बलिया के नगरा के सिकरहटा गांव के पास लहुलुहान हालत में मिली किशोरी की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार पिता की मर्जी के खिलाफ वाराणसी के हरिश्चंद्र घाट पर कर दिया गया। युवती के पिता चाहते थे कि उसका अंतिम संस्कार उसके गांव पर ही हो लेकिन अचानक ही उसका अंतिम संस्कार वाराणसी में कर दिया गया।
इस घटना में सबसे संदिग्ध बात यह है कि अंतिम संस्कार से पहले युवती के पिता सहित वहां पर मौजूद सभी लोगों के फोन स्विचऑफ मिले और जब फोन ऑन हुए तब तक अंतिम संस्कार हो चुका था। युवती की मौत के बाद इस तरह से अचानक अंतिम संस्कार कई सवालों को जन्म दे रहा है।
आखिर क्यों आनन-फानन में युवती का अंतिम संस्कार कर दिया गया। उसकी मौत के साथ ही घटना के कई राज दफ्न हो गए। इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस बीते 7 दिनों में कुछ खास खुलासे नहीं कर पाई। जिस आरोपी को पकड़ा उसके साथ मुठभेड़ भी हई। लेकिन घटना के कारणों का पर्दाफाश नहीं हुआ।
बता दें कि बीते 14 अक्टूबर की शाम को 13 वर्षीय किशोरी अपने गांव के इंटर कालेज में रावण बध का मेला देखने गयी थी लेकिन अगले ही दिन वह खून से लथपथ हालत में सिकरहटा गांव के पास सड़क किनारे मिली। जिसके हाथ में धारदार हथियार से काटे जाने का निशान था। उसकी हालत देखकर लोगों ने दुष्कर्म की आशंका जताई। युवती को तुरंत अस्पताल भेज गया जहां से उसे गंभीर हालत में वाराणसी रेफर कर दिया गया। लेकिन इलाज के दौरान युवती की मौत हो गई। उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। अब पीड़ित का परिवार न्याय की आस में है, ताकि आरोपियों को उनके किए की सजा मिल सके।
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