बलिया में सरयू नदी उफान पर है। सरयू नदी के क़हर से कई गावों के ग्रामीण परेशान है। कई ग्रामीणों के आशियाने, ज़मीन और फसल सरयू नदी के तेज़ धाराओं में बह गई है। ऐसे में ग्रामीणों को भारी नुक़सान हो रहा है। सरयू के कटान से पीड़ित परिवार प्रशासन से मदद माँग रहे हैं, लेकिन सरकार और बाढ़ विभाग मूक दर्शक बना हुआ है।
बता दें कि बैरिया के सुरेमनपुर दियराचंल के गोपाल नगर टाड़ी गांव इन दिनों प्रकृति की मार झेल रही है। सरयू नदी की धाराएं बेकाबू गई है, जिससे कटान तेज हो गया है। गांव के काली मंदिर के नदी में समाने के साथ ही चार अन्य लोग अशोक यादव, भरत यादव, लक्ष्मण यादव व शिवजी यादव का आशियाना सरयू नदी में विलीन हो गया है। उधर मुखराम यादव, छपित यादव, किसुन यादव, नन्हक यादव, राजेश यादव, मुसाफिर यादव, महातम यादव, सुरेंद्र यादव का मकान कटान के मुहाने पर आ जाने से उक्त लोग अपने हाथों से अपना आशियाना उजाड़ना शुरू कर दिए हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि रविवार को करीब 50 एकड़ उपजाऊ जमीन सरयू नदी में विलीन हो चुका है। बाढ़ राहत और बचाव के नाम पर यहां सब कुछ शून्य हैं। कटान रोधी कार्य भी नहीं हो रहे हैं। कटान पीड़ितों ने बताया कि यहां नेता आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और चले जाते हैं। धरातल पर कटान रोकने के लिए कुछ भी व्यवस्था नहीं हो रही है। लगातार नदी उपजाऊ जमीन और लोगों के खून पसीने से बने मकान नदी में समेटती जा रही हैं। उसे बचाने का कोई ठोस उपाय नहीं हो पा रहा है।
बलिया के लोगों का आरोप है कि बाढ़ विभाग कटान रोकने की मंशा नहीं रखता है। कटान रोकने के नाम पर उन्हें अपना मतलब साधना उद्देश्य रह गया है। यही स्थिति रही तो शिवाल मठिया, गोपाल नगर, मानगढ़, वशिष्ठ नगर सहित दियराचंल के कुल आधा दर्जन गांवो की तीस हजार की आबादी अगले कुछ समय में पूरी तरह से सरयू नदी में विलिन हो जाएगी। आज जिन चार लोगों के आवासीय मकान सरयू नदी के कटान से कटा है। उनके बच्चे व परिवार रिश्तेदारी में चले गए हैं।
वहीं परिवार के एक या दो पुरुष सदस्य गांव में मौजूद है, जो सूनी आंखों से सरजू नदी की तरफ अपनी तबाही की मंजर देखने पर विवश हैं। दूसरी तरफ जिन लोगों का मकान कटान के मुहाने पर पहुंचा है। उसे घर के सभी स्त्री पुरुष आनन फानन मे अपने मकान को उजाड़ रहे हैं। मौके पर केवल लेखपाल राजू यादव मौजूद थे। अन्य अधिकारी उपस्थित नहीं थे।
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