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बलिया में भी ‘जुगाड़’ पर चल रहे होटल और लाज, नहीं हैं आग से बचने के इंतजाम

बलियाः सरकार के द्वारा स्कूल, कॉलेज, लॉज, होटल, अस्पतालों व अन्य भवनों में आगजनी से बचाव के लिए कुछ मानक तय किए हैं, लेकिन अधिकतर भवनों में इन निर्देशों का जरा भी पालन नहीं किया जाता। हाल ही में लखनऊ होटल में हुई आगजनी से घटना से यह साफ हो गया है कि भवन संचालकों के द्वारा सरकारी आदेशों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

हैरानी की बात तो यह है कि मानकों की अवहेलना के बावजूद भी संबंधित विभाग व जिम्मेदार अधिकारी भवनों को एनओसी यानि अनापत्ति प्रमाण पत्र भी जारी कर देते हैं। विभागीय अधिकारियों की इस लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। बता दें कि किसी भी भवन का निर्माण करने से पहले बकायदा कई विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है। ऐसे में अधिकारियों व कर्मचारियों को भवन में जाकर चेक करना होता है कि आगजनी से बचाव के उपकरण है या नहीं। लेकिन विभागीय कर्मचारियों के द्वारा अनदेखी की जाती है।

सरकारी अधिकारियों की मानें तो सरकारी, गैर सरकारी भवनों मसलन अस्पताल, स्कूल-कॉलेज आदि में प्रिंकलर सिस्टम बनाना चाहिए। इसमें एक कवारा होता है, जो आग लगने की स्थिति में ऑटोमैटिक पानी फैलाने लगता है। कई अस्पताल में यह सिस्टम लगे भी हैं लेकिन इनमें पानी नहीं भरा जाता। जिससे आग के समय यह काम नहीं करते। इसके अलावा अस्पताल के एसी कमरे और ऑक्सीजन सिलेंडर से आग जल्द फैलती है। वहीं कई अस्पतालों में इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था ही नहीं है।

जिला अस्पताल में चौड़ा मुख्यद्वार व परिसर में पर्याप्त स्थान है, वहीं कई निजी नर्सिंग होमों में उचित जगह तक नहीं है। चौक, विशुनीपुर, टाउनहाल आदि स्थानों पर सकरी गलियों में आभूषण की दुकानें हैं. जहां हमेशा गैस सिलेंडर मौजूद रहते है। हालांकि कोई दुकानदारों ने आग से बचने के प्राथमिक उपाय मसलन सीज फॉवर आदि की व्यवस्था कर रखी है। कई दुकाने प्रतिष्ठान सकरी गलियों में है, जिससे आग लगने की स्थिति में फॉयर ब्रिगेड का वाहन मौके पर नहीं पहुंच पाता है। कई बार यहां घटनाएं हो चुकी है।

इतने सब के बाद जिला का फायर सिस्टम परेशानी को और भी बढ़ा देता है। जिले में 5 फायर सेफ्टी सर्विस स्टेशन क्रियाशील हैं लेकिन यहां चालाकों की बेहद कमी है। जनपद के अग्निशमन दस्ता के पास छोटी-बड़ी कुल 17 गाड़ियां है। सभी स्टेशनों को मिलाकर 12 चालकों का पद सृजित है, इसके सापेक्ष वर्तमान में छह चालक तैनात हैं। इसी तरह फायरमैन 69 पदों के सापेक्ष 48 की तैनाती है। जिससे आगजनी के समय टीम को पहुंचने में दिक्कत होती है।

मुख्य अग्निशमन अधिकारी धरिन्द्र सिंह यादव के अनुसार अग्निशमन दस्ता के पास पांच हजार लीटर पानी टैंक की क्षमता वाली बड़ी गाड़ी तीन, दो हजार लीटर पानी टैंक की क्षमता वाली बड़ी गाड़ी पांच, दो हजार लीट हाईप्रेशन क्षमता की एक, 400 लीटर हाईप्रेशर क्षमता की चार, बुलेरो टेम्पर चार हैं लेकिन चालक सिर्फ 6 ही हैं।

 

Rashi Srivastav

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