विजय दिवस: कारगिल के हीरो थे बलिया के शहीद अवनीश यादव

बलिया :  3 मई 1999 को शुरू होने वाला कारगिल युद्ध आज के ही दिन यानी 26 जुलाई 1999 को समाप्त हुआ था। इस युद्ध में भारतीय सेना के बहादुर जवानों ने सैकड़ों पाकिस्तानी सैनिकों को गोलियों से छलनी कर दिया था और जो बच गए थे वे दुम दबाकर भाग गए थे।

हालांकि अपनी वीरता का परिचय देते हुए कई भारतीय सैनिक शहीद हुए थे।  शहीद सैनिकों में बलिया के अवनीश कुमार यादव  भी शामिल थे । कारगिल युद्ध के दौरान दर्जनों दुश्मनों को मार गिराने के बाद अवनीश कुमार यादव खुद भी दुश्मनों की गोलियों का निशाना बन गए थे।

बैरिया तहसील के जयप्रकाशनगर क्षेत्र में इब्राहिमाबाद नौबरार (अठगांवा) पंचायत के दलेल टोला निवासी शहीद अवनीश कुमार यादव के परिजन आज भी उस दिन को याद करके रो पड़ते हैं।

देश के लिए अपने बेटे को कुर्बान करने वाले पिता तब से ही शहीद की एक प्रतिमा और उसके नाम पर एक प्रवेश द्वार की मांग करते रह गए लेकिन  उनकी मुराद आज तक पूरी नहीं हुई। बहुत से रहनुमाओं ने शहीद के नाम पर बहुत कुछ करने को कहा था लेकिन समय के साथ सब कुछ ओझल हो गया।

अविनाश कुमार के पिता के मुताबिक ‘मैं भी सीआरपीएफ से रिटायर्ड होकर घर आया हूं। शहीद बेटे की शादी के अभी दो साल ही हुए थे कि कारगिल युद्ध छिड़ गया। युद्ध के दौरान ही घर सूचना आई कि बेटा दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हो गया। तब काफी दिनों तक मेरा पूरा परिवार सदमे से बाहर नहीं आ पा रहा था। एक वर्ष तक तो लोगों का घर पर तांता लगा रहा।

शहीद की पत्नी के नाम पर सरकार की ओर से एक पेट्रोल पंप जरूर मिला है ¨लेकिन  मेरी खुद की ऐसी इच्छा  थी के उसके नाम पर गांव में एक प्रवेश द्वार बने और शहीद बेटे की एक प्रतिमा भी स्थापित  की जाए।

वह मुराद आज तक पूरी नहीं हो सकी। ढ़ाले पर एक स्मारक का निर्माण कराया गया है जहां इस तिथि को हम परिवार के लोग अपनी श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं लेकिन  प्रतिमा और प्रवेश द्वार वह सपना आज तक पूरा नहीं हो सका।

 

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