बलिया में नदियां उफान पर है एक तरफ जहां घाघरा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटवर्ती इलाके के लोगों में मन ही मन एक खौफ समा गया है। रेवती थाना क्षेत्र के दतहां आसमानपुर तीलापुर नौका गाँव सहित आधे दर्जन गांव के लोग घाघरा की लहरों को देखकर अंदर ही अंदर डर रहे हैं। बाढ़ विभाग की माने तो घाघरा खतरे के लाल निशान को पार कर चुकी है।
ग्रामीणों की माने तो दिनों दिन घाघरा के जलस्तर में बढ़ोत्तरी हो रही है। चारों तरफ जल ही जल दिखाई दे रहा है बाढ़ विभाग की माने तो घाघरा खतरे के लाल निशान को पार कर चुकी है वैसे किसी तरीके का आसन्न खतरा नहीं दिखाई दे रही है लेकिन दतहां के पास और तिलापुर के पास पहुंचते ही घाघरा की मचलती लहरें अपनी पूरी रवानी में हिचकोले खाती हुई पश्चिम से पूर्व की तरफ बढ़ रही है 77 किलोमीटर की लंबाई में बना हुआ तुर्तीपार श्रीनगर बंधा में कई ऐसे संवेदनशील स्थान है।
जहां साहिल जैसे जानवरों ने बंधे के अंदर ही अंदर अपना मांद बना लिया है। बाढ़ विभाग के अधिकारियों की माने तो किसी तरीके का खतरा दिखाई नहीं दे रहा है। पिछले दो दशकों में घाघरा ने तटवर्ती इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया है हजारों हजारों हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि के साथ साथ कच्चे-पक्के सैकड़ों मकान को अपने आगोश में ले लिया हैै। जिसकी वजह से आज भी सैकड़ों परिवार टीएस बंधे पर अपना आशियाना बनाकर रहते हैं। कहना गलत नहीं होगा कि घाघरा की मदमस्त लहरें पिछले दो दशक से इस क्षेत्र में अपना कहर बरपा रही है।
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