बलिया में लचर स्वास्थ्य व्यवस्था, ड्यूटी के वक्त घर में आराम फरमाते डॉक्टर्स, इमरजेंसी वार्ड पर लटका ताला

बलिया।जिले में चरमराती स्वास्थ्य सुविधाओं का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। समय पर इलाज न मिलने से मरीजों की मौत तक हो रही है। एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध होने के बाद भी इस्तेमाल नहीं जाता। अस्पतालों में डॉक्टर्स ही नदारद रहते। नतीजन समय पर एंटी स्नेक वेनम नहीं मिलने से मरीज की मौत हो जाती है। सर्प दंश की अधिकांश घटनाएं रात में ही होती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विषैले सांप दिख जाते हैं। झोपड़ीनुमा मकानों में तो खतरा और भी ज्यादा होता है।

गांवों में सांप काटने के बाद जब परिजन मरीज को लेकर नजदीकी अस्पताल पर पहुंचते हैं तो उन्हें लगभग एक घंटे का समय लग जाता है। अस्पताल पहुंचने के बाद चिकित्सक अपने आवास पर सो रहे होते हैं। ऐसे में उन्हें जगाकर लाने और अस्पताल खोलवाने में तीन घंटे का समय लगता है। तब तक सांप का विष मरीज के पूरे शरीर में फैल जाता है और सुविधा रहते हुए भी मरीज की जान चली जाती है।

सीएचसी सोनबरसा की हकीकत- सीएचसी सोनबरसा पर एंटी स्नेक वेनम के 50 वॉयल हैं, लेकिन रात में यहां के इमरजेंसी वार्ड पर ताला लटका हुआ था। अस्पताल के बाहर टहल रहे एक व्यक्ति ने बताया कि जिस चिकित्साधिकारी की रात में ड्यूटी रहती है, वह अपने आवास में दरवाजा बंद कर सोते हैं। जब अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आशीष कुमार को फोन किया गया तो उन्होंने बताया कि मैं बलिया हूं।

ड्यूटी पर डॉ. अविनाश कुमार हैं, उन्हें भी फोन किया गया तो बात नहीं हो सकी। अस्पताल को सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने गोद लिया है। इमरजेंसी वार्ड को सही तरीके से संचालित करने के लिए सीएमओ ने भी आश्वस्त किया था लेकिन मौके पर हालात ऐसे थे कि यहां पहुंचने के बाद भी सांप काटे मरीज की जान नहीं बच सकती।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नगरा के हालात- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नगरा के भी हालात ठीक नहीं है। रात 10 बजे अस्पताल का मुख्य गेट अंदर से बंद था। बाहर लाइट की कोई व्यवस्था नहीं थी। इमरजेंसी कक्ष भी बंद था। रात में इमरजेंसी की डयूटी फार्मासिस्ट गुलाब राय, वार्ड व्याय अशोक यादव व प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. टीएन यादव की थी। फोन से बात करने पर चिकित्साधिकारी ने बताया कि अस्पताल पर एंटी स्नैक वेनम के 50 डोज उपलब्ध हैं।

मेरे 6 माह के कार्यकाल में सर्प दंश का केवल एक मरीज आया था, जिसे प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया था। यहां मरीजों के भर्ती करने की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसी स्थिति में मरीज को रेफर करना ही बेहतर होता है। रात में इमरजेंसी ड्यूटी के सवाल पर प्रभारी ने बताया कि प्रति दिन बदल-बदल कर चिकित्सक व स्टाफ की ड्यूटी लगाई जाती है।

आखिर कब सुध लेगा स्वास्थ्य विभाग ?- बलिया में सर्प दंश की घटनाएं बढ़ने के बाद भी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सीएचसी सोनबरसा और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नगरा के हालात स्वास्थ्य विभाग की पोल खोल रहे हैं। हालांकि अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी कब तक व्यवस्थाओँ को दुरस्त करते हैं। और कब तक मरीजों को राहत मिलती है।

Ritu Shahu

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