वाराणसी डेस्क– असत्यज पर सत्यस और बुराई पर अच्छााई की जीत के प्रतीक के तौर पर मनाई जाने वाले विजयदशमी के त्योहार की रौनक पूरे देश में देखने को मिल रहा है. इस दिन ही रावण दहन किया जाता है. दरअसल माना जाता है कि दशमी के दिन ही भग’वान् राम ने दस सिर वाल रावण का वध किया था. इसके अलावा इस दिन ही महिषासुर का माँ दुर्गा ने वध किया था और इस तरह देवताओं को उसके आ’तंक से मुक्त कर दिया था.
नौ शक्तियों की जीत के उत्सव के तौर पर विजयदशमी का त्योहार मनाया जाता है. बहरहाल, इस बीच इस मौके पर वाराणसी के करपात्री धाम में स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने माँ दुर्गा की विधि विधान से पूजा की. करपात्री जी माहराज के सिद्धांतों पर चलने वाले स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कामना की कि माँ दुर्गा की कृपा सभी पर बनी रहे. उन्होंने कहा कि हर तरह समृद्धि बनी रहे, यही उनकी प्राथना है.
इसके अलावा उन्होंने कहा कि देश विकास की पटरी पर आगे बढ़ें, यही उनका कामना है.इस दौरान कुँवारी कन्याओं को भोजन भी कराया गया. आपको बता दें कि कन्याओं को भोजन कराकर अपना व्रत खोला जाता है. इस दौरान युवा चेतना के प्रमुख रोहित कुमार भी मौजूद रहे.रोहित ने कहा कि उनकी यही कामना है कि देश में भाईचारा बना रहे और सभी लोग मिल जुलकर एक दुसरे के त्योहार में शामिल होते रहें.
यही देश की तहजीब और इतिहास है. आपको बता दें कि दशहरा के त्योहार का महत्व आज भी प्रासंगिक है. यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि तमाम बुराई के रूप में आज भी रावण जिंदा है. ऐसे में अगर हमें जीतना है और रावण को हराना है तो सबसे पहले हमें समाज में व्याप्त बुराइयों को ख़त्म करना होगा. सही मायने में ऐसा करके ही रावण पर विजयी हुआ जा सकता है.
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