बलिया स्पेशल
पशुओं की मौत की जांच करने आयी टीम ने बलिया डीएम को सौंपी झूठी रिपोर्ट
नगरा डेस्क: बलिया के नगरा क्षेत्र के पशु आश्रय स्थल में मौजूद पशुओं के म;रने की जांच करने आयी टीम ने झूठी जांच रिपोर्ट डीएम बलिया को सौंपी है. एक तरफ जहां जांच टीम 47 बछड़ो को दो अलग अलग गांवों में सुरक्षित रखने का हवाला दे रही है, वही उन गांवों के ग्राम प्रधानो की माने तो उनके गांव में पशु आश्रय स्थल के एक भी बछड़े नहीं रखे गए है.
न गांवों में आधिकारिक दावों की पड़ताल करने गयी मीडिया टीम से ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों ने झूठी जांच रिपोर्ट की पोल खोलकर रख दी. मीडिया की टीम के पहुँचने की जानकारी होने पर जिम्मेदारों में खलबली मच गई कि पशुओं के मर’ने की पोल न खुल जाए. विकास खण्ड नगरा के रघुनाथपुर स्थित पशु आश्रय स्थल रघुनाथपुर में बछड़ो के न होने और उनके मर’ने की खबर प्रकाशित होने के बादजिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत ने प्रभारी सीबीओ,
एसडीएम रसड़ा विपिन कुमार जैन व खण्ड विकास अधिकारी नगरा रामाशीष की टीम भेजकर मामले की जांच करने का निर्देश दिया.जिसके बाद टीम ने जांच कर जिलाधिकारी को रिपोर्ट प्रेषित कर दी. टीम का कहना था था कि नगरा रसड़ा मार्ग पर म’रने वाले पशु रोड एक्सिडेंट से म’रे है और वे बछड़े पशु आश्रय स्थल के नहीं है, क्योंकि उनके कानों पर इअर टैग नहीं लगा था.
पशु आश्रय स्थल के सभी 47 पशु दो अलग अलग गांवों में सुरक्षित रखे गए है. बीडीओ नगरा का दावा है कि खैरा नबाबगंज में 30 व रघुनाथपुर पशु आश्रय स्थल के पास मुर्गिफार्म में 17 पशु रखे गए है.वहीँ सबके कान में इअर टैग लगा हुआ है. बीडीओ रामाशीष के दावों को परखने के लिए मीडिया की टीम जब चिन्हित दोनों स्थानों पर पहुची तो वहां का नजारा खाली खाली दिखा.
किसी भी तरह उन बछड़ो का पता नहीं चला जिनको टीम ने डीएम को भेजी गई रिपोर्ट में जिंदा व सही सलामत दिखाया है. इस बाबत जब ग्राम वासियों व ग्राम प्रधानों से पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट तौर पर बताया कि गांव में पशु आश्रय स्थल के बछड़े नहीं रखे गए है और न ही किसी ने भिजवाया है.ग्राम वासियों व ग्राम प्रधानों ने अधिकारियों के दावों का जिन्न सामने ला दिया और
डीएम को भेजी गई जांच रिपोर्ट की हकीकत पता चली जो अब तक बछड़ो को रखे गए स्थलों को न बताकर अधिकारियों द्वारा घूमाये जा रहे थे. अब सवाल यह उठता है कि कहीं अधिकारी अपनी कमी छिपाने के लिए गलत रिपोर्ट शासन प्रशासन को भेज रहे है?
वहीँ रसड़ा एसडीएम विपिन जैन ने जांच करने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि पशु आश्रय स्थल के सभी बछड़े वहां सेहटाकर दूसरे स्थानों पर रखे गए है. सड़क किनारे मिले बछड़ो के श’व सड़क दुर्घ’टना में में म’रे हैं. म’रे हुए बछड़ो के ऊपर टायर के निशान देखने को मिला है. म’रे हुए किसी भी बछड़ो पर इअर टैग नहीं लगे हुए थे.
पशु आश्रय स्थल के सभी 47 बछड़ो पर इअर टैग लगे हुए और वह सुरक्षित है. खण्ड विकास अधिकारी रामाशीष ने बताया कि पशु आश्रय स्थल के 47 पशुओ को दूसरे स्थानों पर शिफ्ट कर दिया गया है. खैरा नबाबगंज गांव में 30 बछड़े व रघुनाथपुर में एक मुर्गिफार्म मे 17बछड़ो को रखा गया है. सभी बछड़ो पर इअर टैग लगा हुआ है.
पशु आश्रय स्थल पर पानी समाप्त होने के बाद सारे पशु पुनः वहां पर शिफ्ट कर दिये जायेंगे. वहीँ ग्राम प्रधान खैरा नबाबगंज रामनरेश यादव ने पूछने पर बताया कि 1 साल पहले मुझसे बछड़ो को रखने बात हुई लेकिन मैंने मना कर दिया था. इस समय मेरी ग्राम सभा मे किसी के यहां पशु आश्रय स्थल के कोई भी बछड़े नहीं रखे गये हैं.
बलिया
अघोषित बिजली कटौती पर सपा युवजन सभा का हल्ला बोल, 9 सूत्रीय मांगों के साथ सौंपा ज्ञापन
भीषण गर्मी के बीच लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती और खराब विद्युत व्यवस्था को लेकर समाजवादी युवजन सभा ने विद्युत विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष अरविन्द गिरि के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने विद्युत वितरण खंड के अधिशासी अभियंता को 9 सूत्रीय मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र की समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की।
ज्ञापन में रघुनाथपुर, दुबहड़ और आईटीआई विद्युत उपकेंद्रों से जुड़े इलाकों में बार-बार हो रही बिजली कटौती पर रोक लगाने, जर्जर तारों को बदलने, कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने, फीडरों और लाइनों का नियमित रखरखाव कराने तथा उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई।
इस दौरान गड़वार क्षेत्र में 33 केवी लाइन पर पेड़ गिरने से बाधित बिजली आपूर्ति को बहाल कराने में व्यस्त अधिशासी अभियंता से दूरभाष पर वार्ता कर क्षेत्र की समस्याओं से अवगत कराया गया। उनकी अनुपस्थिति में विभाग द्वारा अधिकृत अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।
अरविन्द गिरि ने कहा कि भीषण गर्मी में अघोषित बिजली कटौती से आम जनता, किसान, छात्र-छात्राएं, व्यापारी और छोटे व्यवसायी परेशान हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो समाजवादी लोग आम जनता के साथ मिलकर व्यापक जनआंदोलन शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विद्युत विभाग और शासन-प्रशासन की होगी।
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जननायक की जन्मशताब्दी पर महाअभियान, बलिया में हजारों लोगों को मिलेगा निःशुल्क स्वास्थ्य लाभ
जननायक चन्द्रशेखर जी की जन्मशताब्दी को केवल समारोहों तक सीमित न रखकर जनसेवा के संकल्प से जोड़ने की पहल की जा रही है। इसी क्रम में 26 से 28 जून तक बलिया के विभिन्न क्षेत्रों में तीन दिवसीय विशाल निःशुल्क मेडिकल कैंप का आयोजन होगा, जिसमें वाराणसी और लखनऊ से आने वाले विशेषज्ञ चिकित्सक ग्रामीणों और जरूरतमंदों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें परामर्श देंगे।
पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर जी की पुत्रवधू डॉ. सुषमा शेखर के नेतृत्व में आयोजित इस स्वास्थ्य सेवा अभियान का उद्देश्य गांवों तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाना है। शिविर में नेत्र, अस्थि, श्वास एवं सामान्य रोगों की जांच के साथ विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा निःशुल्क परामर्श दिया जाएगा।

स्वास्थ्य शिविर का पहला चरण 26 जून को करनई स्थित वृंदावन शिक्षण संस्थान, दूसरा 27 जून को रतसर स्थित डी.एस. मेमोरियल गर्ल्स डिग्री कॉलेज तथा तीसरा 28 जून को सोहांव क्षेत्र के पिपरा कला स्थित प्रभा मंडपम में आयोजित किया जाएगा। सभी शिविर सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक संचालित होंगे।
आयोजकों के अनुसार लखनऊ और वाराणसी के अनुभवी चिकित्सकों की टीम लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की जांच करेगी तथा आवश्यक चिकित्सकीय सलाह भी देगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बड़े शहरों जैसी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ अपने क्षेत्र में ही मिल सकेगा।
डॉ. सुषमा शेखर ने जनपदवासियों से अधिक से अधिक संख्या में शिविर में पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण कराने और इस जनहितकारी पहल का लाभ उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जननायक चन्द्रशेखर के जनसेवा के आदर्शों को आगे बढ़ाने का सबसे अच्छा माध्यम समाज के जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना है।
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लखनऊ अग्निकांड के बाद बड़ा सवाल: क्या बलिया के कोचिंग संस्थान सुरक्षित हैं?
बलिया। लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग में 15 छात्रों की दर्दनाक मौत के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों और अग्निशमन व्यवस्थाओं में गंभीर लापरवाही की बात सामने आई है, जिसके बाद कई जिलों में प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों की जांच शुरू कर दी है।
इसी बीच बलिया जिले में भी बिना मानकों और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के संचालित हो रहे सैकड़ों कोचिंग संस्थानों को लेकर चिंता बढ़ गई है। जिला मुख्यालय से लेकर बेल्थरा रोड, रसड़ा, सिकंदरपुर, बांसडीह और बैरिया जैसी तहसीलों तक अनेक कोचिंग सेंटर संकरी गलियों, बहुमंजिला भवनों और व्यावसायिक परिसरों में संचालित हो रहे हैं, जहां न तो अग्निशमन उपकरण दिखाई देते हैं और न ही आपातकालीन निकास की समुचित व्यवस्था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई कोचिंग संस्थान क्षमता से अधिक छात्रों को बैठाकर कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। अधिकांश भवनों में फायर एनओसी, आपातकालीन निकास, अग्निशमन यंत्र और सुरक्षा मानकों की स्थिति की कभी जांच नहीं होती। ऐसे में यदि कोई दुर्घटना होती है तो हालात बेहद भयावह हो सकते हैं।
लखनऊ हादसे के बाद कानपुर समेत कई जिलों में प्रशासन ने सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई शुरू कर दी है और कई संस्थानों को सील भी किया गया है।
अब सवाल यह है कि क्या बलिया प्रशासन भी जिले में संचालित कोचिंग संस्थानों का व्यापक सर्वे कराएगा? क्या बिना मानक और बिना सुरक्षा व्यवस्था के चल रहे कोचिंग सेंटरों की जांच होगी? लखनऊ की त्रासदी ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
(यह जनहित से जुड़ा विषय है। प्रशासन को जिले के सभी कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था, फायर एनओसी और भवन मानकों की तत्काल जांच करानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी दुर्घटना से बचा जा सके।)
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