किसान आंदोलन के समर्थन में चम्पारण जिले से चली पदयात्रा बलिया पहुंच चुकी है।
देशव्यापी किसान आंदोलन के समर्थन में चम्पारण जिले से चली पदयात्रा बलिया पहुंच चुकी है। मंगलवार को किसान जन जागरण पदयात्रा बलिया पहुंची। बलिया से अब यह पदयात्रा बनारस की ओर आगे बढ़ी है। आने वाले 20 अक्टूबर को यह यात्रा अपने मुकाम तक यानी बनारस पहुंच जाएगी। इस यात्रा के जरिए लोगों को किसान आंदोलन और कृषि कानूनों के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
बीते 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर बिहार के चम्पारण जिले से सैकड़ों लोगों ने मिलकर एक पदयात्रा निकाली। इसमें पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं। पदयात्रा में शामिल लोगों का कहना है कि यह एक लोकनीति सत्याग्रह है। जो संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वाहन पर चल रहे किसान आंदोलन का समर्थन करती है।
पदयात्रा में शामिल संजय कुमार ने बताया कि “किसान जन जागरण पदयात्रा 20 अक्टूबर को वाराणसी पहुंचेगी। वाराणसी जा कर हम वहां के मतदाताओं को बताएंगे कि आपने एक ऐसे सांसद को चुना है जो आम जनता की बातें नहीं सुनता है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के किसानों की बात नहीं सुन रहे हैं।” उन्होंने कहा कि “हम संयुक्त किसान मोर्चा की मांगों के समर्थन में यह पदयात्रा कर रहे हैं। केंद्र सरकार तीनों कृषि कानूनों को समाप्त करे।”
संजय कुमार ने कहा कि “देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भारत में सबसे पहला सत्याग्रह बिहार के चम्पारण जिले में ही किया था। उन्होंने तीन कठिया कानून के खिलाफ सत्याग्रह किया था। इसीलिए हमने अपनी पदयात्रा की शुरुआत चम्पारण से ही की है।”
गौरतलब है कि पिछले एक साल से भी अधिक समय से देश के किसान दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे हैं। किसानों की मांग है कि केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीनों नए कृषि कानूनों को खत्म कर दिया जाए। किसानों का कहना है कि ये कानून खेती को पूरी तरह निजी हाथों में सौंपने के मंसूबे से लाए गए हैं।
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