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जानिए अधिकारियों और नाराज़ व्यापारियों के बीच बैठक की वो बातें, जो सामने नहीं आईं
बलिया डेस्क : बलिया में कोरोना संक्रमित मरीज़ों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। महामारी के इस ख़तरे को देखते हुए ज़िला प्रशासन एक्टिव मोड में आ गया है। नगर मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में अधिशासी अधिकारी (ईओ) दिनेश कुमार विश्वकर्मा अपनी टीम के साथ मिलकर बाज़ारों का निरीक्षण कर रहे हैं। इस दौरान उन दुकानदारों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की जा रही है, जो कथित तौर पर नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
प्रशासन की इस कार्रवाई में दुकानदारों से जुर्माने की रकम वसूली गई है। जिससे व्यापारी संगठन बेहद नाराज़ हैं। व्यापारी संगठनों ने ईओ दिनेश कुमार विश्वकर्मा के खिलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। व्यापारियों का कहना है कि ईओ उन्हें अनावश्यक ही परेशान कर रहे हैं, जबकि वह सभी नियमों का पालन कर रहे हैं। साथ ही नाराज व्यापारियों ने ईओ समेत कई अधिकारीयों पर कारवाई करने की मांग भी मंत्री से की।
क्या बोले आनन्द स्वरूप शुक्ल ? व्यापारियों की नाराज़गी के मद्देनज़र रविवार को कलेक्ट्रेट सभागार में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ व्यापारियों की एक बैठक भी हुई। बैठक में व्यापारियों की नाराज़गी को देखते हुए संसदीय कार्य व ग्राम विकास राज्यमन्त्री आनन्द स्वरूप शुक्ल भी उनके समर्थन में आ गए हैं। उन्होंने व्यापारियों को आश्वासन दिया है कि प्रशासन द्वारा वसूला गया जुर्माना उन्हें वापस लौटा दिया जाएगा।
ईओ ने रखा अपना पक्ष- इस बैठक में ईओ ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सिर्फ इसलिए की ताकि कोरोना संक्रमण के ख़तरे की रोकथाम हो सके। उन्होंने कहा कि कड़ा कदम उटाए बिना कोरोना के ख़तरे को बढ़ने से नहीं रोका जा सकता। बैठक में मौजूद रहे ज़िलाधिकारी श्री हरि प्रताप शाही ने इस दौरान ईओ की बातों का समर्थन किया।
बैठक में डीएम ने क्या कहा? बलिया खबर के सूत्रों के मुताबिक, शांति से तकरीबन आधे घंटे तक सभी को सुनने के बाद डीएम ने इशारो इशारों में कई बड़ी बातें भी कही। उन्होंने बैठक में कहा कि शुरुआत में कोरोना संक्रमण के ख़तरे को देखते हुए आप में से ही कई व्यापारी सख्ती की मांग कर रहे थे। लेकिन अब प्रशासन की ओर से सख्ती की जा रही है तो आप इसका विरोध कर रहे हैं। जबकि आपको भी पता है कि कोरोना की रोकथाम के लिए सख्ती ज़रूरी है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण सबसे ज़्यादा बाज़ारों से ही फैल रहा है। इसलिए इसे अनुशासित किया जाना आवश्यक है।
डीएम ने कहा कि आज बलिया नगर में 500 से ज़्यादा कोरोना पाज़िटिव केस हैं, इनमें से 300 से ज़्दाया प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से व्यापारियों और उनके परिवार से जुड़े केस हैं। उन्होंने कहा कि बलिया नगर में पहला केस 25 जून को लक्ष्मी मार्केट से ही सामने आया था। इसके साथ ही उन्होंने उस कोरोना पॉज़िटिव सेल्स गर्ल का भी उदाहरण दिया जिसके सम्पर्क में आने से 21 लोग कोरोना पाज़िटिव हो गए थे। डीएम ने कहा हैरानी की बात ये है कि जिस दिन उस सेल्स गर्ल के दुकान की बैरिकेटिंग हो रही थी उसी दिन उस दूकान के स्वामी वहां बैठ कर ग्राहकों से पैसे का लेंन देंन कर रहे थे, ये संवेदनशीलता है हमारी ?
शाही ने कहा कि इन्हीं सब तथ्यों को देखते हुए मार्केट में ख़ास अनुशासन की ज़रूरत है। जिसका पालन नहीं किया गया तो ख़तरा बढ़ सकता है। व्यापारियों को चाहिए कि वह कोरोना के खिलाफ़ इस जंग में प्रशासन का साथ दें।
बलिया में कोरोना की स्थिति- 10 अगस्त की सुबह तक प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक बलिया में पिछले 24 घंटों में कोरोनावायरस संक्रमण के 83 नए मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही अब बलिया में कुल दर्ज मरीज़ों की संख्या 2410 के पार हो गई है। बलिया में अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी। वहीं अब जिले में ऐक्टिव 933 हैं।
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Photos- जमुना राम मेमोरियल स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न
26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने अनुशासित मार्च-पास्ट के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर धर्मात्मानंद जी ने ध्वजारोहण किया। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में निहित प्रावधानों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर सेना से सेवानिवृत्त महानुभूतियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया। हरियाणवी नृत्य, “मां से ही माटी” थीम पर आधारित प्रस्तुति, “पधारो मारे देश”, कव्वाली, उत्तर-पूर्व भारत का प्रसिद्ध बिहू नृत्य तथा योग प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। गरबा और भांगड़ा नृत्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “वराह रूपम” नृत्य एवं कथकली प्रस्तुति रही, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संस्था के निदेशक तुषार नंद जी एवं सौम्या प्रसाद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों एवं समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण से ही भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना साकार हो सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारीगण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की सफलता में कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा एवं अरविंद चौबे की विशेष सहभागिता रही।
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UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र
बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।
भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।
शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।


