बलिया में इस बार मानसून जबदरस्त ढंग से मेहरबान नजर आ रहा है, और मानसून की इस मेहरबानी की गवाही आंकडे भी दे रहे हैं। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले में लगातार कई दिनों से बारिश हो रही है, नतीजतन छोटी-बड़ी नदियां और नाले उफान पर हैं। कहीं दीवार धराशायी हो गई तो कहीं मकान। घर सहित खेत, तालाब में तब्दील हो गए हैं। सड़कों के हाल बेहाल है। जिले के इलाके के कई रास्ते नदियों के उफान के चलते बंद हो गए हैं तो कई घरों में पानी भर गया है।
भारी बारिश से जिले में बाढ़ जैसे हालात हैं। गंगा नदी उफान पर है। गंगा नदी का जलस्तर लाल निशान को पार कर दिया है। नदी की लहरें से अब कटान तेज हो गया है। गंगा अब तटीय भू-भाग को खुद में समेट रही है। कुछ लोग अपने घरों के सामानों को समेटकर सुरक्षित स्थान की ओर पलायन कर रहे हैं। पूरे जिले में दहशत का माहौल है।केन्द्रीय जल आयोग गायघाट के मुताबिक, बुधवार की सुबह 8 बजे नदी का जलस्तर 57.720 मीटर रिकार्ड किया गया। यहां खतरा विन्दु 57.615 मीटर है।
वहीं, नदी के जलस्तर में प्रति घंटे आधा सेमी का बढ़ाव जारी है। इससे आधा दर्जन से अधिक गांवों पर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। इसका जिम्मेदार तटीय लोग सीधे तौर पर बाढ़ विभाग को ठहरा रहे है। वहीं, नदी का तेवर देख बाढ़ विभाग ‘फ्लड फाइटिंग’ का खेल शुरू कर दिया है। वहीं लगातार हो रही बारिश और बाढ़ के खतरे के बीच जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है।
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