गरीबी से दम तोड़ता बलिया का यह परिवार, 4 बच्चों के साथ फांकाकशी करने को मजबूर

बलिया। क्या सावित्री के लिए भी शासन की तरफ से कोई सरकारी योजना है? यदि हां तो कोई जिम्मेदार उसे उससे आच्छादित कर दें, क्योंकि गरीबी के तपते रेगिस्तां में सावित्री अपने 4 नाबालिग बच्चों को लेकर फांकाकशी करने को मजबूर है।

समय रहते शासन-प्रशासन की नजरें इस पर इनायत नहीं हुई तो वह काल के गाल में समाहित हो जाएगी।

हम बात कर रहे हैं मनियर ब्लाक के घाटमपुर गांव की, जहां का प्रधान पंचदेव यादव सरकारी धन के गबन व अनियमितता के आरोप में सस्पेंड हो गया है।

ग्राम पंचायत का कार्य ग्राम पंचायत की समिति के माध्यम से हो रहा है। घाटमपुर राजभर बस्ती निवासी सावित्री देवी पत्नी जीतन राजभर बीमार महिला है।

कुपोषण का आलम यह है कि के पति-पत्नी दोनों क्षय रोगी हैं। घर में अनाज का एक दाना भी नहीं है, जिससे वह अपना तथा अपने नाबालिग बच्चों का पेट पाल सके।

पति जीतन राजभर पुत्र दीना राजभर भी बीमार ग्रस्त है। संभवत: पति पत्नी दोनों टीवी रोग से ग्रसित है। इसके दो जुड़वां लड़के गोलू व सोनू 15 वर्ष, अंकित 5 वर्ष व एक लड़की सुनीता 10 वर्ष की है।

बड़ी लड़की निशा (20) की शादी हो चुकी है, जो अपने छोटे भाई अंकित को अपने साथ रखकर उसका परिवरिश करती है। पीड़ित सावित्री बताती है कि चार-चार, पांच-पांच रोज चूल्हा नहीं जलता।

कभी कभी सास-ससुर कुछ अनाज दे देते हैं तो उनकी रहमोकरम पर भोजन मयस्सर हो जाता है। जब उसका हाल जानने पत्रकार पहुंचे तो वह बीमार हालत में झोपड़ी में चारपाई पर लेटी पड़ी मिली।

आवास के नाम पर केवल उसके पास दो झोपड़ी है, जिसमें एक में चारपाई तथा दूसरे में भोजन बनाने के लिए मिट्टी का चूल्हा। देखने से लग रहा था कि दो-तीन दिनों से चूल्हा जला नहीं था।

राशन कार्ड के विषय में पूछे जाने पर सावित्री देवी ने बताया कि राशन कार्ड था जो भूल गया। सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान पर जाने व गिड़गिड़ाने पर अनाज तो मिल जाते हैं, लेकिन राशन उठाने के लिए भी हाथ में पैसे नहीं रहते।

उक्त महिला को शासन प्रशासन की तरफ से न तो कोई पेंशन मिलती है न इसको प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत चूल्हा व सिलेंडर ही मिले हैं। इसको न तो कोई आवास मिला है नहीं शौचालय बनाया गया है।

घर पर उक्त महिला के अलावा न तो उसके बच्चे थे न पति। हां सास मंगली जरूर मिली, जो बता रही थी कि हम लोग भी गरीब आदमी हैं। देखा नहीं जाता तो कभी-कभार थोड़ा बहुत अनाज इसको दे देते हैं।

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