बलिया। आरटीई (राइट टू एजुकेशन) के तहत 432 बच्चों का चयन हुआ। अब ये बच्चे जनपद के अंग्रेजी मीडिएम स्कूलों में कक्षा आठ तक नि:शुल्क शिक्षा प्राप्त करेंगे। इसके अलावा उन्हें पांच हजार रूपए सलाना शासन की ओर से प्राप्त होगा। ज्ञात हो कि लाटरी में कुल 1232 आवेदन आए थे। जिसमें सत्यापन के दौरान 67 आवदेनों में गलती पाए जाने के कारण रद्द कर दिया गया।
शेष 1165 आवेदनों की लॉटरी प्राप्त की गई। जिसमें 432 बच्चों का चयन हुआ। जबकि शेष बचे 733 बच्चों को सरकार की ढूलमूल नीति के कारण इस योजना से वंचित होना पड़ा। वरिष्ठ अधिवक्ता तथा आरटीआई कार्यकर्ता मनोज राय हंस जनपद में लंबे समय से आरटीई को लेकर आंदोलनरत है। इन्हीं के आंदोलन की देन से आज हजारों बच्चे सरकार की इस योजना का लाभ उठा रहे हैं।
लेकिन बुधवार को पत्रकारों से रू-बरू होते हुए उन्होंने बताया कि 432 बच्चों के चयन से मैं खुश हूं तो शेष बचे 733 बच्चों का चयन न होना मेरे लिए पीडि़ादायक है। कहा कि जनपद में ऐसे बहुतसे गांव है जहां एक भी अंग्रेजी माध्यम के स्कूल नहीं है। ऐसे में उस गांव के बच्चे कहां जाएंगे लेकिन सरकार के कानों में मेरी बार-बार मांग के बावजूद जूं नहीं रेंग रहा है।
क्या है आरटीई (RTE) ? भारत के संविधान (86वां संशोधन, 2002) में आर्टिकल-21ए को सम्मिलित किया गया है। इसके अंतर्गत 6 से 14 साल के सभी बच्चों को उनके नजदीक के सरकारी स्कूल में नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रावधान है।
यहां नि:शुल्क शिक्षा का तात्पर्य है कि बच्चों के अभिभावकों से स्कूल की फीस, बच्चे के यूनिफार्म और पुस्तकों के लिए कोई पैसे नहीं लिए जाते हैं। वहीं, इस अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत बच्चों का नामांकन बिना किसी शुल्क के किया जाता है।
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