बलिया :- जिले में जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था और अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को लेकर आए दिन दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं देखने को मिल रही है। इसी क्रम में बुधवार को जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों को पूरी रात एक लाश के साथ गुजारनी पड़ी। जानकारी के मुताबिक 40 वर्षीय एक अज्ञात युवक सोमवार की रात गंभीर हालत में जिला अस्पताल पहुंचा। इमरजेंसी में ईएमओ ने प्राथमिक इलाज कर उसे इमरजेंसी वार्ड के वार्ड नंबर 11 पर भर्ती कर दिया। कॉल डे पर मौजूद फिजीशियन डॉ तोशिका सिंह ने मरीज का इलाज शुरू किया लेकिन दुर्भाग्यवश मंगलवार की सुबह करीब 11:00 बजे मरीज की जान चली गई।
हैरानी की बात यह है कि मरीज की मौत के बाद से ही उसकी लाश बेड पर पड़ी रही जिससे उस इमरजेंसी वार्ड में भर्ती अन्य इलाजरत मरीजों को सारी रात काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। मरीजों के अनुसार शाम होते ही शव से दुर्गंध आने लगी जिससे लाश के पास के बेड वाले मरीजों को मजबूरन अपना बेड बदलना पड़ा। पास के बेड पर भर्ती बिहार के सिवान निवासी सीता देवी पत्नी विशुन चौरसिया, शहर के टैगोर नगर निवासी 65 वर्षीय पार्वती पत्नी जनार्दन व हैबतपुर निवासी 35 वर्षीय चंदन सहित अस्पताल के कई मरीजों के परिजनों ने अस्पताल के कर्मचारियों और नर्सों से
लाश हटवाने की गुहार लगाई। लेकीन अफसोस कि अस्पताल प्रबंधन की तरफ से कोइ सुनवाई नही हुई। वार्ड में पड़ी लावारिस लाश और दुर्गंध के बीच मरीजो ने बमुश्किल रात बिताई। बुधवार की सुबह मामला प्रकाश में आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने वहा से लाश को हटाया। इस दौरान 24 घंटे तक लाश ऐसे ही बेड पर पड़ी रही।इस प्रकार की घटना वास्तव में विचलित करने वाली व अस्पताल प्रशासन की नाकामी का सुबूत है।इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड की हालत ऐसी है तो सामान्य वार्ड की स्थिति क्या हो सकती है।
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