बलिया डेस्क : पंचायत चुनाव में आरक्षण का पर्दा उठ चुका है। लिहाजा गंवई राजनीति का पारा भी धीरे धीरे चढऩे लगा है। महीनों पहिले से चुनावी समर में ताल ठोकने वाले कहीं उदास बैठे हैं तो कहीं कुछ लोंगों अपनी जीत सुनिश्चत मान कर चल रहे हैं। बहरहाल सबका अपना-अपना गणित है।
इन सबके बीच गांव में चुनावी चकल्लस भी जोर पकडऩे लगी है । ऐसा ही एक दॄश्य बुधवार को पंदह ब्लॉक के ग्राम सभा खड़सरा में देखने को मिला। ब्लॉक की बड़ी पंचायत में शामिल होने का दर्जा प्राप्त इस गांव को लेकर महीनों से लोग सामान्य होने कयास लगा रहे थे। कुछ लोग तो एक साल पहले से ही चुनावी तैयारी में जुटे थे।
चुनावी बाजी मारने के लिए अब तक लाखों रुपये खुशामद में खर्च भी कर चुके थे। उम्मीद थी कि इस बार वर्षों की मुराद पूरी होगी लेकिन आरक्षण ने उनके अरमानों पर न सिर्फ पानी फेर दिया बल्कि लोंगों को चर्चा करने का मौका दे दिया है। बाजार स्थित चाय की एक दुकान पर मौजूद लोग आपस मे चर्चा करते नजर आए।
चाय की चुस्कियों के बीच हरदेव ने तंज कसा एक बार फिर अरमान धरे के धरे रह गइल। भगवानों लागत परीक्षा ले तारन, बेचारा कई साल से सपना सजवले रहल ह, लेकिन भागि साथ नईखे देत। इसी बीच वहां मौजूद रविन्द्र अपने को रोक नहीं पाए। कहा कि एक जाना पांची बरिस बड़ा राजनीति कईलन ह ये बेरी औकात बुझाई। वही मौके पर मौजूद शमशेर ने कहा कि ये बेरी चुनाव लडलन त गइलन बेटा।
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