बलिया में वेंटिलेटर पर स्वास्थ्य सेवाएं, 32 लाख की आबादी पर जिले में मात्र 4 एनेस्थीसिया के डॉक्टर

बलिया। किसी भी प्रदेश की तरक्की का ग्राफ इस बात पर निर्भर करता है कि वहां के लोग कितने सेहतमंद है।जनता स्वस्थ रहे, इसके लिए चिकित्सा सुविधाएं दुरुस्त होनी चाहिए, लेकिन उत्तरप्रदेश में इन सेवाओं के हालात निराशाजनक हैं। बात बात पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दम भरने वाली उत्तरप्रदेश सरकार को बलिया की बदतर स्वास्थ्य सेवाएं मुंह चिढ़ाते नजर आ रही हैं। यहां की आबादी तो 32 लाख है लेकिन जिले में केवल चार एनीस्थीसिया के डॉक्टर हैं। जिला अस्पताल में दो, बसंतपुर स्थित एल-2 अस्पताल में दो एनेस्थीसिया के डॉक्टर हैं। बाकी पूरे जनपद में कहीं एनीस्थिसिया के डॉक्टर नहीं हैं। इस वजह से सीएचसी व पीएचसी पर ऑपरेशन की सुविधा नहीं हैं। हालात यह हैं कि मरीजों को गंभीर बीमारियों का इलाज कराने जिले की दौड़ लगानी पड़ती है।

लचर स्वास्थ्य सेवा से परेशान मरीज, प्राइवेट में उपचार उपलब्ध लेकिन आर्थिक ज़ख्म ज्यादा– जनपद में कुल 10 सीएचसी, 13 पीएचसी एवं 67 न्यू पीएचसी संचालित होती है। लेकिन इनमें एनेस्थीसिया डॉक्टर न होने से ऑपरेशन नहीं किया जाता। इसलिए मजबूरन लोगों को प्राइवेट अस्पताल का रुख करना पड़ता है जहां छोटे-बड़े ऑपरेशन किए जाते हैं। जनपद में मौजूद चार एनेस्थीसिया डॉक्टरों में से डॉक्टर दीपक शाह एवं डॉ. गुंजन कुमार जिला अस्पताल में तैनात है।

बसंतपुर स्थित एल-2 अस्पताल में डॉ. अभिषेक कुमार एवं डॉ. उज्जवल को तैनात किया गया है। ऐसे में जिला महिला अस्पताल में कोई ऑपरेशन वाला मरीज आ भी जाता है तो उसे एनेस्थीसिया डॉक्टर के अभाव में बाहर रेफर कर दिया जाता है। प्राइवेट अस्पतालों में शारीरिक रुप से तो मरीजों का उपचार हो जाता है लेकिन इलाज के महंगे- महंगे बिल उन्हें आर्थिक तौर पर बीमार कर देते हैं।

क्या है जिम्मेदारों का कहना? समस्या को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद का कहना है कि जनपद में एनेस्थीसिया डाक्टरों की डिमांड के लिए शासन-प्रशासन को पत्रक भेजा गया है। जनपद में कम से कम 10 एनेस्थीसिया डाक्टर होने चाहिए। जिला अस्पताल सीएमएस डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में एनेस्थीसिया के डा. दीपक शाह एवं डा. गुंजन कुमार तैनात है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन चार से पांच मेजर आपरेशन किए जाते है। पूर्व में इन्हें महिला अस्पताल में भी जाना पड़ता था।

जिससे दिक्कतें होती थी, लेकिन वर्तमान में अब नहीं जाना पड़ रहा है। जिससे अब स्थिति ठीक है। वहीं महिला चिकित्सालय सीएमएस डॉ. सुमिता सिन्हा का कहना है कि जिला महिला अस्पताल में बसंतपुर स्थित एल-2 अस्पताल में तैनात एनेस्थीसिया के डाक्टर अभिषेक कुमार को सीएमओ द्वारा सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक तैनात किया गया था लेकिन वर्तमान में बेहोशी के डाक्टर का अभाव है। गंभीर मरीजों का ऑपरेशन नहीं किया जाता है, ज्यादा दिक्कत होने पर उन्हें रेफर कर दिया जाता है। स्थायी रूप से अपने यहां एनेस्थीसिया का कोई डाक्टर तैनात नहीं है।

Rashi Srivastav

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