बलिया में रेलकर्मचारियों ने मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला, कहीं सब बर्बाद ने कर दे यह नीति

बलिया : सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार लगातार निजीकरण को बढ़ावा दे रही है और सरकारी कंपनियों को पूंजीपतियों के हांथों में सौंप रही है. इंडियन रेलवे के साथ भी सरकार का रवैया ऐसा ही रहा है. ऐसे में अब रेलवे के निजीकरण के खिलाफ भारतीय रेलवे मजदूर संघ ने आवाज़ उठाई है.

पूर्वोत्तर रेलवे श्रमिक संघ से लेकर ऑल इंडिया गार्ड काउंसिल, उत्तर रेलवे कर्मचारी यूनियन और तमाम संगठन ने मिलकर मंगलवार को बलिया स्टेशन पर एक सभा का आयोजन किया और सरकार की निजीकरण की नीति का विरोध किया है. इस दौरान पूर्वोत्तर रेलवे श्रमिक संघ के सहायक मंडल मंत्री मिश्री लाल ने जमकर सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा है कि केंद्र की मौजूदा मोदी सरकार भारत की तमाम कल्याणकारी संस्थाओं मसलन शिक्षा, चिकित्सा परिवहन, सुरक्षा, विद्युत को निजी हांथो में सौंप कर देश को आर्थिक और सामाजिक गुलामी के कागार पर ला रही है.

उन्होंने आगे कहा कि गलत नीतियों और नियंताओं की वजह से इंडियन रेलवे आज बदहाल स्थिति में है. उन्होंने कहा कि रेल कर्मियों में इतनी काबिलियत और क्षमता है कि वह लक्ष्य से ऊपर जाकर उत्पादन और संवर्धन कर सकते हैं. उन्होंने आगे कहा कि इंडियन रेलवे महज़ व्यवसायिक ही नहीं बल्कि कल्याणकारी संस्था भी है. उन्होंने कहा कि यह संस्था लाभ जे साथ साथ समाज के एक बड़े हिस्से का पोषण करती हैं.

अध्यक्ष हमीदुल्लाह ने कहा कि इंडियन रेलवे कोई उद्योग नहीं है. उन्होंने कहा कि यह एक धमनी है. जिसके कट जाने से राष्ट्र की कई शिराएं सूख जाएंगी. उपाध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि रेल की वजह से सस्ती ढुलाई मुमकिन है और इसकी वजह से देश भर में उद्योग धंधे फल फूल रहे हैं. उन्होंने कहा कि निजीकरण से सब कुछ महंगा हो जायेगा.

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