भारत में एक-जगह से दूसरे जगह आने-जाने के लिए लोग सड़कों का इस्तेमाल करते हैं लेकिन अगर आपको बिहार से बलिया जाना है तो नाव से सफर तय करना पड़ेगा। जी हां बिहार के सीवान, छपरा, गोपालगंज, बेतिया और मोतिहारी जिले के लोग नाव से सफर कर रहे हैं।
बिहार से बलिया आने के लिए सड़क मार्ग है, लेकिन लंबी दूरी तय करना पड़ती है। सड़क मार्ग से परिवहन करने में समय भी ज्यादा लगता है। ऐसे में लोग बलिया जाने के लिए नाव का सहारा लेते हैं। सीवान के दरौली घाट से चलने वाली स्ट्रीमर 30 मिनट में ही 5 किलोमीटर की दूरी तय कर बलिया के खरीद घाट पहुंचा देती हैं। हालांकि जब बलिया से वापस बिहार लौटना हो तो 1 घंटे का समय लगता है, क्योंकि नाव को पानी के दिशा के विपरीत चलाना होता है।
बता दें कि बिहार से आने वाले लोग सीवान -मैरवा मुख्य मार्ग, मैरवा-गुठनी मुख्य मार्ग होते हुए बिहार के श्रीकरपुर चेक पोस्ट व मेहरौना पुल पार कर उत्तर प्रदेश पहुंचते हैं। इसके बाद मुख्य मार्ग जाते हैं। दूसरे विकल्प के रुप में लोगों को सीवान से छपरा और छपरा से जय प्रभा बलिया-छपरा सेतु पार कर उत्तर प्रदेश के बलिया जाना पड़ता है। इससे उत्तरप्रदेश के बलिया पहुंचने के लिए 150 से 160 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है।
वहीं यदि लोग सीवान के दरौली घाट से बलिया आते हैं तो मात्र 70 किलोमीटर की दूरी बचती है। लोग सबसे पहले मैरवा-सीवान-मुख्य मार्ग होते हुए मैरवा धाम, मैरवा धाम से मैरवा-दरौली मार्ग होते हुए लोग दरौली घाट पहुंचते हैं। जहां मात्र 30 मिनट में नाव से 5 किलोमीटर दूरी तय कर बलिया के खरीद और खरीद घाट से 45 मिनट में वह बलिया घाट पहुंच जाते हैं।
हालांकि सरयू नदी में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने पर स्ट्रीमर के परिचालन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया जाता है, लेकिन इसके बावजूद नाव पलटने का खतरा बना रहता है। पहले यहां से नाव का संचालन बंद था लेकिन 2016 से लगातार नावों का परिचालन होने लगा है।
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