसे के बाद कानपुर समेत कई जिलों में प्रशासन ने सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई शुरू कर दी है और कई संस्थानों को सील भी किया गया है।
अब सवाल यह है कि क्या बलिया प्रशासन भी जिले में संचालित कोचिंग संस्थानों का व्यापक सर्वे कराएगा? क्या बिना मानक और बिना सुरक्षा व्यवस्था के चल रहे कोचिंग सेंटरों की जांच होगी? लखनऊ की त्रासदी ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
(यह जनहित से जुड़ा विषय है। प्रशासन को जिले के सभी कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था, फायर एनओसी और भवन मानकों की तत्काल जांच करानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी दुर्घटना से बचा जा सके।)
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