सिकन्दरपुर। प्रधानमंत्री मोदी से लेकर मुख्यमंत्री योगी विकास की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। मगर धरातल पर देखने के बाद मोदी-योगी के सारे दावे धराशायी हो जाते हैं। सीएम योगी लाख कोशिशों के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सिस्टम को नहीं सुधार पा रहे। कोरोना महामारी में स्वास्थ्य विभाग की हालत और भी खराब हुई है। सरकार ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त करने का दावा कर रही है, लेकिन हकीकत दावों से मेल नहीं खा रही। यूं तो गांवों में इलाज की जिम्मेदारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सौंपी गई है, लेकिन यहां डॉक्टर ही नही हैं जो बीमारों को अपनी सेवाएं दे सके।
बलिया के सिकन्दरपुर तहसील क्षेत्र का बघुडी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। इलाके के करीब एक दर्जन गांवों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले इस प्राथमिक केंद्र पर पिछले एक पखवाड़े से कोई चिकित्सक नहीं है। यहां तैनात चिकित्सक अनिल सिंह का स्थानांतरण देवकली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर कर दिया। तब यहां किसी को तैनात नही दी गई है। ले देकर एक चिकित्साधिकारी डॉक्टर नीरज के भरोसे यह अस्पताल चल रहा है। बता दें कि उक्त चिकित्साधिकारी को टीकाकरण समेत विभागीय कार्य की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
ज़रा सोचिए एक डॉक्टर विभागीय काम भी देख रहा है तो मरीजों को कौन देखेगा?विभागीय काम देखने के चलते डॉक्टर को आये दिन जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। इसके कारण आम लोगों को वे भी अपनी सेवाएं नही दे पाते हैं। क्षेत्रीय लोगों ने उच्चाधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराते हुए तत्काल चिकित्सक की तैनाती करने की मांग की है।
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