बलिया डेस्क: अभी हाल ही बलिया के जिला अस्पताल की बदहाल तस्वीर सामने आई थी जिसमे दूषित पानी पीने से डायरिया की चपेट में आये मरीजों को ज़मीन पर लेटाकर इलाज कराया जा रहा है. इस बीच आज हम आपको बलिया के एक और ऐसा अस्पताल के बारे में बताने जा रहे हैं, जहाँ न तो ढंग के डॉक्टर और दवाओं की कमी की वजह से जनता इलाज के लिए आना नहीं चाहती है. दरअसल हम बलिहार गाँव की जहाँ के CHC एवं PHC हैं तो लेकिन किसी काम के नहीं हैं.
हालाँकि कभी यह इलाके के लोग बड़ी तादाद यहीं आते थे इलाज कराने लेकिन अब ऐसा नहीं है. भवन तो बना हुआ है लेकिन खोखला है. बेहतर इलाज के अभाव में लोग परेशान हैं लेकिन फिलहाल इस पर किसी की नज़र नहीं पड़ रही है. प्रशासन भी इसे लेकर गंभीर नहीं है. बड़ी बात यह है कि जब भी गाँव में कोई बड़ी बी’मा’री फैली है, लोगों ने सीएम से लेकर CMO तक अपनी आवाज़ पहुंचाई है लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला. हाथ लगी तो सिर्फ निराशा.
ऐसा लगता है कि आम जनता की किसी को परवाह ही नहीं है. इन सामुदायिक केन्द्रों की स्थिति को देखकर तो ऐसा ही लगता है. खैर, इलाज के अभाव में लोग हताश और परेशान हैं. इधर उधर भागने के सिवा उनके पास कोई और रास्ता नहीं बचा है. वहीँ लोगों ने प्रशासन से उम्मीद अभी भी लगाई हुई है.
कभी तो उनकी नज़र इस पर पड़ेगी. फिलहाल लोगों को इसी का इंतजार है. अस्पताल बस अब नाम भर का रह गया है. भवन खड़ा है लेकिन किसी काम का नहीं. वह भी जर्जर होता जा रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर गरीबों की जा’न की यूँ अनदेखी की जा रही है तो फिर इसके बजट का पैसा कहाँ जा रहा है?
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