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बलिया स्पेशल

बलिया से रैली के जरिये राजभर ने भरी हुंकार, लाखों की संख्या में उमड़ी भीड़

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बलिया में समाज अधिकार चेतना रैली का शनिवार को आयोजन किया गया। रैली में एक तरफ जन अधिकार पार्टी के कार्यकताओं की भीड़ दूसरी तरफ से भारतीय समाज पार्टी का जय घोष था। भागीदारी संकल्प मोर्चा की यह प्रथम संयुक्त रैली और उसमें उमड़ी वंचित समाज की लाखों से अधिक की भीड़ ने यूपी के पूर्वांचल से एक नये राजनैतिक विकल्प के रूप में प्रदेश की सियासत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश की।

रैली को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित करते हुए जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री बाबू सिंह कुषवाहा ने कहा कि इस भीड़ को देखकर ये लगता है कि वंचित समाज अब अपने हक और अधिकार के लिए जागा है। कुशवाहा ने बताया कि आजादी के 73 वर्षो से विभिन्न राजनैतिक पार्टियों ने वोट के नाम पर आपको सिर्फ बहकाने का काम किया है, आपको संवैधानिक अधिकार पाने से वंचित रखा है।

वंचित समाज के लोगों को धर्म का नषा पकड़ाया जा रहा है। आपके और हमारे बच्चों को कांवड़ ढोने की सीख दी जा रही है मगर जो लोग सत्ता में बैठे हैं, उनके बच्चे विदेषों में जा कर वैज्ञानिक, डाक्टर और बड़े-बड़े अफसर बन रहे हैं। कार्यक्रम के विषिष्ट अतिथि प्रेमचन्द प्रजापति, राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय उपेक्षित समाज पार्टी ने अपने सम्बोधन में कहा कि सरकार कहती है कि दलितों और पिछड़ों को आरक्षण मिला हुआ है?

जबकि सरकार में सभी उच्च पदों पर अमीरों और बड़े लोगों का ही आज भी कब्जा है। हमारी हिस्सेदारी खत्म की जा रही है, हमारी जनसंख्या 90 प्रतिषत है तो हमारे हिस्से में 90 प्रतिषत नौकरियां आना चाहिए कि नही? रैली के दौराना राजभर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी वर्ग का कोई जज नहीं है। आज उत्तर प्रदेष में प्रमुख सचिव अथवा मुख्य सचिव ओबीसी या दलित नहीं है।

पूरे प्रदेष में 10 प्रतिशत भी डीएम, एसपी ओबीसी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक का नहीं है। लगभग 70 प्रतिषत आईएएस की नौकरी सिर्फ एक जाति विषेष के पास है। ये आरक्षण वास्तव में किसके लिए है इस पर विचार करना होगा। जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी, जब तक नहीं हो जाता तब तक आरक्षण का मतलब पूरा नहीं होगा।

थोड़ा बहुत आरक्षण का लाभ वर्तमान समय में जो मिल रहा है वो बाबा साहेब डा0 भीमराव अम्बेडकर तथा मण्डल कमीशन की वजह से मिला था। लेकिन आज उसको भी समाप्त कर दिया गया। सरकारी नौकरियों में इण्टरव्यू में बैठने वाले गरीबों अभ्यर्थियों को कम नम्बर देकर नौकरियों में जाने से रोकते हैं, ये कौन लोग हैं?

उन्होंने कहा कि ये बताने की जरूरत नहीं है, सबको पता है। ये लोग अपने को उच्च समझते है और सत्ता में पहॅुचकर वंचितों का गला घोटते है। बाबा साहब अम्बेडकर ने जो सपना गरीबों, वंचितों के लिए देखा था, यह सरकार उस सपने को समाप्त कर, हम गरीबों को सिर्फ अमीरों के तीमारदारी, झाडू लगाने और तेल मालिस करने तक सीमित करना चाहती है।

गरीबों को न पढ़ाई, नौकरी, ईलाज और न ही न्याय मिलता है। आज स्थिति यह है कि जेलों में 65 प्रतिषत से भी ज्यादा गरीब सजा काट रहे हंै और जहां अमीर न्यायालयों से संगीन अपराधों में भी बरी हो जाता है वहीं आज गरीब की जमानत तक नहीं हो पा रही है।

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बलिया

अघोषित बिजली कटौती पर सपा युवजन सभा का हल्ला बोल, 9 सूत्रीय मांगों के साथ सौंपा ज्ञापन

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भीषण गर्मी के बीच लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती और खराब विद्युत व्यवस्था को लेकर समाजवादी युवजन सभा ने विद्युत विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष अरविन्द गिरि के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने विद्युत वितरण खंड के अधिशासी अभियंता को 9 सूत्रीय मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र की समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की।

ज्ञापन में रघुनाथपुर, दुबहड़ और आईटीआई विद्युत उपकेंद्रों से जुड़े इलाकों में बार-बार हो रही बिजली कटौती पर रोक लगाने, जर्जर तारों को बदलने, कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने, फीडरों और लाइनों का नियमित रखरखाव कराने तथा उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई।

इस दौरान गड़वार क्षेत्र में 33 केवी लाइन पर पेड़ गिरने से बाधित बिजली आपूर्ति को बहाल कराने में व्यस्त अधिशासी अभियंता से दूरभाष पर वार्ता कर क्षेत्र की समस्याओं से अवगत कराया गया। उनकी अनुपस्थिति में विभाग द्वारा अधिकृत अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।

अरविन्द गिरि ने कहा कि भीषण गर्मी में अघोषित बिजली कटौती से आम जनता, किसान, छात्र-छात्राएं, व्यापारी और छोटे व्यवसायी परेशान हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो समाजवादी लोग आम जनता के साथ मिलकर व्यापक जनआंदोलन शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विद्युत विभाग और शासन-प्रशासन की होगी।

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जननायक की जन्मशताब्दी पर महाअभियान, बलिया में हजारों लोगों को मिलेगा निःशुल्क स्वास्थ्य लाभ

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जननायक चन्द्रशेखर जी की जन्मशताब्दी को केवल समारोहों तक सीमित न रखकर जनसेवा के संकल्प से जोड़ने की पहल की जा रही है। इसी क्रम में 26 से 28 जून तक बलिया के विभिन्न क्षेत्रों में तीन दिवसीय विशाल निःशुल्क मेडिकल कैंप का आयोजन होगा, जिसमें वाराणसी और लखनऊ से आने वाले विशेषज्ञ चिकित्सक ग्रामीणों और जरूरतमंदों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें परामर्श देंगे।

पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर जी की पुत्रवधू डॉ. सुषमा शेखर के नेतृत्व में आयोजित इस स्वास्थ्य सेवा अभियान का उद्देश्य गांवों तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाना है। शिविर में नेत्र, अस्थि, श्वास एवं सामान्य रोगों की जांच के साथ विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा निःशुल्क परामर्श दिया जाएगा।

स्वास्थ्य शिविर का पहला चरण 26 जून को करनई स्थित वृंदावन शिक्षण संस्थान, दूसरा 27 जून को रतसर स्थित डी.एस. मेमोरियल गर्ल्स डिग्री कॉलेज तथा तीसरा 28 जून को सोहांव क्षेत्र के पिपरा कला स्थित प्रभा मंडपम में आयोजित किया जाएगा। सभी शिविर सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक संचालित होंगे।

आयोजकों के अनुसार लखनऊ और वाराणसी के अनुभवी चिकित्सकों की टीम लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की जांच करेगी तथा आवश्यक चिकित्सकीय सलाह भी देगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बड़े शहरों जैसी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ अपने क्षेत्र में ही मिल सकेगा।

डॉ. सुषमा शेखर ने जनपदवासियों से अधिक से अधिक संख्या में शिविर में पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण कराने और इस जनहितकारी पहल का लाभ उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जननायक चन्द्रशेखर के जनसेवा के आदर्शों को आगे बढ़ाने का सबसे अच्छा माध्यम समाज के जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना है।

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लखनऊ अग्निकांड के बाद बड़ा सवाल: क्या बलिया के कोचिंग संस्थान सुरक्षित हैं?

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बलिया। लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग में 15 छात्रों की दर्दनाक मौत के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों और अग्निशमन व्यवस्थाओं में गंभीर लापरवाही की बात सामने आई है, जिसके बाद कई जिलों में प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों की जांच शुरू कर दी है।

इसी बीच बलिया जिले में भी बिना मानकों और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के संचालित हो रहे सैकड़ों कोचिंग संस्थानों को लेकर चिंता बढ़ गई है। जिला मुख्यालय से लेकर बेल्थरा रोड, रसड़ा, सिकंदरपुर, बांसडीह और बैरिया जैसी तहसीलों तक अनेक कोचिंग सेंटर संकरी गलियों, बहुमंजिला भवनों और व्यावसायिक परिसरों में संचालित हो रहे हैं, जहां न तो अग्निशमन उपकरण दिखाई देते हैं और न ही आपातकालीन निकास की समुचित व्यवस्था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई कोचिंग संस्थान क्षमता से अधिक छात्रों को बैठाकर कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। अधिकांश भवनों में फायर एनओसी, आपातकालीन निकास, अग्निशमन यंत्र और सुरक्षा मानकों की स्थिति की कभी जांच नहीं होती। ऐसे में यदि कोई दुर्घटना होती है तो हालात बेहद भयावह हो सकते हैं।

लखनऊ हादसे के बाद कानपुर समेत कई जिलों में प्रशासन ने सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई शुरू कर दी है और कई संस्थानों को सील भी किया गया है।

अब सवाल यह है कि क्या बलिया प्रशासन भी जिले में संचालित कोचिंग संस्थानों का व्यापक सर्वे कराएगा? क्या बिना मानक और बिना सुरक्षा व्यवस्था के चल रहे कोचिंग सेंटरों की जांच होगी? लखनऊ की त्रासदी ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

(यह जनहित से जुड़ा विषय है। प्रशासन को जिले के सभी कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था, फायर एनओसी और भवन मानकों की तत्काल जांच करानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी दुर्घटना से बचा जा सके।)

 

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