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हुज़ूर सल्लाo का फ़रमान:- कि औरत पर सबसे ज्यादा हक किसका है, और मर्द पर सबसे ज़्यादा हक किसका है…
आज हम आपको दो ऐसी खूबसूरत हदीस बताने जा रहे हैं जिनको सुनकर आपका दिल खुश हो जाएगा तो आइए आपको बताते हैं कि वह कौन सी हदीस है सबसे पहले हम आपको पहली हदीस की तरफ लेकर चलते हैं हजरत आयशा रजिo से रवायत है कि उन्होंने रसूल सल्लाo से इरशाद फरमाया की या रसूलo औरत पर सबसे ज्यादा हक किसका है आप सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने इरशाद फरमाया की औरत पर सबसे ज्यादा हक उसके शौहर का है फिर हजरत आयशा रजिo ने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से फरमाया की या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहू अलैही वसल्लम मर्द पर सबसे ज्यादा हक़ किसका है तो आप सल्लल्लाहू अलैही वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि उसके मां का यानी कि मर्द पर सबसे ज्यादा हक़ उसके मां का है।

इस हदीस से यह पता चला कि औरत के लिए सबसे ज्यादा अहमियत रखने वाला शख्स मर्द है और मर्द के लिए सबसे ज्यादा अहमियत रखने वाली उसकी मां है लेकिन आज दुनिया मे इसका उल्टा हो रहा है लोग बीवियों के बातो में आ कर माँ बाप को पीट रहे है और घर से निकल दे रहे है दोस्तो अक्सर देखा जाता है और हम अक्सर अपने समाज मे सुनते है कि कोई औरत अपने बच्चो से बहुत परेशान रहती है जिस माँ ने हमे बचपन से पाला है और अपनी छाती से दूध पिला कर हमें इतना बड़ा किया खुद भूखी रही और हमे खिलाया रात को जब हम रोते थे तो खुद जाग कर हमें सुलाया आज हम उसी माँ को भूलकर बीवी के पीछे लगे रहते है।

दोस्तों इसी के साथ हम आपको दूसरी हदीस की तरफ ले चलते हैं हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया कि जब दुनिया में कोई औरत अपने शौहर को तकलीफ देती है तो जन्नती औरतों में से उसकी बीवी बोलती है यानी कि जन्नत की हूर बोलती है कि अल्लाह तुझे बर्बाद करें इसे तकलीफ ना दे यह तो तेरे पास मेहमान हैं और यह बहुत जल्द हमारे पास आ जाएगा इस हदीस शरीफ की दलील ये है( सिलसिला अल हदीस 2012)

दोस्तों अब हम आपको पहली हदीस की तरफ ले चलते हैं हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो वाले वसल्लम ने फरमाया की औरत पर सबसे ज्यादा हक उसकी शौहर का है लेकिन आज के जमाने में आप देखते हैं कि जब औरत को गुस्सा आता है तो वो ये नहीं देखती कि सामने हमारा शौहर है या वालिद है या कोई और है उसको यह पता भी नहीं होता है कि वह किस को तकलीफ दे रही है और यह रिश्ता कितना अहमियत वाला है जबकि दूसरी हदीस शरीफ में यह साफ बताया गया है कि जब कोई औरत मर्द को तकलीफ देती है तो जन्नत की हूर उस पर लानत भेजती हैं। आगे देखें वीडियो.
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जमुना राम मेमोरियल स्कूल में कक्षा 12वीं का भव्य विदाई समारोह, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच छात्रों को मिली नई उड़ान की प्रेरणा
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जमुना राम महाविद्यालय पहुचें बलिया एसपी ने छात्राओं को दी सुरक्षा की जानकारी
बलिया। जमुना राम स्नातकोत्तर महाविद्यालय, चितबड़ागांव में बुधवार 15 अक्टूबर को मिशन शक्ति पंचम चरण के तहत नारी सुरक्षा, नारी सम्मान व नारी स्वावलंबन विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक डॉ. ओमवीर सिंह रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। संस्थापक प्रबंधक प्रो. धर्मात्मा नंद, प्रबंध निदेशक ई. तुषार नंद और प्राचार्य डॉ. अंगद प्रसाद गुप्त ने मुख्य अतिथि का अंगवस्त्र और बुके देकर स्वागत किया।
एसपी डॉ. ओमवीर सिंह ने छात्राओं को आत्मरक्षा, साइबर सुरक्षा, सड़क सुरक्षा और हेल्पलाइन नंबर 112, 108, 1098, 181, 102, 1090, 1930 और 1076 की जानकारी दी तथा उन्हें अपने जीवन में आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. अंगद प्रसाद गुप्त ने की तथा संचालन श्री बृजेश गुप्ता ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।
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माता-पिता की बीमारी से मौत, डीएम पहुंचे बच्चे!
बलिया। नगर के रामपुर महावल निवासी दो मासूम भाई-बहन ऋषभ सिंह (6) और रितिका सिंह (5) सोमवार को अपने नाना राधेश्याम खरवार के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और मदद की गुहार लगाई। दोनों बच्चों ने बताया कि उनके माता-पिता की मौत बीमारी से हो चुकी है और अब उनके रिश्तेदारों ने घर और आभूषणों पर कब्जा कर लिया है।
नाना राधेश्याम खरवार, जो पनिचा गांव के निवासी हैं, ने जिलाधिकारी से फरियाद करते हुए कहा कि उनकी बेटी सपना की दो वर्ष पूर्व बीमारी से मौत हो गई थी। इसके बाद दामाद रोशन सिंह को पड़ोसियों ने इतना प्रताड़ित किया कि वह भी एक वर्ष पहले बीमारी के चलते चल बसे।
राधेश्याम ने बताया कि उनकी बेटी और दामाद के आभूषण बच्चों की बड़ी मां और बड़े पिता ने अपने पास रख लिए हैं और घर में ताला लगा दिया है। उन्होंने इस संबंध में जिले के कई अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने जिलाधिकारी से अनुरोध किया कि मुख्यमंत्री बाल संरक्षण योजना और बाल सेवायोजन योजना के तहत बच्चों को सहायता दी जाए, ताकि उनका पालन-पोषण और शिक्षा सुचारु रूप से हो सके।





